उ.प्र: बारिश के पानी को संचित कर भूजल स्त्रोतों को बचायेगें-मुख्य विकास अधिकारी, अमरोहा

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अमरोहा, 20 जुलाई 2017: मुख्य विकास अधिकारी चन्द्रपाल सिंह की अध्यक्षता में आज भूजल सप्ताह के सम्बंध में गोष्ठी का आयेजन किया गया। गोष्ठी में भूगर्भ जल संचय एवं भूगर्भ जल संवर्धन बढ़ाना तथा जल दोहन को नियन्त्रित करने के संबंध में विस्तार से परिचर्चा हुई। दिनांक 16 जुलाई 2017 से 22 जुलाई 2017 तक भूगर्भ जल सप्ताह मनाया जा रहा है। इस सम्बंध में मुख्य विकास अधिकारी चन्द्रपाल सिंह ने जानकारी दी कि विगत वर्षो में प्रदेश में बढ़ती हुई जनसंख्या एवं औद्योगिकीकरण के कारण जल संसाधनों की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भूगर्भ जल स्त्रोतो का अनियन्त्रित एवं अविवेकपूर्ण दोहन किया जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी ने जल संरक्षण की शपथ दिलाते हुए कहा कि हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपनी दिनचर्या में पानी की बर्बादी रोकेगें, अंधाधुन्ध भूगर्भ जल दोहन को नियन्त्रित करेगें तथा भावी जल निधि के रूप में बारिश के पानी को संचित कर भूजल स्त्रोतों को बचायेगें।
उन्होने जानकारी दी कि प्रदेश के 2017 समस्याग्रस्त विकास खण्डों एवं शहरी क्षेत्रों में भूजल संसाधनों की स्थिति में सुधार लायेग जाने के उद्देश्य से प्रदेश में “राज्य भूजल संरक्षण मिशन” के रूप में महत्वाकांक्षी एवं अभिनव योजना आरम्भ की जा रही है। इसके अन्तर्गत संकटग्रस्त क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन एवं भूजल रिचार्ज की उपयुक्त विधियों की संरचना करते हुए भूजल संसाधनों की उपलब्धता में प्रभावी स्तर तक सुधार लाये जाने का लक्ष्य है।
उन्होने बताया कि भूजल सप्ताह मनाये जाना है उक्त वर्ष का मुख्य विचार बिन्दु “भूजल जीवन की आस-संरक्षण का करों प्रयास” रखा गया है, जिस पर आयोजन केन्द्रित रहेगा। उन्होने बताया कि भूजल सप्ताह का आयोजन राज्य, मण्डल, जनपद, तहसील एवं विकास खण्डों में विशेष रूप से स्थानीय स्कूलों/कॉलेजों/शैक्षिक संस्थानों की व्यापक सहभागिता के साथ किये जाने के परिचर्चा और संवाद, निबन्ध प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, स्लोगन राईिंटग प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जायेगा।
उन्होने बताया कि कठपुतली का प्रदर्शन, लोक नृत्य/गीत और नुक्कड़नाटक आदि का आयोजन करना, पोस्टर्स, होडिंर्ग्स, बैनर्स आदि का प्रदर्शन, प्रदर्शनी , मेलों, उत्सव आदि का अयोजन, पद यात्राओं, रैलियों, संगोष्ठियों, साईकिल परेड आदि का आयोजन किया जायेगा।
उन्होने कहा कि भूगर्भ जल संरक्षण के लिए मुख्य विकास अधिकारी श्री चन्द्रपाल सिंह ने कहा कि जल संरक्षण के लिए अपने घरों में आवश्यकता अनुसार पानी इस्तेमाल में लाएं। अतिदोहित एवं क्रिटिकल श्रेणी के संकटग्रस्त क्षेत्रों में माइक्रो सिंचाई के अन्तर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को प्रभावी रूप से अपनाए जाने से जहां एक ओर सतही एवं भूगर्भजल के उपयोग व दोहन में कमी होगी, वहीं दूसरी ओर जल की बचत व ऊपज भी अच्छी होगी।
मुख्य विकास अधिकारी चन्द्रपाल सिंह ने सतही एवं भूजल का सहयुक्त वं समन्वित उपयोग को प्राथमिकता पर अपनाने पर जोर दिया। उन्होने कहा कि नहर जल व भूगर्भ जल के साझा प्रयोग से सिंचाई की जाये। उन्होने कहा कि भूजल रिचार्ज के लिए छतों से प्राप्त होने वाले वर्षा जल को गडढों, पुराने कुएं व जलाशय में पहुंचाकर रिचार्ज किया जा सकता है।
बैठक में, जिला विकास अधिकारी श्री मदन वर्मा, परियोजना निदेशक श्री मिथलेश कुमार तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश, डी.पी.आर.ओ. लालचन्द गुप्त, डी.आई.ओ.एस., रामाज्ञा आदि सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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