गुरूग्राम: पोक्सो एक्ट के अंतर्गत पुलिस अधिकारियों के लिए कार्यशाला का आयोजन

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जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा गुरूग्राम पुलिस के साथ मिलकर पोक्सो एक्ट के अंतर्गत दोषियों को सजा दिलवाने के लिए इलैक्ट्राॅनिक सबूत एकत्रित करने के तरीके पुलिस अधिकारियों को बताने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। 

पुराने सीपी कार्यालय के काॅन्फें्रस हाॅल में आयोजित इस कार्यशाला में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सदस्य सचिव एवं चीफ जुडिशियल मैजिस्टेªट नरेंद्र सिंह ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि बच्चों के साथ अपराध होने पर दोषियों को सजा दिलवाने के लिए सबूतों को सही ढंग से एकत्रित करने की अहम भूमिका है। इसमें इलैक्ट्राॅनिक उपकरणों जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटाॅप, सीसीटीवी कैमरे आदि से कैसे एविडैंस अर्थात् सबूत सुरक्षित ढंग से एकत्रित करना जरूरी है। 
उन्होंने उच्च न्यायालय के अरनेस कुमार बनाम बिहार राज्य तथा अन्य केस का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारियों को बताया कि उनकी व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्तियां तथा हिरासत में लेने का औचित्य, दोनों में अंतर है इसलिए 7 साल कारावास तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस को एफआईआर दर्ज होते ही तत्काल व्यक्ति को हिरासत में लेने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए बल्कि आरोपी को जांच में शामिल होने का नोटिस देना चाहिए। ऐसा नहीं करना उनके लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। नरेंद्र सिंह ने उच्चतम न्यायालय द्वारा गुजरात राज्य बनाम कृष्ण भाई में सुनाए गए फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि आरोपी का बरी होना न्याय की असफलता है क्यांेकि एक निर्दोष को ट्रायल से गुजरना पड़ा और दोषी सजा से बच गया।
इससे पहले जुडिशियल मैजिस्टेªट प्रथम श्रेणी डा. सुष्मा ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि किस प्रकार से उन्हें इलैक्ट्राॅनिक एविडेंस इक्कट्ठे करने चाहिए। उन्होंने बताया कि कंप्यूटर की हार्ड डिस्क किसी एक्सपर्ट से निकलवाई जानी चाहिए ताकि उसमें दर्ज डाटा का नुकसान ना हो और उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को एविडेंस एक्ट की धारा-65बी के अंतर्गत कौन सर्टिफिकेट दे सकता है इसके बारे में भी बताया। 
उप जिला न्यायवादी अनुराग हुड्डा तथा पैनल अधिवक्ता डा. सुजान सिंह ने भी विभिन्न न्यायिक पहलुओं के बारे में जानकारी दी। 

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter