गुरूग्राम में हजारों मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है

नेटमीटरिंग द्वारा अनेक घरों व भवनों के मालिक अपना बिजली का बिल न्यूनतम स्तर तक ला चुके है और प्रति वर्ष लाखों रूपये की बिजली की बचत कर रहे हैं

हरियाणा प्रदेश के मिलेनियम सिटी कहे जाने वाले जिला गुरूग्राम में सौर उर्जा का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।इस जिला में साक्षरता दर प्रदेश में सबसे अधिक है, इसलिए लोग नई तकनीक को आसानी से समझ पाते हैं और वे नई तकनीक को अपनाते भी जल्दी हैं। यहां के लोगों को यह समझ में आ गया है कि सौर उर्जा के उपयोग से वे ना केवल अपने घर का बिजली बिल कम कर सकते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे सकते हैं। 
वर्तमान भाजपा सरकार बनने के बाद गुरूग्राम जिला में सौर उर्जा उपकरणों को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए हैं और इस सरकार के पिछले लगभग साढ़े चार वर्षों में गुरूग्राम जिला में सौर उर्जा से ग्रिड कनेक्टिड रूफटाॅप पावर प्लांट स्थापित करके 40 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन भी शुरू हो चुका है। सौर उर्जा में रूचि रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि गुरूग्राम में कनेक्टिड रूफटाॅप सोलर पावर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं और जब से कुछ रिहायशी सोसायटियों में सौलर रूफटाॅप प्लांट लगाने से उनका बिजली का बिल कम हुआ है तब से दूसरे लोगों का भी इस तरफ रूझान होने लगा है। 

गुरूग्राम में ग्रिड कनेक्टिड रूफटाप लगाने के कार्य की देखरेख नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग गुरूग्राम द्वारा की जा रही है और इस विभाग के मुखिया अतिरिक्त  उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा हैं। रजा के अनुसार जिला गुरूग्राम के शहरी, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों की छतों पर ग्रिड कनैक्टिड रूफटाॅप सोलर पावर प्लांट से हजारों मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। यहां पर वैकल्पिक उर्जा स्त्रोत की संभावनाएं काफी हैं और लोगों को यह काॅन्सेप्ट समझ आने के बाद वे जल्द अपना भी लेते हैं। 
उन्होंने बताया कि पूरे वर्ष में लगभग 320 दिन सूर्य का प्रकाश उपलब्ध रहता है। एक किलोवाट ग्रिड कनैक्टिड रूफटाॅप सोलर पावर प्लांट द्वारा सूर्य के प्रकाश से प्रतिदिन 4 से 5 यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है। इस प्रकार, एक किलोवाट ग्रिड कनैक्टिड रूफटाॅप सोलर पावर प्लांट से वर्षभर में 1200 से 1500 यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है। उन्होने बताया कि यदि इस का समुचित उपयोग किया जाए तो गुरूग्राम में हजारों मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। इस प्रणाली के तहत अब तक गुरूग्राम जिला में 1000 से ज्यादा जगहों पर सोलर रुफटॉप इंस्टाॅल किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा अब तक लाभार्थियों को 5 करोड़ 80 लाख रूप्ये की सब्सिडी दी जा चुकी है। नेटमीटरिंग द्वारा अनेक घरों व भवनों के मालिक अपना बिजली का बिल न्यूनतम स्तर तक ला चुके है और प्रति वर्ष लाखों रूपये की बिजली की बचत कर रहे हैं। 
  उन्होने यह भी बताया कि बिना बैटरी वाले सोलर रुफटॉप लगाने पर बिजली विभाग द्वारा बिजली के बिल पर एक रूपए प्रति यूनिट तथा बैटरी सहित सोलर रूफटाॅप लगाने पर दो रूपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है। उन्होने जिला गुरूग्राम के सभी निवासियों, वाणिज्य एवं औद्योगिक इकाईयों के मालिकों का आहवान किया कि वे अपने भवनों पर अधिक से अधिक सोलर रूफटाॅप पावर प्लांट लगाकर अपने बिजली के बिल को न्यूनतम स्तर तक लाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। 
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग गुरूग्राम के प्रौजेक्ट आॅफिसर रामेश्वर ने बताया कि सरकार द्वारा आवासीय भवनों, निजी शिक्षण संस्थानों तथा सामाजिक क्षेत्र के भवनों पर ग्रिड कनैक्टिड रूफटाॅप सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए विभाग द्वारा तय दरों का 30 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए विकास सदन स्थित नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। 

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter