गुरूग्राम जिला में अब मोबाइल नेटवर्क क्नेक्टिविटी में सुधार होगा और काॅल ड्राॅप की समस्याएं भी कम होंगी क्योंकि जल्द ही जिला में टेलीकाॅम इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होने जा रहा है। गुरूग्राम के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टेलीकाॅम कमेटी की बैठक लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित की गई जिसमें टेलीकाॅम कंपनियों के प्रतिनिधियों तथा संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
उपायुक्त ने टेलीकाॅम कंपनियों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे जिला में ऐसे डार्क जाॅन की पहचान करें जहां पर काॅल ड्राॅप या मोबाइल व इंटरनेट क्नैक्टिविटी में दिक्कत है और उन स्थानों की सूची तीन सप्ताह में उपायुक्त कार्यालय में दें ताकि वहां पर टाॅवर लगाने के लिए परमिशन आदि जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वे जिला में काॅल ड्राॅप की समस्या को दूर करने के लिए नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, जिला परिषद, जीएमडीए आदि संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों से भी उपयुक्त जगह मुहैया करवाने का आग्रह करेंगे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिला में विभिन्न टेलीकाॅम कंपनियों के टाॅवर लगाने की अनुमति प्राप्त करने संबंधी 372 आवेदनों, जो 90 दिन से अधिक अवधि से लंबित हैं और जिन पर संबंधित  विभागों द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत नही की गई है, के मामले में हरियाणा टेलीकाॅम पोलिसी के अंतर्गत डीम्ड क्लीयरेंस मानते हुए एक सप्ताह मंे उपायुक्त कार्यालय द्वारा एलओआई जारी कर दी जाएगी। एलओआई जारी होने के बाद संबंधित टेलीकाॅम कंपनी द्वारा सरकार की ओर से निर्धारित फीस जमा करवा दी जाएगी, जिसके बाद उसे टाॅवर लगाने की अनुमति जारी हो जाएगी। टेलीकाॅम कंपनियों के प्रतिनिधियों का कहना था कि ये टाॅवर लगने के बाद जिला में काफी हद तक काॅल ड्राॅप की समस्या कम होगी तथा मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क की क्नैक्टिविटी में भी सुधार होगा।
कमेटी की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 1 जनवरी से टेलीकाॅम कंपनियों द्वारा टाॅवर लगाने के लिए केवल हरियाणा इंटरप्राईज प्रोमोशन सैंटर (एचईपीसी) के पोर्टल पर ही आॅनलाईन आवेदन किए जाएंगे और इसके लिए समानांतर मैनुअल  (हार्ड काॅपी) फाईल नहीं चलाई जाएगी। बैठक में तीसरा फैसला यह हुआ कि उपायुक्त के आदेश के बिना कोई भी विभाग अथवा सरकारी ऐजेंसी किसी मोबाईल टाॅवर को सील नही करेगी। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बैठक में सभी सरकारी विभागों को यह स्पष्ट निर्देश दिए कि आपके पास कहीं से भी मोबाईल टाॅवर के बारे में शिकायत आती है तो उसका निपटारा हरियाणा टेलीकाॅम पोलिसी के तहत किया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायत आने पर संबंधित विभाग पहले यह देखे कि कंपनी के पास उसकी परमिशन है कि नहीं। यदि परमिशन नही है तो मामला जिला स्तरीय टेलीकाॅम कमेटी के समक्ष रखा जाएगा और कमेटी का जो निर्णय होगा उसके अनुरूप आगे की कार्यवाही होगी। कोई भी विभाग अथवा ऐजेंसी अपने स्तर पर टाॅवर को सील करने या हटाने की कार्यवाही नही करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले से लगे अनाधिकृत मोबाईल टाॅवरों को नई पोलिसी में रेगुलराईज करवाने का प्रावधान है, इसलिए सभी टेलीकाॅम कंपनियां अगले 6 सप्ताह मंे अपने पहले से लगे टाॅवरों को रेगुलराईज करवा लें। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी टाॅवर की रेडिएशन से संबंधित शिकायत आती है तो भारत सरकार के तरंग संचार पोर्टल पर रेडिएशन के स्तर को चैक किया जा सकता है और फिर भी शिकायतकर्ता की संतुष्टि नहीं होती है तो उसे ट्राई में स्वयं फीस भरकर रेडिएशन का लैवल चैक करवाना होगा। यदि रेडिएशन का लैवल अधिक पाया जाता है तो संबंधित  टेलीकाॅम कंपनी को एक सप्ताह मंे उस लैवल को ठीक करने के लिए कहा जाएगा और ऐसा नहीं करने पर 8वें दिन उपायुक्त कार्यालय से उसे सील करने के आदेश दे दिए जाएंगे।
आज की बैठक में कमेटी के सदस्य रमन मलिक ने गुरूग्राम शहर, हाईवे, गुरूग्राम-फरीदाबाद रोड़ आदि डार्क जाॅन में मोबाईल क्नैक्टिविटी की समस्या उठाई। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न रीयल अस्टेट डिवलेपरों तथा आॅनलाईन सामान बेचने वाली टेली मार्केटिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा की जाने वाली प्रोमोशनल काॅल से उपभोक्ताओं को हो रही परेशानियों का मामला भी कमेेटी के समक्ष रखा।
इस अवसर पर उनके साथ अतिरिक्त उपायुक्त आर के सिंह, नगराधीश मनीषा शर्मा तथा कमेटी के सदस्य रमन मलिक भी थे।
delhincrnews.in reporter

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