हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज रजिस्ट्री कार्य में अनिमित्ताएं बरतने के आरोप में दो नायब तहसीलदारों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इनमें से एक नायब तहसीलदार सेवानिवृत हो चुका है तथा दूसरे सेवारत नायब तहसीलदार को निलबिंत करने के आदेश दिए गए हंै।
मुख्यमंत्री आज गुरूग्राम में जिला कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में उनके समक्ष 20 समस्याएं रखी गई थी जिनमें से उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अधिकांश का मौके पर ही निपटारा किया गया।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) तथा बीपीएल को अलाट किए गए प्लाट अथवा फलैट की अनाधिकृत रूप से रजिस्ट्री करने का मामला आज मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि ईडब्ल्यूएस अथवा बीपीएल अलाटी को आंबटित फलैट अथवा प्लाट आबंटन के पांच साल तक ट्रांसफर नहीं किए जा सकते हैं और न ही उनकी रजिस्ट्री हो सकती है, लेकिन गुरूग्राम तथा बादशाहपुर के तत्कालीन नायब तहसीलदारों ने उक्त फलैटों अथवा प्लाटों की रजिस्ट्रियां करके नियमों का उल्लंधन किया है। शिकायतकर्ता द्वारा उदाहरण के तौर पर ऐसी 11 वसीकाओं की रजिस्ट्री अथवा ट्रांसफर के कागजात पेश किए गए थे। इस मामले की जांच श्रीमाता शीतला देवी पूजास्थल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वत्सल वशिष्ठ द्वारा की गई थी जिन्होंने अपनी जांच में शिकायत को सही करार देते हुए दोनों आरोपित नायब तहसीलदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की सिफारिश की थी। इस आधार पर मुख्यमंत्री ने गुरूग्राम जिला में नियुक्त तत्कालीन नायब तहसीलदार रूपिन्द्र को निलंबित करने तथा सेवानिवृत हो चुके नायब तहसीलदार अयुब खान के खिलाफ कार्यवाही के आदेश दिए।
उपरोक्त अनाधिकृत रजिस्ट्रियों के अलावा भी शिकायतकर्ता ने आज पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष 16 रजिस्ट्रियां प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि अब भी गुरूग्राम जिला में इस प्रकार की रजिस्ट्रियां की जा रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए।
इसी प्रकार, बिल्डरों द्वारा अलाटी के पक्ष में कन्वेयंस डीड करवाने के नाम पर 50 प्रतिशत शुल्क  लिए जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक उच्च न्यायालय का इस मामले में निर्णय नहीं आता तब तक अलाटी ग्रीवेंस रिड्रसल फोरम द्वारा निर्धारित 15 हजार रूपए का ही शुल्क बिल्डर द्वारा लिया जाएगा। इस बीच यदि नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग का कोई नया फैसला आता है तो वह लागू होगा। कन्वेयंस डीड के लिए शुल्क लेने के संबंध में सीआरईडीएआई (कन्फेडेरेशन आफ रियल इस्टेट डवलेंपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मामला दायर किया हुआ है।
आईटी इकाइयों से ज्यादा सम्पति कर वसूले जाने का मामला भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया जिसमें नगर निगम गुरूग्राम के अधिकारियों ने बताया कि किसी भी इकाई पर सम्पति कर उसके प्रयोग के आधार पर लगता है। उन्होंने बताया कि सरकार की मार्च, 2014 में जारी अधिसूचना के अनुसार आईटी पार्क, साइबर सिटी अथवा साइबर पार्कों को विेशेष प्रवर्ग में लेते हुए 50 प्रतिशत कम्र्शियल रेट (कारपेट एरिया) पर लगाए जाने का प्रावधान है। वर्तमान में नगर निगम द्वारा इसी आधार पर सम्पतिकर लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा वर्तमान में सम्पतिकर की नई दर निर्धारित करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया हुआ है। इस कमेटी द्वारा आईटी इकाइयों को सर्विस इंटरप्राईजिज की श्रेणी में रखा गया है तथा यह पोलिसी सरकार स्तर पर विचाराधीन है। इस शिकायत में शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि आईटी इकाईयों को औद्योगिक श्रेणी में रखते हुए उनके बराबर ही सम्पतिकर लिया जाए।
आज की बैठक में चैंबर आफ इण्डस्ट्रीज आफ उद्योग विहार द्वारा  आरोप लगाया गया था कि घर-घर कचरा इकटठा करने तथा कलैक्शन प्वाईंट के प्रबंधन का दायित्व संभाल रही  इको-ग्रीन एनर्जी प्रा लि. द्वारा उद्योग विहार फेज-1 के कलैक्शन प्वाईंट से कचरा नहीं उठाया जा रहा, जिसके कारण वहां कचरे का बडा ढेर लग गया है। इस मामले में नगर निगम, गुरूग्राम के अधिकारियों ने बताया कि वहां पर कचरा निस्तांरण के लिए ट्रांसफर स्टेशन बनाया जा रहा है जो लगभग ढाई महीने में बनकर तैयार हो जाएगा और उसके बाद यह समस्या नहीं रहेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि सैक्टर-29 के महाराणा प्रताप पार्क (लेजर वैली पार्क) के पास भी इसी प्रकार का एक ट्रांसफर स्टेशन बनाया जा रहा है। पार्क के पास कचरा इकटठा करने के बारे में कष्ट निवारण समिति के एक सदस्य द्वारा शिकायत मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई थी। बैठक में मुख्यमंत्री ने निगम के अधिकारियों से कहा  िकवे अपने  स्वच्छता सैनिकों को हिदायत दें कि वे कचरा न जलाएं और इस पर पुलिस भी निगरानी रखें।
गुरूग्राम में चल रहे आटो रिक्शा में फेयर मीटर लगाने का मामला आज पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष उठा जिसमें बताया गया कि राज्य सरकार के परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश के एनसीआर में पडने वाले जिलों तथा शेष हरियाणा के जिलों के लिए अलग-अलग पोलिसी बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दस साल से पुराने डीजल चालित आटो रिक्शा के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनुसरण किया जाए।
आज की बैठक में हरियाणा के लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह, विधायक उमेश अग्रवाल, तेजपाल तंवर, बिमला चैधरी, हरियाणा खादी ग्राम उद्योग बोर्ड की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड, हरियाणा डेयरी विकास प्रस्ंाघ के चेयरमैन जीएल शर्मा, गुरूग्राम की मेयर मधु आजाद, फरूखनगर मार्किट कमेटी के चेयरमैन वीरेन्द्र यादव, भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष अनु यादव, भाजपा प्रवक्ता सत्यप्रकाश जरावता, जीएमडीए के सीईओ विवेक जोशी, एचएसवीपी के प्रशासक चंद्रशेखर खरे, पुलिस आयुक्त के के राव, नगर निगम आयुक्त यशपाल यादव, अतिरिक्त उपायुक्त आर के सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी व समिति के मनोनीत सदस्य उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री का आज गुरूग्राम में जिला कष्ट निवारण समीति की बैठक लेना गांव गढी हरसरू निवासी निहाल सिंह व होशियार सिंह के लिए वरदान सिद्ध हुआ क्योंकि उन्हें सैक्टर रोड 93 से 115 के लिए अधिग्रहित की गई उनकी भूमि का मुआवजा आठ साल बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से मिला। इस मामले में पहले मुआवजा गोपालपुर निवासी राज मोहन द्वारा लिया गया था। यह मामला कष्ट निवारण समिति में आने के बाद भूमि के असली मालिक को मुआवजा देने तथा राजमोहन द्वारा ली गई गलत मुआवजा राशि उसके वारिसों से रिकवर करने  के आदेश दिए गए क्योंकि राजमोहन की मृत्यु हो चुकी है।
delhincrnews.in reporter

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