हरियाणा मानव अधिकार आयोग द्वारा गुरूग्राम में आयोजित अदालत शिविर में सुनवाई करते हुए आयोग के समक्ष रखे गए 18 मामलों में से 5 का मौके पर निपटारा किया गया। इस सुनवाई के दौरान आयोग के पास 2 नए मामले भी आए हैं। इस बारे में जानकारी हरियाणा मानव अधिकारी आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति (सेवा निवृत) एस के मित्तल  ने गुरूग्राम के लोेक निर्माण विश्राम गृह में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। सम्मेलन में आयोग के दोनो सदस्य न्यायमूर्ति (सेवा निवृत) के सी पुरी तथा दीप भाटिया भी मौजूद थे।
न्यायमूर्ति मित्तल ने संवाददाताओं को बताया कि गुरूग्राम जिला के गांव खेड़ा खुर्रमपुर निवासी सुरेश की शिकायत पर गुरूग्राम के जिला समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए हैं। सुरेश शत-प्रतिशत दिव्यांग है और उसने समाज कल्याण विभाग से ट्राई साईकिल दिए जाने की मांग की थी। उसे ट्राई साईकिल नहीं मिलने पर उसने हरियाणा मानव अधिकार आयोग में 23 अक्टूबर 2017 को शिकायत दी थी परंतु उस समय आयोग के सभी सदस्य सेवानिवृत होने की वजह से यह शिकायत लंबित रही। न्यायमूर्ति मित्तल के अनुसार उनकी तथा सदस्यों आयोग के दोनो सदस्यों की नियुक्ति 23 अप्रैल 2018 को हुई थी और तब से आयोग ने पुनः काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि आयोग ने 12 जून 2018 को जिला समाज कल्याण अधिकारी को 4 सप्ताह के भीतर सुरेश की शिकायत का निपटारा करने के आदेश दिए थे। इस पर समाज कल्याण अधिकारी ने जवाब भेजा जोकि संतोषजनक नहीं पाया गया क्योंकि उसने जवाब में लिखा था कि विभाग के पास शिकायतकर्ता का कोई आवदेन नही आया। इसके बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी  को 7 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने के लिए कहा गया था तथा 1 नवंबर को भी उसे दूरभाष से आज आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने की सूचना दी गई थी लेकिन दोनो बार वह हाजिर नहीं हुआ। बार-बार नोटिस देने पर भी जिला समाज कल्याण अधिकारी के आयोग के सामने पेश नही होने पर आज उसके खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए हैं।
एक सवाल के जवाब में न्यायमूर्ति मित्तल ने बताया कि 23 अपै्रल 2018 को जब आयोग ने पुनः कार्य करना शुरू किया तो उस समय आयोग के पास 2444 शिकायतें लंबित थी। पिछले 6 महीनों में 1262 नई शिकायतें आई और इस अवधि में आयोग द्वारा 1561 शिकायतों का निपटारा भी किया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में आयोग के पास लगभग 2145 शिकायतें लंबित हैं, इनमे से लगभग 500 शिकायतें गुरूग्राम जिला से हैं।  उन्होंने बताया कि प्राप्त शिकायतों में से लगभग 40 प्रतिशत शिकायतें पुलिस के खिलाफ हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पहले गठित आयोग के सभी सदस्य 20 सितंबर 2017 को सेवानिवृत हो गए थे जिसके कारण लगभग 7 महीने आयोग का काम-काज ठप रहा। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय आयोग के तत्कालीन चेयरमैन अगस्त 2016 में ही सेवानिवृत हो चुके थे।
एक सवाल के जवाब में न्यायमूर्ति मित्तल ने बताया कि आज रखी गई शिकायतों में गुरूग्राम में झुग्गी झोपड़ी वासियों को पीने का पानी, टायलेट आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाने के मामले भी थे, जिनके लिए नगर निगम गुरूग्राम तथा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी करते हुए उनसे झुग्गी झोपड़ियों की विस्तृत रिपोर्ट तथा कहां-कहां क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं आदि की जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छ भारत अभियान चलने के बाद खुले में शौच कोई नहीं जाना चाहता लेकिन उनको टायलेट की सुविधा उपलब्ध करवाना जरूरी है।
एक सवाल के जवाब में न्यायमूूर्ति मित्तल ने बताया कि गुरूग्राम में आयोग की एक बैंच स्थापित करने पर सैद्धांतिक सहमति हो चुकी है। इस बैंच द्वारा गुरूग्राम सहित आसपास के 8 जिलों में सरकारी विभागों की अनदेखी की वजह से मानव अधिकारों के हनन की शिकायतों की सुनवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिकायतों की संख्या के हिसाब से यहां पर महीने में दो या तीन बार कोर्ट लगाने का निर्णय लिया जाएगा। एक अन्य सवाल के जवाब में न्यायमूर्ति मित्तल ने बताया कि आयोग अपने आप भी मानव अधिकार हनन की शिकायतों का संज्ञान ले सकता है।
delhincrnews.in reporter

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