सौर ऊर्जा को बढावा देने के लिए अतंर्राष्ट्रीय सोलर अलायंस (आईएसए) विश्व के विभिन्न देशों में 121 केंद्र खोलेगा। इस संबंध में जानकारी आईएसए के महानिदेशक उपेंद्र त्रिपाठी ने गुरूग्राम जिला के गांव ग्वाल पहाड़ी के निकट स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (नाईस) के 5वें स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए दी।
गुरूग्राम जिला के गांव ग्वालपहाड़ी के निकट राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (नाईस) स्थित है जिसमें अब अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलायंस का कार्यालय बनाया जा रहा है। नया कार्यालय बनने तक आईएसए का अस्थाई कार्यालय नाईस परिसर में चल रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परामर्श पर विश्व के 121 देशों, जहां पर सूर्य की किरणें साल में ज्यादा अवधि के लिए पड़ती हैं, में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध सौर ऊर्जा का दोहन करने के उददेश्य से आईएसए का गठन किया गया है और इसका मुख्यालय भी भारत में गुरूग्राम जिला में स्थापित किया गया है।
नाईस के स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे आईएसए के महानिदेशक उपेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि गुरूग्राम में बन रहा आईएसए मुख्यालय एक ग्लोबल सैंटर होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ रही ग्लोबल वार्मिंग की चिंता को देखते हुए आईएसए ने विश्वभर में अपने 121 सैंटर खोलने की योजना बनाई है ताकि परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतो जैसे बिजली, कोयला, पैट्रोलियम आदि के अलावा, अक्षय ऊर्जा तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतो का भरपूर दोहन किया जा सके।
उन्होंने अपनी कलाई की घड़ी की ओर इशारा करते हुए  कहा कि उनकी घड़ी में फोटो वोलटेक सैल लगा हुआ है जिससे वह चलती है और इस सैल को जरूरी नही कि धूप में चार्ज किया जाए, बल्कि 8 मिनट के लिए लाईट के सामने रखने से भी यह दिनभर के लिए चार्ज हो जाती है। उपेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि दुनिया में 6 अरब से ज्यादा स्मार्ट फोन हैं जिनको चार्ज करने पर लगभग 5,000 लाख किलोवाट आॅवर बिजली खर्च होती है। इस बिजली को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतो की तुलना में सौर ऊर्जा 24 प्रतिशत ज्यादा कुशल है। साथ ही उपेंद्र त्रिपाठी ने यह भी कहा कि दुनिया में लगभग 12 लाख परिवार ऐसे हैं जिनके यहां बिजली नही पहुंची है और ऐसे लोगों या परिवारों के लिए सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
त्रिपाठी ने यह भी बताया कि आईएसए परिसर में लगभग 40 एकड़ भूमि पर विभिन्न प्रकार के सौर ऊर्जा उपकरणों को प्रदर्शित करने की योजना है और उसका नाम ‘गुरूबैग‘ रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा में वल्र्ड सोलर म्युजियम की स्थापना भी हो सकती है, इस पर विचार हो रहा है। इस वल्र्ड सोलर एनर्जी म्युजियम के लिए 250 लाख रूपए की धनराशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि नाईस में सौर ऊर्जा पर दो वर्षीय मास्टर डिग्री कोर्स करवाया जा रहा है ताकि सौर ऊर्जा को बढावा देने के लिए ज्यादा मैन पाॅवर उपलब्ध हो। साथ ही उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को बढावा देने के लिए सभी आईएसए सदस्यों तथा अनुसंधान कर्ताओं से नए सुझाव हमेशा आमंत्रित हैं।
इससे पहले विशिष्ठ अतिथि के तौर पर अपने विचार रखते हुए गुरूग्राम के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने कहा कि सूर्य और सौर ऊर्जा को आदिकाल से मानते आए हैं। सूर्य को ऊर्जा का स्त्रोत मानते हुए अलग-अलग संस्कृतियों ने उसे अलग-अलग तरीके से महत्व दिया है। सूर्य उदय हुआ तो सूर्य नमस्कार और सूर्य ग्रहण हुआ तो उसकी पूजा। इसी प्रकार हमारे विभिन्न उत्सव व त्यौहार सूर्य की स्थिति पर आधारित हैं। सिंह ने कहा कि नाईस ने सौर ऊर्जा पर आधारित कम लागत की तकनीक को माॅर्केट में लाने का काम किया है, जोकि बहुत सराहनीय है। इस दिशा में और हाथों की जरूरत को देखते हुए यहां पर कौशल विकास के कोर्स चलाए जा रहे हैं। उन्होंने इस संस्थान से जुड़ने के लिए अनुसंधान कर्ताओं तथा विद्यार्थियों को बधाई भी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि आईएसए के मुख्यालय की गुरूग्राम में  स्थापना होना अपने आप में गौरवशाली बात है। श्री सिंह ने कहा कि उन्हें आशा है कि इस तरह के संस्थान सूर्य की भांति चमकेगे और अपने प्रकाश से विश्व को प्रकाशित करेंगे।
कार्यक्रम को अतिरिक्त उपायुक्त मुनीष शर्मा, नाईस के महानिदेशक अरूण त्रिपाठी, विज्ञान परिषद प्रयाग जोधपुर सैंटर के सचिव डा. डी डी ओझा तथा डीपीएसजी पालम विहार की प्राचार्य दीपिका शर्मा ने भी संबोधित किया। इस मौके पर सौर ऊर्जा विषय पर आॅन द स्पोट पेंटिंग और क्विज प्रतियोगिता करवाई गई तथा पहले आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृृत किया गया। इसके अलावा नाईस के उभरते वैज्ञानिको तथा सराहनीय कार्य करने वाले स्टाफ के सदस्यों को सम्मानित किया। नाईस के पहले न्यूज लैटर ‘सूर्य रशमी‘ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विज्ञान परिषद पर्याग जोधपुर सैंटर द्वारा नाईस के महानिदेशक डा. अरूण त्रिपाठी को सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए  ‘विज्ञान भूषण‘ पुरस्कार से सम्मानित किया गया और भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के निदेशक डा. राजेश कुमार को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में टैस्टिंग के मानक तय करने के लिए लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in 

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