मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन हरियाणा के प्रदेश व्यापी आह्वान के तहत गुड़गाँव की मिड डे मील कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों के लिए प्रदर्शन कर ड्यूटी मेजिस्ट्रेट इंद्रजीत के माध्यम से गुड़गाँव के सांसद राव इंद्रजीत सिंह के नाम ज्ञापन दिया। भारी संख्या में उपस्थित कर्मियों ने पहले कमला नेहरू पार्क में सभा की जिसकी अध्यक्षता ज़िला प्रधान मूर्ति देवी ने की। कमला नेहरू पार्क में ही 13 दिनों से लगातार हड़ताल पर बैठे हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के साथियों का समर्थन करते हुये उनके संघर्ष को बधाई दी तथा मजदूर कर्मचारी एकता के आगे बढ़ते कदमों सराहा।

सीआईटीयू के ज़िला सचिव कामरेड राजेन्द्र सरोहा, कोषाध्यक्ष एस एल प्रजापति, एआईटीयूसी के ज़िला महासचिव अनिल पवार, आशा वर्कर्ज यूनियन की ज़िला प्रधान मीरा देवी व रोडवेज तालमेल कमेटी गुड़गाँव के संजय गुलाटी, संदीप दलाल, राकेश कुमार, रेहड़ी-पटडी-फेरि कमेटी के उप प्रधान अशोक सिंह व सुरेन्द्र सिंह ने मिड डे मील में कार्यरत महिलाओं की मांगों का समर्थन करते हुये खट्टर सरकार की जन विरोधी नीतियों पर जम कर प्रहार किया।

कमला नेहरू पार्क से चल कर अग्रवाल धर्मशाला, मोर चोक, सोहना अड्डा होते हुये प्रदर्शनकारी  जलूस के रूप में लघु सचिवालय पहुंचे जहां उनको अन्य क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे अन्य विभागों के कर्मचारियों का सहयोग भी प्राप्त हुआ तथा अपना ज्ञापन मौके पर मौजूद अधिकारी को सौंपा।

यूनियन की प्रधान मूर्ति देवी ने बताया कि मिड-डे मील योजना की शुरूआत 2009 में केन्द्र की सरकार द्वारा हुई थी। तब से लेकर अब तक पच्चीस लाख से ज्यादा मिड-डे मील कर्मचारी मात्र 1000 रू॰ महीना, वो भी साल में मात्र दस महीने दिया जाता है, के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। 95 प्रतिशत मिड-डे मील कर्मचारियों में मुख्यतः कमजोर तबके से आने वाली महिलाऐं हैं, जो अपने परिवारों की अकेले कमाने वाली सदस्या हैं। बार-बार वादा तथा भरोसा देने के बाद भी,सरकार ने मई 2013 में हुए 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन में मिड डे मील कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने के  वादे को आज तक पूरा नही किया है।

उन्होने कहा कि यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि जुलाई-2014 में तब के मानव संसाधन मंत्रालय ने हमारे प्रतिनिधिमण्डल को दिए भरोसे के बाद भी, बजट-2014-15 से लेकर बजट 2018-19 में भी मिड डे मील वर्कर्स एवं इस अत्यन्त महत्वपूर्ण योजना को नजरअंदाज़ किया है। माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने 11 सितम्बर 2018 को आंगनवाड़ी वर्कर्स, हैल्पर्स, मिनी आंगनवाड़ी वर्कर्स व आशा वर्कर्स के वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की है। लेकिन मिड डे मील वर्कर्स जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं और वो भी आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित हैं, और कुपोषण को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, के लिए कोई घोषणा नहीं की।

ज्ञापन के माध्यम से अपने सांसद से मांग करते हुये उन्होने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में तुरंत बढ़ोतरी की जाए तथा आप केन्द्र सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाएं कि वह तुरंत मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में बढ़ौतरी करे। आप हमारे इलाके के सांसद होने के नाते हमारी मांगो को संसद में उठाएँ हमारी मांग है कि मिड डे मील वर्कर्स का वेतन तुरंत बढ़ाया जाए तथा वर्कर्स को चैथे दर्जे का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। नियमित किए जाने तक सभी वर्कर्स को 12 के 12 महीने न्यूनतम वेतन 18000 रूपये दिया जाए तथा 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों; ग्रेच्युएटी, पैंशन, प्रोविडैंट फंड, मैडिकल सुविधा सहित तमाम सामाजिक सुरक्षा लाभ, सभी मिड डे मील वर्कर्स को प्रदान किए जाएं। वर्तमान में कार्यरत किसी भी मिड डे मील वर्कर को काम से न हटाया जाए, हटाई गई वर्कर्स को काम पर बहाल किया जाए व प्रत्येक स्कूल में कम से कम दो वर्करों की नियुक्ति हो। 12वीं कक्षा तक के बच्चों को खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में लाया जाए व इसी अनुसार मिड डे मील योजना का सभी स्कूलो में विस्तार हो।

delhincrnews.in reporter

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