यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी के एम. डी. डॉ पी एन अरोड़ा जी ने बताया कि विश्व ऑस्टियोपोरोसिसदिवस विश्वभर में 20 अक्टूबर को मनाया जाता हैI यह दिवस लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस के निदान, रोकथाम और उपचार हेतु जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है. दिल की बीमारी के बाद दुनिया में ऑस्टियोपोरोसिस दूसरी सबसे आम खतरनाक बीमारी है. यह दिवस ऑस्टियोपोरोसिस के निदान, रोकथाम और उपचार हेतु जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
इस अवसर पर यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञों डॉ  देवेंद्र दवे , डॉ मोहित जिंदल, डॉ अखिल कुलश्रेष्ठ, डॉ अमित शर्मा, डॉ अशोक कुमार शर्मा, डॉ मोहित मदान, डॉ अंकुर सिंघल ने मरीजों एवं जान सामान्य को ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी के प्रति जागरूक किया और बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस की विशेषता हड्डियों के ऊतकों की खराबी है, इस रोग में हड्डियां नाजुक एवं कमजोर हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी विशेषकर कूल्हे एवं कलाई के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं को मुख्यतः पचास वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों की तुलना में ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होने का खतरा अधिक होता है। डॉक्टरों ने कहा कि इस बीमारी के रोकथाम हेतु कैल्शियम और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे कि दूध, दही एवं हरी पत्तेदार सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए।
डॉ देवेंद्र दवे वरिष्ठ हड्डी रोग एवं  जोड़ प्रत्यारोपड़ विशेषज्ञ ने कहा कि बचपन से 20 साल की उम्र तक नई हड्डी बनने की रफ्तार ज्यादा होती है व पुरानी हड्डी गलने की कम होती है। फलस्वरूप हड्डियों का घनत्व ज्यादा होता है और वे मजबूत होती हैं। तीस साल की उम्र तक आते-आते हड्डियों का गलना (क्षीण होना) बढ़ने लगता है व नई हड्डी बनने की रफ्तार कम होने लगती है। यह बढ़ती उम्र की नियमित प्रक्रिया है। कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर और खोखली हो जाती हैं, जिससे शरीर आगे की ओर झुकता है व मामूली चोट से हड्डियों के फ्रेक्चर की आशंका बढ़ जाती है। पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों में यह समस्या 4 गुना ज्यादा होती है। 50 वर्ष के बाद कूल्हे एवं रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर की आशंका 54 प्रतिशत बढ़ जाती है व 20 प्रतिशत मृत्यु दर बढ़ जाती है। इसकी शुरुआत में छोटे-छोटे क्रेक फ्रेक्चर होने से रीढ़ की हड्डी के मनके जुड़कर ऊँचाई कम लगने लगती है। कभी-कभी शरीर आगे की ओर झुकता है व कूबड़ निकलने लगता है। चलने की गति कम हो जाती है। जमीन पर पकड़ कम होने लगती है। बैलेंस बिगड़ने से गिरने की आशंका बढ़ जाती है।
डॉ अमित शर्मा  वरिष्ठ हड्डी रोग एवं  जोड़ प्रत्यारोपड़ विशेषज्ञ ने ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कुछ उपाय बताये और कहा कि यदि हम अपनी जीवनशैली में बदलाव- शारीरिक सक्रियता, समय पर सोने, खाने के जरिए ला पाएं तो काफी हद तक इस बीमारी से निजात मिल सकती है , आहार में विशेष रूप से कैल्शियम, विटामिन डी-3, जिंक युक्त आहार लें, नियमित कसरत और पैदल घूमना चालू रखें, सूर्य की प्रातः काल की कच्ची धूप का सेवन करें.
डॉ अखिल कुलश्रेष्ठ  वरिष्ठ हड्डी रोग एवं  जोड़ प्रत्यारोपड़ विशेषज्ञ  ने बताया कि हिन्दुस्तान में हर 2 में से 1 स्त्री जो 45 वर्ष पार है, वह ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित है। यदि आपकी उम्र 40 से ज्यादा है, यदि आप रजोनिवृत्त महिला हैं, यदि आपके जोड़ों में दर्द रहता है। हड्डियों में कमजोरी महसूस होती है। अधिक धूम्रपान करते हैं, तो आप ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त हो सकते हैं।
डॉ मोहित जिंदल वरिष्ठ हड्डी रोग एवं  जोड़ प्रत्यारोपड़ विशेषज्ञ ने कहा कि केवल कैल्शियम की गोली लेने से कुछ नहीं होता, कैल्शियम का शरीर में अवशोषण भी जरूरी है। विटामिन डी-3 व फास्फोरस की उपस्थिति (विटामिन डी-3 सुबह के सूर्य की कच्ची धूप में कसरत करने से बनता है) से आँतों में कैल्शियम का अवशोषण होता है, जिससे हड्डियों मे खनिज बढ़ता है व हड्डियाँ मजबूत रहती हैं। कैल्शियम दूध व दूध से बने पदार्थ, सीताफल, केला, बादाम, सोयाबीन, हरी सब्जियों में पाया जाता है। संतुलित भोजन में सभी अन्य तत्व होने से यहऑस्टियोपोरोसिस से बचाव में महत्वपूर्ण है।
डॉ अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस में उपचार से ज्यादा बचाव महत्वपूर्ण है ताकि फ्रैक्चर इत्यादि की समस्या उत्पन्न ही न हो व अधिक उम्र में भी सक्रियता बनी रहे। अगर हम 30 वर्ष की उम्र से ही सावधान रहें, तो 50 की उम्र में फिट और 60 की उम्र में स्ट्रांग बने रहेंगे।
delhincrnews.in reporter

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here