पाश्चात्य संस्कृति से जुड़ा हुआ आज का मानव अच्छे-बुरे में भेद नहीं कर रहा। किसी भी वस्तु का प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके सकारात्मक व नकारात्मक परिणाम क्या होंगें। यह बात श्री 105 सरस्वती भूषण माता जी ने जैकबपुरा स्थित श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर की जैन बारादरी में दस लक्षण महापर्व में श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कही।
माता जी ने बताया कि आत्मा के दस धर्मों में उत्तम संयम छठा धर्म है। मरीज की टेस्टिंग रिपोर्ट आ जाने के बाद कुछ वस्तुओं का परहेज और कुछ का सेवन किया जाता है। डायबिटीज का मरीज करेला, जामुन आदि का सेवन करता है तो मीठे फल एवं अनाजों का परहेज भी करता है। इसी तरह प्रत्येक प्राणी क्रोध का मलेरिया, मान का जुकाम, माया का टायफाइड और लोभ का कैंसर से पीडित है। इसके लिए उसे आवश्यकता है क्रोध, अभिमान आदि विकारी भावों से परहेज करने की। सहनशीलता, सरलता एवं सत्यता आदि के सेवन करने की। यह ज्ञान होने पर कि व्यक्ति की दृष्टि आपथ्य सेवन से स्वयंमेव ही मुड़ जाती है और वह अपने आपको एक परिधि में केंद्रित कर लेता है। पांचों इंद्रियों की विषयों की आवश्यक सामग्री को छोड़कर वह महज आवश्यकता तक सीमित हो जाता है। यही संयम है। घोड़े की लगाम को कस देने पर उसकी गति संतुलित हो जाती है, गाड़ी की ब्रेक गाड़ी को संयमित कर देती है। चैराहे की लाल बत्ती हमें संयमित होने का ही उपदेश देती है।
उन्होंने आगे संयम बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि संयम से हमारी संकल्प शक्ति दृढ़ होती है। आत्म नियंत्रित परणति बनती है। पशुता से मानवता की ओर ले जाने वाला संयम ही है। संयम मनुष्य को उच्च शिखर की ओर ले जाता है। इसके विपरीत असंयम पतन व दुर्गति की ओर ले जाता है। अतः संयम से जीवन व्यतीत करते हुए प्राणी मात्र पर दया का भाव रखें। वाणी पर संयम का पालन करें। खाद्य, अखाद्य का भी ध्यान रखें। यह शरीर कचरा घर नहीं है कि इसमें कुछ भी डालते जाओ और यह सबको ग्रहण कर लेगा। यह अपने से प्रतिकूल पदार्थ को ग्रहण नहीं कर सकता। किसी ना किसी रूप में वह बाहर निकाल ही देता है। अतः यथाशक्ति संयमी बनकर मन, वचन, शरीर को स्वस्थ एवं संतुलित बनाएं।
इस कार्यक्रम में मन्दिर के प्रधान पुष्पचंद जैन, उपप्रधान विपिन जैन, महामंत्री गोरधन सिंह जैन, मंत्री मनीष जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, जैन समाज प्रवक्ता एडवोकेट अभय जैन एवं समस्त गणमान्य व्यक्ति, महिलायें आदि शामिल हुये।

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