पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) अथाॅरिटी (ईपीसीए) की बैठक चेयरमैन सेवानिवृत आईएएस डा. भूरे लाल की अध्यक्षता में गुरुग्राम में आयोजित की गई जिसमें डा. भूरे लाल ने निर्देश दिए कि हरियाणा के एनसीआर में पड़ने वाले जिलांे में अब ईंट भट्ठे फरवरी में ही चलाए जाएंगे, उससे पहले ईंट भट्ठे चलाने की अनुमति नहीं होगी। वर्तमान में हरियाणा में ईंट भट्ठे 30 जून से बंद हैं।
डा. भूरे लाल की अध्यक्षता में एनसीआर में प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए गठित अथाॅरिटी ने प्रदूषण रोकने तथा इसे नियंत्रित करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एस नारायणन ने विस्तार से पै्रजेंटेशन देते हुए हरियाणा में पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इन कदमों की डा. भूरे लाल ने सराहना की और कहा कि उन्हें यह जानकार खुशी हुई है कि हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव प्रदूषण नियंत्रित करने के उपायों पर स्वयं ध्यान दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रैजंेटेशन मंे बहुत अच्छे उपाय सुझाए गए हैं परंतु इन सभी उपायों पर कार्यवाही करते हुए इन्हें धरातल पर उतारना आवश्यक है।
बैठक में अपने विचार रखते हुए डा. भूरे लाल ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर एनसीआर के जिलों मंे कहीं भी डिजी सैट चलाने की अनुमति नही होगी। यदि किसी कारणवश डिजी सैट का प्रयोग करना भी पडे़ तो प्रयोग करने से पहले व्यक्ति को बिजली निगमों से यह सर्टिफिकेट लेना होगा कि वहां पर बिजली का अस्थाई कनेक्शन भी देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी आपातकालीन सेवाओं में डिजी सैट का प्रयोग किया जा सकता है।
उन्होंने पिछले वर्ष दिपावली के आसपास आसमान में छाए ‘स्माॅग‘ पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानव जीवन के लिए बहुत घातक है, इसलिए इससे बचना जरूरी है। डा. भूरे लाल ने कहा कि आने वाली सर्दियों में स्माॅग ना आए, इसके लिए एनसीआर क्षेत्र में जिला अधिकारियों विशेषकर डीएम को सख्त रवैया अपनाना पडे़गा। उन्होंने कहा कि स्माॅग रोकने के लिए सीएनजी से चलने वाली बसें तथा अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट हांे और इंडस्ट्री भी निर्धारिर्त इंधन का ही इस्तेमाल करे, जिसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए। निर्धारिर्त इंधन का प्रयोग नहीं करने वाली इंडस्ट्री के चालान किए जाए।
उन्होंने कहा कि कचरा जलाने पर भी सख्ती से अंकुश लगाया जाए। डा. भूरे लाल ने कहा कि कहीं भी कचरा जलता हुआ नजर आए तो सबसे पहले उस पर पानी डालकर आग को बुझाएं, उसके बाद ही जलाने के लिए दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही करें।  उन्होंने कहा कि नगर निगमांे में काम करने वाले सफाई कर्मियों को यह अच्छी तरह समझाया जाए कि कचरे को जलाना नही है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार किसानों को भी यह समझाया जाए कि वे अपने खेत में फसल अवशेष जलाने की बजाय उसमें थोड़ा पानी छोड़कर उसे खेत में ही जोत दंे जिससे उनके खेत की मिट्टी का उपजाऊपन बढेगा। फसल अवशेष जलाने के मामले में उन्होंने करनाल, सोनीपत, पानीपत, कैथल, कुरुक्षेत्र आदि ज्यादा धान उत्पादक जिलों के उपायुक्तांे को अधिक सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए।
इसके अलावा डा. भूरे लाल ने यह भी कहा कि सी एण्ड डी वेस्ट अर्थात भवनो की तोड़फोड़ से उत्पन्न होने वाले मलबे को सी एण्ड डी वेस्ट प्लांट के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्हांेेने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा यहां तक कि दिल्ली-चण्डीगढ़ मार्ग पर मलबा इधर-उधर फेंका हुआ नजर आता है। उन्होंने कहा कि मलबा निर्धारित स्थान पर नहीं डालने वालों को निर्माण की अनुमति ही ना दी जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री जैसे बजरी, रेती, कै्रशर आदि को ढक कर या पानी छिडक कर रखा जाए ताकि यह उडे़ नही। इस निर्माण सामग्री को ट्रक में ले जाते समय भी ढक कर ले जाया जाए।
डा. भूरे लाल ने उपायुक्तों से यह भी कहा कि वे अपने-अपने जिला में यह सुनिश्चित करें कि पैदल यात्रियों के लिए बने फुटपाथ तथा अन्य रास्ते अतिक्रमण मुक्त हों। उन्होंने कहा कि आमतौर पर पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित रास्ते में या तो गाड़ियां खड़ी पाई जाती हैं या फिर वहां पर किसी ने दुकाने बना ली  हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के इस्टर्न पैरिफेरियल रोड़ (ईपीआर) बनकर तैयार हो चुका है और वैस्टर्न पैरिफेयिल रोड़ (डब्ल्यूपीआर) अर्थात केएमपी एक्सपै्रस-वे  भी जल्द तैयार होने को है। केएमपी एक्सपै्रस-वे खुलने के बाद पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी भारी वाहन ट्रक इत्यादि, जिसे दिल्ली में जाने की जरूरत नहीं है, वह दिल्ली ना जाए और केएमपी पर डायवर्ट कर दिया जाए।
उन्होंने वाहनों का प्रदूषण स्तर मापने वाले केंद्रों के सही संचालन पर भी जोर दिया और कहा कि वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण रखना भी आवश्यक है। इसके लिए यह सुनिश्चित करें कि वाहनों को प्रदूषण सर्टिफिकेट प्रदान करने वाले सभी सैंटरांे पर मशीने ठीक काम कर रही हों। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदूषण मापक यंत्र भी ज्यादा संख्या में लगाए जाएं ताकि वायु में अलग-अलग स्थानों पर प्रदूषण के स्तर की ठीक से जांच हो सके और उसी अनुरूप कदम उठाए जा सकें। डा. भूरे लाल ने कहा कि प्रदूषण पर रोकथाम लगाने का कार्य केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर ही ना छोड़ा जाए, बल्कि सभी विभागों की  पैट्रोलिंग पार्टी हो। इस कार्य में पुलिस को भी शामिल किया जाए।
इस मौके पर पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह ने मार्ग दर्शन के लिए डा. भूरे लाल का धन्यवाद ज्ञापित किया और विश्वास दिलाया कि प्रदूषण नियंत्रण के विषय में हरियाणा अन्य प्रदेशो से बेहतर कार्य करेगा। उन्हांेने बताया कि अपने गांव में फसल अवशेष नहीं जलाने को प्रेरित करने वाली पंचायत के लिए राज्य सरकार ने 50 हजार रूपए कर ईनाम भी रखा है। इसके अलावा, हरसैक की मदद से सैटेलाईट के माध्यम से भी फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर निगरानी रखी जाएगी।
बैठक में पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह, शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान  सचिव आनंद मोहन शरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एस नारायणन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. पी के एम के दास, हरियाणा के एनसीआर के जिdiलों के उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों ने भी भाग लिया।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in 

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