बरसात के मौसम में मच्छर जनित रोग जैसे डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया फैलने का खतरा बना रहता है जिसको भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुग्राम जिला में पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इन तैयारियों के अंतर्गत जहां एक ओर लोगों को इन बीमारियों के बचाव उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है वही दूसरी ओर बीमारियों की रोकथाम के प्रभावी कदम विभाग द्वारा उठाए जा रहे हैं।
 
गुरुग्राम ने एक महानगर का रूप धारण कर लिया है जिसमें जनसंख्या के स्पष्ट आंकड़े तो नही हैं लेकिन एक अनुमान के अनुसार लगभग 25 लाख की आबादी इस शहर में रहती है और इस शहर का विस्तार भी इतना अधिक हो गया है कि सभी जगहों पर दवा का छिडक़ाव या फोगिंग करवाना संभव नही है। ऐसे में बरसात के मौसम में जलभराव वाले स्थानों पर मच्छर पैदा होने और उन मच्छरों से मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया फैलने का खतरा बना रहता है। पिछले वर्षों के आंकड़ो पर यदि नज़र डालें तो वर्ष 2015 में यहां डेंगू के सबसे अधिक 451 मामले पाए गए थे। इसी प्रकार, वर्ष 2016 में डेंगू के 86 मामले, वर्ष 2017 में 66 मामलों की पुष्टि हुई थी। है। इसी प्रकार, चिकनगुनिया के सबसे अधिक 38 मामले वर्ष-2016 में सामने आए और 2017 में 3 मामले सामने आए थे। यदि मलेरिया की बात की जाए तो सबसे अधिक 212 मामले वर्ष-2013 में यहां सामने आए थे, वर्ष 2016 में 36 और 2017 में 48 मामले प्रकाश में आए थे। इन आंकड़ों को देखने से जिलावासियों के लिए एक राहत की बात यह है कि हर वर्ष इन बीमारियों के मामले घट रहे हैं।
इन मच्छर जनित बीमारियों के रोगियों की संख्या में और भी कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग गुरुग्राम जिला में मुस्तैदी से जुटा हुआ है और बारिश में मच्छर कम पैदा हों, उस दिशा में विभाग द्वारा गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। सिविल सर्जन डा. गुलशन राय अरोड़ा के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन बीमारियों की रोकथाम के लिए चलाए गए अभियान के दौरान जिला गुरुग्राम के विभिन्न गांवों के 65 जलाशयों में गंबूजिया मछली डाली गई है। ये मछलियां डेंगू व मलेरिया फैलाने वाले मच्छर के लारवा को खाती हंै, जिससे कि लारवा मच्छर का रूप धारण नही कर पाता। उन्होंने बताया कि मलेरिया फैलने के संभावित क्षेत्रों की पहचान करके वहां  पर दवा का छिडक़ाव किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा एंटी लारवा एक्टिविटी चलाई जा रही है। सिविल सर्जन ने बताया कि गांवों में तालाबों व जोहड़ों में गंबूजिया मछली के बीज डाले गए हैं, जो मलेरिया फैलाने वाले मच्छर को पनपने नही देती।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें उन जगहों पर जा रही है जहाँ इन मछलियों को जलाशयों में छोडऩे की आवश्यकता है। विभाग द्वारा उन स्थानों पर भी टेमिफोस दवाई का छिडक़ाव किया जा रहा है, जहां पर पानी जमा होता है। सिविल सर्जन डा. अरोड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनाए गए एहतियाती उपायों के कारण अब तक जिला में मलेरिया के केवल 4 मामलों की पुष्टि हुई है तथा डेंगू का केवल एक मामला सामने आया है जबकि चिकनगुनिया का एक भी मामला सामने नही आया है।
सिविल सर्जन का कहना है कि अकेले स्वास्थ्य विभाग के प्रयासो से इन बीमारियों की रोकथाम नही की जा सकती बल्कि इनसे बचाव उपाय हर व्यक्ति को अपनाने होंगे। इसके लिए जरूरी है कि हर व्यक्ति इन बीमारियों के फैलने के कारणों तथा लक्षणों को पहचाने। उन्होंने बताया कि मलेरिया फैलाने वाला एनोफलिस मादा मच्छर खड़े गंदे पानी में पनपता है और वह रात को काटता है। मलेरिया की रोकथाम के लिए सभी लोगों को चाहिए कि वे या तो मच्छर पैदा ना होने दें और ऐसा नही कर पाएं तो मच्छरदानी या मच्छर भगाने की क्रीम अथवा रिपैलेंट लगाकर स्वयं को बचाएं। इसी प्रकार, डेंगू फैलाने वाला ऐडीज़ मादा मच्छर साफ पानी में पैदा होता है और दिन के समय काटता है। यह मच्छर 200 मीटर क्षेत्र में ही रहता है जिसकी वजह से एक घर में डेंगू होने पर उसके सदस्यों व आस-पास के क्षेत्रों मे डेंगू होने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढकने वाले कपड़े जैसे पूरी बाजू की शर्ट, पैंट अथवा लोअर तथा जुराबें आदि पहने और ये ध्यान रखें कि घर के अंदर भी गमलों आदि में पानी खड़ा ना रहे। उन्होंने बताया कि मच्छरों से चिकनगुनिया भी फैलता है जो जानलेवा तो नही है लेकिन इससे जोड़ो में दर्द होता है जो लंबे समय तक रहता है।
इन बीमारियों से बचाव उपायों के बारे में डा. अरोड़ा का कहना है कि सप्ताह में एक बार कूलर के पानी को पूरी तरह खाली करके उसे सुखाना जरूरी है। इसी प्रकार, घर के पास टूटे हुए मटकों, गमलो, फूलदानों, टायरों आदि में पानी इक्क_ा ना होने दें। घर की छत पर पानी ना रूकने दें।  डेंगू से बचाव का एक ही तरीका है और वह है सावधानी रखना। डा. अरोड़ा ने जिलावासियों को यह भी सलाह दी है कि कोई भी व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बिना डेंगू की दवा ना ले क्योंकि यह उसके जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डाक्टर के परामर्श से ही दवा लेना सुरक्षित है।
delhincrnews.in reporter

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