आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर्स की अखिल भारतीय फेडरेशन के आह्वान पर 10 जुलाई को आहूत मांग दिवस के उपलक्ष में  ज़िला भर की कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय पर एकत्रीत्त हो कर राज्य के मुख्य मंत्रीमहिला एवं बाल विकास मंत्री तथा ज़िला परियोजना अधिकारी के नाम अपनी मांगो का ज्ञापन ज़िला राजस्व अधिकारी हरिओम अत्री के माध्यम से दिया। ऊमस भरी गर्मी में सैंकड़ों की संख्या में मौजूद आज की सभा की अध्यक्षता यूनियन की प्रधान संतोष ने तथा संचालन ज़िला सचिव सरस्वती ने किया। आंगनवाड़ी वर्कर्ज व हेल्पर्ज की मांगो के समर्थन में सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष कामरेड सतवीर सिंहज़िला कोषाध्यक्ष एस एल प्रजापतिअखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की ज़िला अध्यक्ष भारती देवी तथा ज़िला सचिव कामरेड उषा सरोहा अपने साथियों सहित मौजूद रहे।

ज्ञापन के माध्यम से मुख्य मंत्री को याद दिलाया गया की 10 मार्च को यूनियन प्रतिनिधियों की उनके साथ 12 सूत्री मांग पत्र पर विस्तार से चर्चा हुई थी तथा मांगों बारे सहमति बनी थी जीके तहत सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया था की जल्द ही तमाम मांगो को लागू कर दिया जायेगा। लेकिन आज तक सिर्फ वेतन बढ़ौतरीहेल्पर्स की वर्दी ओर गैस सिलेंडरकेन्द्रों के किराए का पत्र जारी हुआ है तथा अन्य स्वीकृत मांगों बारे नोटिफिकेशन जारी नहीं हुए हैं। ज्ञापन के माध्यम मांग की गई है की10 वर्ष तक कार्यकाल पर अर्ध कुशल व इसके बाद की सेवाकाल में कार्यरत वर्कर्स को कुशल श्रेणी में शामिल किया जाए तथा पी.एफ व ईएसआई के तहत कवर किया जाए। गर्मी व सर्दी की छुट्टियां वर्कर्स व हैल्पर्स को कम से कम 15-15 दिन जरूर मिले। हैल्पर्स को 5715 रूपये मानदेय के अलावा, 10, 20 व 30 वर्ष के सेवाकाल की तीन कैटेगरी बनाकर पहली कैटेगरी को प्रतिशतदूसरी कैटेगरी को 10 प्रतिशत व तीसरी को 15 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन देने के निर्णय को लागू किया जाए। काम के दौरान मृत्यु पर वर्कर व हैल्पर के आश्रितों को कम से कम लाख रूपये मुआवजे देने निर्णय को लागू किया जाए। हैल्पर से वर्कर व वर्कर से सुपरवाईजर की प्रमोशन 50 प्रतिशत केवल सीनियरटी की सूची के आधार पर करने के निर्णय को तुरंत लागू किया जाए। विभाग में समायोजित क्रेच वर्कर्स व हैल्पर्स को तुरंत नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। अन्य राज्यों की तर्ज पर सरकार व विभाग रिटायरमैंट व पैंशन योजना शुरू करे। हड़ताल के दौरान आन्दोलन में रही वर्कर व हैल्पर के काटे गए मानदेय को तुरंत दिया जाए।

महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन को भेजे ज्ञापन में यूनियन ने बताया की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा है कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में 3-6 साल के बच्चों के लिए ताजा पकाए भोजन के स्थान परडिब्बा बन्द भोजनडाकघर के माध्यम से लाभार्थियों को भेजा जाएगा। देश के 300 जिलों से 0-3 आयु वर्ग के 4.6 करोड़ बच्चों, 1.9 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को दिये जाने वाले पोषाहार के बदले प्रत्यक्ष सशर्त नकदी हस्तांतरण करने की शुरूआत की जाएगी और एक वर्ष तक बाकी सभी जिलों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। महिला और बाल विकास के मंत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा है कि आंगनवाड़ी 20 साल पहले जो भूमिका निभाती थी वो आज नहीं निभा रही है। यह आईसीडीएस की रिपोर्ट और अध्ययन के बिल्कुल विपरित हैं।

आप जानते ही हैं कि नकद हस्तांतरण जिसके तहत प्रति माह केवल 158 रू मुहैया करवाए जाऐंगे), सरकार की पोषाहार समिति की सिफारिशोंराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा आईसीडीएस पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा इस तरह के खतरनाक कदम के लिए उल्लेखित की जा रही राष्ट्रीय पोषण रणनीतिके विरूद्ध है। यह आईसीडीएस के बुनियादी उद्देश्य को ही खत्म कर देगा और जैसा कि एनएफएचएस-3 और एनएफएचएस-4 के आंकड़ों से स्पष्ट है कि इतने सालों में आईसीडीएस से प्राप्त उपलब्धियों को उलट देगा। इन कदमों से देश की 25 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं की आजीविका भी खतरे में होगी।

अब भारत सरकार द्वारा अंब्रैला आईसीडीएस के बहुत से हिस्सों से केंद्र का बजट का हिस्सा 60 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके कारण योजना ठीक से लागू नहीं हो पाएगीजोकि पहले से ही आपके द्वारा बजट में गहरी कटौती होने से बहुत सी समस्याओं का सामना कर रही है।

चूंकि इसे राज्य सरकारों की सहमति के बिना लागू नहीं किया जा सकता हैइसलिए हम आप से अनुरोध करते हैं कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के इन कदमों का विरोध करेंयह कदम आईसीडीएस को समाप्त कर देंगे जबकि आईसीडीएसभारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतीबच्चो का समग्र विकास और कुपोषण को खत्म करने का सबसे प्रभावी जरिया हैलेकिन इन कदमों से आईसीडीएस पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। हम आप से और आपके मंत्रालय व विभाग से अनुरोध करते हैं कि आईसीडीएस को मजबूत करने की जरूरत पर भारत सरकार पर दबाव बनाएं। राज्य के बच्चों के हितों के मद्देनजरयह बहुत ही जरूरी हो जाता है कि हरियाणा सरकार की ओर से भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कोआईसीडीएस में प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण और पैकेजयुक्त भोजन के विरोध में लिखित विरोध भेजा जाए।

ज़िला परियोजना अधिकारी के नाम ज्ञापन में यूनियन ने स्थानीय समस्याओं को सुलझाने के लिए अनुरोध किया।

 

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in 

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