आज यहाँ धार्मिक सद्भाव एवं विश्व शांति केन्द्र (FRHUP) की एक आम सभा की बैठक आयोजित की गई | बैठक में नयी राष्ट्रीय कार्यकारणी का गठन किया गया| सर्वसम्मति से अंतर्राष्ट्रीय स्कौंन मंदिर की श्रंखला के संयोजक महामंत्रादास जी (अनुपस्थिति में)  को संरक्षक और अन्तराष्ट्रीय प्रज्ञा मिसन के संस्थापक महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानन्द जी महाराज को मुख्य संरक्षक के रूप में चुना गया |

अन्तर्राष्ट्रीय बौद्धिस्ट कन्फडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष लामा लोबजैग को धार्मिक सदभावना एवं विश्व शांति केन्द्र का राष्ट्रीय अध्यक्ष और वीर चक्र प्राप्त एवं राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजेंद्र पाल त्यागी को महासचिव चुना गया | आर्य समाज के माया त्यागी, फादर जेड  एस.  पिटर, के जेड बुखारी , ब्रम्हकुमारी विमला बहन को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया |

इस अवसर पर प्रस्ताव आया की विश्व धर्म संसद का सही स्थान शिकागो में नही बल्कि भारत में है|  कर्नल त्यागी ने तर्क देते हुए कहा की यदि अमेरिका को अर्जुन, चीन को भीम, ओस्ट्रेलिया को नकुल और यूरोप को सहदेव मान भी लिया जाए तो भी धर्म राज युधिष्ठिर का किरदार केवल भारत ही निभा सकता हैं | निर्णय लिया गया की प्रधानमंत्री से अपील की जायगी की वो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराए और सभी धर्म अपने – अपने धर्म स्थलों का स्वयंम निर्माण करे | जब सभी धर्म गुरु राष्ट्र हित में “ जय हिन्द “ का पैगाम देंगे तो मजाल है की देश में कोई साम्प्रदायिक दंगा भड़क जाए |

पावन चिंतन धरा के संस्थापक पवन सिन्हा ने आह्वान किया की 11 सितम्बर 2018  को दिल्ली में एक धर्म संसद आयोजित की जाए और घोषणा की जाए कि 11 सितम्बर 2019 को भारत की राजधानी दिल्ली में  विश्व  धर्म संसद की जाएगी | उन्होंने कहा की इस सम्बन्ध में सांस्क्रतिक मंत्री माननीय डा. महेश शर्मा से संपर्क साधा जाए | सरकारी सहयोग मिले तो भी और न मिले तो भी , विश्व धर्म संसद का आयोजन किया ही जायगा चाहे इसके लिए भीख ही क्यों ना मांगनी पड़े | पूरे सदन ने खड़े होकर इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया |

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