हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य तथा कौशल विकास विभागों के मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि हरियाणा में अब तक लगभग 45 हजार अप्रैंटिस लगाए जा चुके है जो प्रति लाख जनसंख्या आधार पर 171 अप्रैंटिस बनते हैं, जोकि देशभर में सबसे अधिक हैं। दूसरे स्थान पर 105 अपैं्रटिस प्रति एक लाख जनसंख्या के आंकड़ो के साथ गुजरात है और 83 अपै्रंटिस प्रति एक लाख जनसंख्या के साथ महाराष्ट्र  तीसरे स्थान पर है।  इस लिहाज से हरियाणा अपैं्रटिस रखने में देश के अन्य राज्यों से काफी आगे है।
गोयल गुरुग्राम जिला के आईएमटी मानेसर स्थित एचएसआईआईडीसी ऑडिटोरियम में नेशनल अपै्रंटिसशिप प्रोमोशन स्कीम पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस कार्यशाला में जिला गुरूग्राम के अलावा, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रिवाडी एवं झज्जर जिलो के मुख्य औद्योगिक संगठन तथा औद्योगिक संघों के प्रतिनिधि एवं सहायक शिक्षुता सलाहकार ने भाग लिया।
अपने संबोधन में विपुल गोयल ने कहा कि अपै्रंटिस रखने में हरियाणा पूरे देश में टॉप पर है जिसके लिए भारत सरकार ने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा को ‘चैम्पियन ऑफ चेंज’ का अवार्ड दिया था। उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य ने अप्रैंटिसशिप प्रशिक्षण व्यवस्था में छुपे हुए फायदों को पहचानते हुए इस योजना को राज्य में सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र में जोर-शोर से लागू करने की ठानी है। सरकारी विभागों में 25,000 अप्रैंटिस लगाने का लक्ष्य रखा गया है जिसके प्रति अभी तक लगभग 17,000 अप्रैंटिस रखे भी जा चुके है तथा शेष लक्ष्य भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।
निजी क्षेत्र में 6 जिलो नामत: गुरूग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रिवाडी एवं झज्जर, जिनमें निजी उद्योग एवं प्रतिष्ठान अधिक संख्या में है, में अप्रैंटिस लगाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अप्रैंटिस रखना हर दृष्टि से प्रतिष्ठानों के ही फायदे में है। इससे भविष्य के कुशल श्रमिक तैयार होते है तथा साथ-साथ भारत सरकार से वित्तीय सहायता भी मिलती है।
गोयल ने कहा कि अप्रैंटिसशिप योजना की सहायता से युवाओं के कौशल में वृद्धि होती है जिससे उद्योगों को कुशल कारीगर आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं। हरियाणा सरकार प्रतिष्ठान की कुल मानव शक्ति का 5 प्रतिशत से अधिक की संख्या में अप्रैंटिस नियुक्त करने वाले प्रतिष्ठानों को ‘सक्षम साथी अवार्ड’ से सम्मानित करेगी। इस वर्ष एक मार्च को गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम में 22 उद्यमियों को सक्षम साथी पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने कहा कि हम और भी उद्योगों को इस अवार्ड से सम्मानित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अपै्रंटिसशिप योजना में पैसे की कमी नहीं है। भारत सरकार ने इस योजना में 10 हजार करोड़ रूपए के बजट का प्रावधान रखा है। हरियाणा सरकार को भारत सरकार से इस योजना में लगभग 10.50 करोड़ रूपए मिले हैं।
राज्य सरकार जितनी भी राशि की मांग इस योजना में भारत सरकार से करेगी, वह राशि मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अब तक जिन उद्योगों ने अपने यहां अपैं्रटिस रखे हैं, उनकी क्लेम राशि उन्हें दे दी गई है और किसी का भी भुगतान बकाया नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक अप्रैंटिस के लिए 1,500 रूपए प्रतिमाह तक की वित्तीय सहायता सरकार द्वारा प्रतिष्ठानों को प्रदान करने का प्रावधान इस योजना में  है। गोयल ने कहा कि एक अप्रैंटिस को स्टाईपैंड देने पर उद्योगों का 5 से 7 हजार रूपए के बीच खर्च आता है जबकि अकुशल श्रमिक को यदि रखा जाए तो लगभग 11 हजार का वेतन देना पड़ता है और वह सही तरीके से मशीन ना चलाकर मॉल भी खराब करता है। इस अनुसार एक अप्रैंटिस रखने पर प्रतिष्ठानों को लगभग 60 हजार रूपए तक की वार्षिक बचत होती है क्योंकि शुरु के 3-4 महीनों को छोडक़र वह उद्योग को प्रोडक्शन करके भी देता है।
गोयल ने यह भी कहा कि सभी उद्यमी प्रतिज्ञा करके जाएं कि वे अपने यहंा मानव शक्ति का 10 प्रतिशत अपैं्रटिस रखेंगे और सक्षम साथी पुरस्कार प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि खेलों, अनाज व दूध उत्पादन आदि क्षेत्रों की तरह अपैं्रटिस रखने में भी हरियाणा देश में पहले नंबर पर है और रहेगा। दूसरे राज्य हरियाणा के नजदीक भी नही हैं।
इससे पहले अपने विचार रखते हुए कौशल विकास तथा औद्योगिक प्रशिक्षण विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीसी गुप्ता ने कहा कि अपै्रंटिस रखने का मॉडल जर्मनी से अपनाया हुआ है और जिस प्रकार जर्मनी के उत्पाद बेहत्तरीन माने जाते हैं, उसी प्रकार यह योजना अपनाने से हरियाणा के उद्योगों में बनने वाले उत्पाद भी विश्व में उत्तम किस्म के होंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने 171 अपै्रंटिस प्रति एक लाख जनसंख्या रखने का देश में सर्वाधिक आंकड़ा प्राप्त करके कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2019 तक इस आंकड़े को 250 अपैं्रटिस प्रति एक लाख जनसंख्या तक ले जाने का लक्ष्य है, जोकि उनके अनुसार आसानी से प्राप्त हो जाएगा। श्री गुप्ता ने यह भी कहा कि हरियाणा को इस योजना में 2020 तक एक लाख अपैं्रटिस रखने का लक्ष्य भारत सरकार से प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि हरियाणा इस लक्ष्य से ज्यादा अपै्रंटिस रखकर कीर्तिमान स्थापित करेगा।
इस कार्यक्रम में उद्यमियों की इस योजना से जुड़ी शंकाओं को भी दूर किया गया। एक प्रश्र के उत्तर में गुप्ता ने कहा कि इस योजना के तहत हर प्रतिष्ठान के लिए अपने यहां उपलब्ध मानव शक्ति का कम से कम ढाई प्रतिशत तथा अधिकत्तम 10 प्रतिशत अपै्रंटिस रखने का प्रावधान है। एक अन्य उद्यमी द्वारा इस योजना के दुरुपयोग किए जाने के संबंध में उठाए गए सवाल पर गुप्ता ने कहा कि इसकी संभावनाएं ना के बराबर है। फिर भी उन्होंने कहा कि अब अपैं्रटिस रखने के मामले में उद्योगों की चैकिंग करवाई जाएगी। उद्योगों को इसके लिए सरकार द्वारा पर्याप्त समय दिया गया है और विभिन्न वर्कशॉप आयोजित करके योजना के बारे में विस्तार से समझाया गया है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि किसी के खिलाफ दण्डनीय कार्यवाही करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस अपैं्रटिस एक्ट 1961 के तहत सजा का प्रावधान था, जिसे सन् 2014 में संशोधित करके 500 रूपए प्रति रिक्त स्थान प्रतिमाह के जुर्माने का प्रावधान किया गया है और तीन महीने में बाद जुर्मान की राशि बढकर 1,000 रूपए प्रति रिक्ति प्रतिमाह हो जाएगी।
कार्यशाला में कौशल विकास विभाग के निदेशक आर सी बिढान ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि जीवन और बिजनेस में सफल होने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं-कौशल, व्यवहार में ईमानदारी तथा अनुशासन। उन्होंने इसके उदाहरण देकर भी समझाया और कहा कि अगर आप अपना उत्पादन बढाना चाहते हैं तो अपैं्रटिस रखे। ये उद्योग को आगे बढाने में मददगार होगा।
इस अवसर पर अपैं्रटिसशिप योजना के ब्रांड अंबैस्डर एवं सुबरोस कंपनी के एचआर मैनेजर पवन यादव, योजना के डिप्टी अपैं्रटिसशिप एडवाईजर संजीव शर्मा, राजकीय आईटीआई गुरुग्राम के प्राचार्य रविंद्र यादव ने भी अपने विचार रखे। कार्यशाला में आए हुए अतिथियों का गुरुग्राम के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने आभार जताया। इस मौके पर श्रम विभाग के अतिरिक्त श्रमायुक्त नरेश नरवाल भी उपस्थित थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in 

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