गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों में बच्चों को तनावमुक्त वातावरण देने तथा उनकी लर्निंग डिसेबिलिटी दूर करने के उद्देश्य से लघु सचिवालय से ‘प्रौजेक्ट जिन्दगी’ की शुरूआत की गई। जिला प्रशासन द्वारा यह प्रौजेक्ट जिला के 15 सरकारी विद्यालयों में पायलेट आधार पर चलाया जाएगा जिसके लिए चयनित स्कूलों में ‘धनक’ जिसका अर्थ इन्द्रधनुष है, नामक कमरा भी बनाया गया है।
इस प्रौजेक्ट को उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने लघु सचिवालय से विधिवत् शुरू किया। इस अवसर पर उपस्थित अध्यापकों व स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि इस प्रौजेक्ट का उद्देश्य बच्चों की लर्निंग डिसेब्लिटी को शुरू  में ही पहचान कर उसे दूर करने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि अक्सर घरों या स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई में कमजोर कह दिया जाता है जबकि उसके पीछे के कारणों का पता नही लगाया जाता। प्रौजेक्ट जिंदगी के माध्यम से बच्चों की काऊंसलिंग की जाएगी और उसके तनाव को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बैठक में उपस्थित अध्यापकों से कहा कि वे कक्षा में ऐसे बच्चों की पहचान करें जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई में ध्यान नही लगा पा रहे हैं और उन पर विशेष ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि इस प्रौजेक्ट का मुख्य बिंदु ऐसे बच्चों की पहचान करना है जो किसी भी कारण से अपनी पढ़ाई में ध्यान नही लगा पा रहा है और उस कारण का पता लगाकर उसे दूर करना है। उन्होंने कहा कि हमे यह भी प्रयास करना चाहिए कि हम अपने तनाव से बच्चों को दूर रखें और उन तक ना पहुंचने दें। इसके अलावा, पढ़ाई में कमजोर बच्चे को कभी उसके सामने ऐसा कहकर ना संबोधित करें। ऐसा करने से बच्चा स्वयं को ऐसा ही महसूस करने लगता है जो आगे चलकर उसमें स्वयं के लिए नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करता है।
तनाव पर बोलते हुए उपायुक्त ने कहा कि जीवन में तनाव की यदि बात की जाए तो इसे दो पहलु है। यदि हम तनाव से उत्पन्न होने वाले सकारात्मक दृष्टिकोण की बात करें तो यह हमारी परफोरमेंस के साथ साथ कार्यक्षमता को बढ़ाता है। उन्होंने अध्यापकों से अपील करते हुए कहा कि इसे जिला प्रशासन का प्रौजेक्ट समझने की बजाय अपना समझते हुए लीडरशिप से काम करें और बच्चों की जरूरतों को समझते हुए उनकी समस्याओं का समाधान करने की कौशिक करें।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त आर के सिंह ने कहा कि हम रोजाना अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के तनाव से गुजरते है और कई बार हमारे इस तनाव का असर बच्चों पर भी पड़ता है। उन्होंने अध्यापकों से कहा कि बच्चों को तनावमुक्त बनाने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले अध्यापक व अभिभावक तनावमुक्त रहें। उन्होंने कार्यक्रम में विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से स्वयं को तनावमुक्त रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रौजेक्ट के पीछे की अवधारणा ही यही है कि हम उतना ही तनाव रखें जो हमे सकारात्मक दिशा में लेकर जाए और कार्यक्षमता बढ़ाए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की सुशासन सहयोगी गुंजन गहलोत ने बताया कि गुरुग्राम में इस प्रौजेक्ट के तहत 45 अध्यापकों की ट्रेनिंग करवाई जाएगी। इस ट्रेनिंग का मॉड्यूल 48 घंटो का होगा जिसमें अध्यापकों को चैक लिस्ट दी जाएगी जिसके माध्यम से उन्हें कक्षा में बच्चों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस प्रौजेक्ट के माध्यम से स्कूलों में बच्चो के लिए योगा सैशन, मैंटल हैल्थ केयर एक्टिविटी व एंगर मैनेजमेंट के गुर सिखाए जाएंगे। इस प्रौजेक्ट के लिए चयनित प्रत्येक स्कूल से 3-4 अध्यापकों की ट्रेनिंग करवाई जाएगी।
कार्यक्रम में मनोरोग विशेषज्ञ एवं कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी डा. बह्मदीप संधु ने भी उपस्थित अध्यापकों व बच्चों को तनावमुक्त रहने के बारे में आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को तनावमुक्त करके हम उन्हे मानसिक रूप से मजबूत बना सकते हैं। यदि समाज में बच्चे मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होंगे तो भविष्य में इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
इस अवसर पर बड फाऊंडेशन की डायरेक्टर दिव्या वैष्णव तथा मनस फाऊंडेशन से मोनिका कुमार तथा उज्जवला ने भी अपने विचार रखें। इन संस्थाओं द्वारा भी इस प्रौजेक्ट के क्रियान्वयन में विशेष रूप से सहयोग दिया जा रहा है। इसके अलावा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रेमलता यादव ने शिक्षा विभाग की ओर से इस प्रौजेक्ट की सफलता में अपना भरपूर सहयोग देने का आश्वासन दिलाया। कार्यक्रम में अब्बास तथा साक्षी नामक विद्यार्थियों ने ‘तनावमुक्त’ विषय पर कविता सुनाई जिसकी उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहना की। इस अवसर पर उपायुक्त ने प्रौजेक्ट जिंदगी की टीम को अपनी शुभकामनाएं दी।
delhincrnews.in reporter

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