जिला गुरुग्राम में घटते भूजल में सुधार लाने तथा प्राकृतिक स्त्रोंतों को संरक्षित करने के लिए चलाई जा रही एकीकृत जल संरक्षण कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) के तहत अब तक जिला के विभिन्न गांवों में 71 तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार करवाया गया है। इन तालाबों के बनने से जहां एक ओर सूखे पड़े तालाबों को नया स्वरूप मिला है वहीं दूसरी ओर इनसे कृषि सिंचाई व अनुपयोगी बंजर भूमि में भी फसलें लहराने लगी हैं।
यह जानकारी गुरुग्राम के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि एकीकृत जल संरक्षण योजना सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसके क्रियान्वयन से भूमि, जल, वनस्पति आदि जैसे जल संग्रहन के प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया गया है। इस योजना के तहत गंदे पानी की निकासी के लिए नालों का निर्माण, ग्रामीणों की मांग के अनुसार स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर पानी की टंकी का निर्माण, जानवरों के पानी पीने के लिए खैल, तालाब का निर्माण, बरसाती पानी को रोकने के लिए चैक डैम व बरसाती पानी का संग्रहण आदि शामिल है।
उन्होंने गांव खेड़ा खुरर्मपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि इस गांव में पानी को रिचार्ज करने के लिए बनाये गये तालाब से जहां एक ओर घर से निकलने वाले खराब पानी को फिल्टर कर पशुओं के पीने योग्य बनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर इसके साथ लगती 5 एकड़ जमीन में आज किसान खेती के दौरान इस पानी का उपयोग कर रहे हैं। इस तालाब के बनने से पहले पंचायत की यह 5 एकड़ जमीन बंजर हाल में थी, लेकिन यहां तालाब बनने के बाद इस जमीन को पट्टे पर दिया गया है जिससे पंचायत की खाली पड़ी जमीन आमदनी का साधन बन गई।
एकीकृत जल संरक्षण कार्यक्रम के तकनीकी विशेषज्ञ डी के वर्मा ने बताया कि इस योजना के तहत फरूखनगर में 18, सोहना में 32 तथा पटौदी में 30 तालाब बनाए गए हैं। इसके अलावा, जिला में 27 रूफ टॉप रैन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम तथा राजकीय विद्यालयों में 27 पीने के पानी के टैंक भी बनाए गए हैं। इस योजना के तहत रिचार्ज पिट, नहर से पोंड तक पाइप लाइन दबाने, सिंचाई करने, पशुओं के पानी पीने, तालाब में पशुओं के उतरने की रैंप बनवाना, बंजर भूमि को समतल करवाने आदि के काम भी इस योजना के तहत करवाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि कई जगह इस योजना के तहत जहां संभव हो वहां छोटे बांध भी बनाए गए हैं ताकि पानी व्यर्थ ना हो और सीधे बांध में जा सके। उन्होंने बताया कि सोहना ब्लॉक के गांव घैंघोला, सरमथला, लोहसिंघानी व सतलाका आदि में मछली पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। बरसाती पानी संचयन से सिंचाई, पौधारोपण, मत्स्य पालन, चरागाहों को आवश्यकतानुसार पानी उपलब्ध करवाने में मदद मिलती है क्योंकि कार्यक्रम के तहत बरसाती पानी के सदुपयोग के लिए 6 वाटरशैड का चुनाव किया गया है।
उपायुक्त ने बताया कि इस कार्यक्रम से ग्रामीणों को बहुत अधिक लाभ मिल रहा है। इस योजना के आने से जहां एक तरफ भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा वहीं दूसरी तरफ बरसाती पानी का भी सदुपयोग हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों पर भूमि की पहचान भी की गई है।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in

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