हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्मार्ट ग्राम पहल के तहत जिला गुरुग्राम के गांवो को स्मार्ट बनाने व उनमें आधारभूत संरचना उपलब्ध करवाने के लिए देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मुख्य रूप से गुरुग्राम व मेवात जिलो के 100 गांवों में स्मार्ट ग्राम पहल के तहत प्रणब मुखर्जी फाऊंडेशन द्वारा केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के समायोजन से करवाए जा रहे विकास कार्यों को लेकर उनसे चर्चा की और मुखर्जी को  हरियाणा पधारने का न्यौता दिया। मुखर्जी के साथ आयोजित इस बैठक में गुरुग्राम के उपायुक्त एवं हरियाणा स्मार्ट ग्राम डैव्लपमेंट अथोरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने मुखर्जी को स्मार्ट ग्राम पहल के तहत चल रहे विकास कार्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रणब मुखर्जी को हरियाणा आने का निमंत्रण देते हुए कहा ‘‘ हरियाणा प्रदेश के 100 गांवों को स्मार्ट बनाने की पहल आपके कार्यकाल में शुरू की गई थी इसलिए मेरी दिली मंशा है कि आप एक बार गुरुग्राम आकर इन गांवों के बदलते स्वरूप को देखें’’। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में विकास की दृष्टि से स्मार्ट ग्राम पहल एक बड़ा इनीशिएटिव है और वे चाहते है कि गुरुग्राम व मेवात के गांवो को विकसित करने के बाद ऐसी ही पहल प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुरू की जाए।
उपायुक्त ने बैठक उपरांत इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए बताया कि स्मार्ट ग्राम परियोजना के तहत गुरुग्राम जिला के 80 गांव तथा मेवात जिला के 20 गांवो को चुना गया है। इन गांवों में चल रहे विकास कार्यो के लिए प्रणब मुखर्जी फाऊंडेशन सहित जगुआर व टाटा ट्रस्ट जैसी जानी-मानी बड़ी संस्थाओं द्वारा सीएसआर के तहत काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जगुआर व टाटा ट्रस्ट द्वारा जिले के 12 गांव में वाटर एटीएम लगाए गए हैं। इसके अलावा, गांव में इन्फ्रास्ट्रक्चर डैव्लपमेंट संबंधी परियोजनाओं में भी इन संस्थाओं द्वारा विशेष रूप से सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत चयनित इन गांवों में 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा, गांव में बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत ग्रामीणों से विचार-विमर्श करने के बाद ग्राम विकास योजना का खाका तैयार किया गया है। स्मार्ट ग्राम का मतलब है, एक ऐसा गांव जिसमें सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों और जहां खुशी और खुशहाली दोनों हों। यह तभी संभव है जब सरकार, प्राइवेट सैक्टर, पब्लिक इंस्टीटयूंशनस, एनजीओ और गांववासी एकजुट होकर गांव के विकास के लिए काम करें।
उपायुक्त ने कहा कि गांव दौला में राजकीय उच्चतर विद्यालय के भवन निर्माण कार्य की शुरूआत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि  इसके लिए ग्राम पंचायत द्वारा लगभग 7 एकड़ भूमि दी गई है। यह स्कूल भवन ओएनजीसी द्वारा सीएसआर के तहत बनवाया जा रहा है जिस पर 3 करोड़ की राशि खर्च किए जाने का अनुमान है। स्कूल का निर्माण नवीनतम टैक्रालॉजी द्वारा किया जा रहा है जोकि भूकंपरोधी होगा। इसमें ‘लो कॉस्ट हाऊसिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है । यह भवन प्रदेश में अन्य लोगों के लिए उदाहरण बनेगा क्योंकि यह कॉस्ट इफेक्टिव है और इस तकनीक का इस्तेमाल करके भविष्य में गरीब लोगों के सुरक्षित मकान बनाए जा सकेंगे। इस स्कूल के अंदर नेचुरल सेनीटेशन टैक्नोलाजी भी होगी जिससे प्राकृतिक तरीके से कचरे का निस्तारण किया जाएगा। इस बिल्डिंग  को बनाने में लोकल मिट्टी के ब्लॉक्स का इस्तेमाल किया गया है। ब्लॉकस में छेद के कारण इमारत के अंदर ध्वनि प्रदूषण नही होगा। इन ब्लॉकस की खासियत है कि इससे इमारत के अंदर का तापमान बाहर के तापमान की अपेक्षा काफी कम रहेगा।
इसके अलावा, गांव हरचंदपुर में नेशनल बिल्डिंग कन्सट्रक्शन कॉपरेशन (एनबीसीसी) के सीएसआर फंड द्वारा लगभग 34 लाख रूपये की लागत से ग्रामालय का निर्माण भी करवाया जा रहा है। उपायुक्त ने बताया कि ये परियोजनाएं प्रगति पर हैं और जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगी।
delhincrnews.in reporter

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