भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादीने प्रदेश में मई से चल रही नगर पालिकाओं में कार्यरत सफाई कर्मीसीवर मैनअग्नीशमन कर्मीवाहन चालकविद्युत कर्मीपंप चालककंप्यूटर ऑपरेटर आदि ठेका पर लगे कर्मचारियों की हड़ताल व उनकी मांगों का पूर्ण समर्थन किया है। हड़ताली कर्मियों के मनोबल को तोड़ने के लिए सरकार ने ईएसएमए सरीखे काले कानून का सहारा लेकर आग में घी डालने का ही काम किया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इस हड़ताल के प्रति प्रदेश की भाजपा सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये तथा ईएसएमए लगाने के तुगलकी फरमान की घोर निंदा की है।

गौरतलब है कि प्रदेश की नगर पालिकाओंनगर परषिदों व नगर निगमों के लगभग 30 हजार कर्मचारी लम्बे समय से अपनी मांगों के लिए आंदोलनरत हैं। मई से तीन दिन की हड़ताल पर जाने से पहले ये कर्मचारी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के सोनीपत आवास पर प्रदर्शन करने के इलावा सभी शहरों में 24 घंटे की भूख हड़ताल करके अपनी समस्याएं सरकार के सामने रख चुके हैं। परंतु सरकार ने अभी तक उनसे बातचीत नहीं की है। यह भाजपा सरकार की घोर संवेदनहीनता जीता जागता प्रमाण है। ज़िला सचिव शंकर प्रजापति ने कहा कि एक ओर जहां केन्द्र की मोदी सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर किए जा रहे प्रचार में करोड़ों रूपए खर्च कर रही हैवहीं दूसरी ओर प्रदेश की सरकार वास्तव में स्वच्छता के कार्य में लगे हुए सफाई कर्मचारियों  की समस्याओं को सुनने को भी तैयार नहीं है। ठेकेदार उनका शोषण कर रहे हैं। कोई सामाजिक सुरक्षा उन्हें नहीं दी जा रही।  सरकार और प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये की वजह से पिछले दिनों में अनेकों सीवर मैन को सफाई का काम करते हुए अपनी जान गंवानी पड़ी है। कईकई महीनों  से उनका वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार को न तो सफाई कर्मचारियों की ही चिंता है और न ही प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य की चिंता है। पिछले छदिन से प्रदेश के सभी शहरों में  सफाई का काम ठप्प पड़ा है और हर जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इनसे गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ रहा है।
माकपा ने कर्मचारियों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए सरकार से मांग की है कि वह फौरन हड़ताली कर्मचारी नेताओं से बातचीत करके उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान करे तथा ईएसएमए कानून को वापिस ले ताकि प्रदेश में सफाई व्यसव्था की चिंताजनक स्थिति को संभाला जा सके।

 

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