खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान की गुरुग्राम में उत्साह के साथ शुरुआत की गई। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने गुरुग्राम के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बाल) से इस अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के पहले दिन आज जिला के 160 स्कूलों के 32967 बच्चों को इन दोनो बिमारियों से बचाव के टीके लगाए गएख्, जिनमें 16967 छात्र तथा 16,000 छात्राएं शामिल थी। इन स्कूलों में 90 प्राईवेट स्कूल शामिल हैं जहां पर बच्चों का टीकाकरण किया गया है। उपायुक्त ने कहा कि आज टीका लगवाने के बाद कहीं भी किसी बच्चे को कोई दिक्कत नही आई, जो यह प्रमाणित करता है कि यह टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है और अभिभावकों को घबराने की जरूरत नही है।
उपायुक्त ने फिर अपील की कि अभिभावकों को अपने 9 महीने से 15 वर्ष की बीच की आयु के बच्चों को टीका लगवाने के लिए आगे आना चाहिए ताकि बच्चे इन दो बिमारियों से बचे रहें। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जिला के सभी स्कूलों से पूरा समर्थन अब तक जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को मिला है और उन्हें आशा है कि बच्चों के हितों को देखते हुए आगे भी सभी स्कूल इस अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग देंगे।
सिंह ने कहा कि काफी संख्या में अभिभावक तथा शिशु रोग विशेषज्ञ इस अभियान के साथ जुड़ गए हैं और वे स्वयं अपने स्तर पर लोगों को बच्चों को टीके लगवाने के फायदों के बारे में समझा रहे हैं। उन्होंने आशा जताई कि इस अभियान में जिला का कोई भी बच्चा खसरा-रूबेला से बचाव का टीका लगवाने से वंचित  नहीं रहेगा क्योंकि सभी मिलकर ‘इन दो बिमारियों को हराएंगे, ये टीका जरूर लगवाएंगे’। जिला में लगभग 6,37,284 बच्चों को यह टीका इस अभियान में लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
टीकाकरण अभियान के शुभारंभ अवसर पर उपायुक्त  ने वहां मौजूद सिविल सर्जन तथा अन्य चिकित्सकों से इस टीकाकरण की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली और टीका लगाने में प्रयोग किए जा रहे सिरिंज को ध्यानपूर्वक देखा। इसके बाद उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए जिला के सभी अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि यह टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है। अब तक यह टीका देश के 13 राज्यों के लगभग साढ़े 6 करोड़ बच्चों को लगाया जा चुका है और कहीं से भी इससे नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा युनैस्को भी अपना  पूरा समर्थन दे रहा है और प्रत्येक जिला में उनके प्रतिनिधि टीकाकरण कार्य पर नजर रखे हुए हैं।
उपायुक्त ने कहा कि अभिभावक यह समझ लें कि किसी बच्चे को यह टीका खाली पेट नहीं लगवाना है अर्थात् यह सुनिश्चित कर लें कि टीका लगवाने से पहले बच्चे ने कुछ खाना खा लिया हो।  उन्होंने यह भी बताया कि टीका लगाने के बाद आधे घंटे तक चिकित्सक उसे अपनी निगरानी में रखते हैं। इसके अलावा, टीकाकरण के बाद हर बच्चे को एक कार्ड बनाकर दिया जा रहा है तथा उसके बाएं हाथ के अंगूठे पर मार्किंग इंक से निशान लगाया जाता है जिससे यह पता चल सके कि बच्चे को टीका लग चुका है। उन्होंने आज विद्यालय में उन बच्चों से भी बात की जिनके टीके लगाए गए थे, ज्यादात्तर ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब टीका लगा। श्री सिंह ने बताया कि यह टीका ऑटो डिस्पोजेबल सिरिंज से लगाया जा रहा है, जिसका प्रयोग दोबारा नहीं किया जा सकता।
सिविल सर्जन डा. बी के राजौरा ने भी कुछ बच्चों को अपने हाथ से टीके लगाए। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान बताया कि यह एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। साथ ही डा. राजौरा ने बताया कि रूबेला के उपचार के लिए कोई निश्चित ईलाज  नही है और इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार खसरा बीमारी के लिए भी कोई निश्चित ईलाज नहीं है और टीका लगवाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। डा. राजौरा के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों तथा 20 वर्ष से बड़े व्यस्कों के लिए खसरा जानलेवा सिद्ध हो सकता है क्योंकि इसके कारण होने वाले डायरिया, निमोनिया और मस्तिष्क के संक्रमण की वजह से मृत्यु हो सकती है।
रूबेला के लक्षणों के बारे में डा. राजौरा ने कहा कि बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है जिसमें खारिश, कम डिग्री का बुखार, मिचली और हल्के नेत्र शोध के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कान के पिछे और गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां हो सकती है। संक्रमित व्यस्क, ज्यादात्तर महिलाओं में जोड़ो में दर्द हो सकता है। गर्भवस्था में आरंभ में रूबेला वायरस होने से जन्मजात रूबेला सिंड्रोम विकसित हो सकता है जिसके कारण नवजात शिशु जीवनभर के लिए विकलांग बन सकते हैं। यही नहीं, इससे गर्भपात या मृत शिशु का जन्म आदि भी हो सकता है।
इस मौके पर श्री सिंह के साथ सिविल सर्जन डा. बी के राजौरा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. एमपी सिंह, उप सिविल सर्जन डा. नीलम थापर, युनैस्को की प्रतिनिधि डा. मीनाक्षी, जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र कुमार, विद्यालय की प्राचार्य गीता आर्य भी थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in

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