खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान को लेकर उपायुक्त विनय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया जिसमें बताया गया कि 25 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अभियान में जिला के 6 लाख 37 हज़ार 284 बच्चों को इन बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जाने का लक्ष्य है।
उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने कहा कि अभियान की शुरूआत के लिए वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों में जाएंगे। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे सभी स्कूलों के प्रमुखों से बात करके यह सुनिश्चित करें कि वे अपने स्कूलों में 10वीं कक्षा तक के सभी बच्चों को ये टीके लगवाएं। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी टीकाकरण के संबंध में स्कूल प्रमुखों से बात करेंगे तो सभी स्कूल टीकाकरण के लिए राजी हो जाएंगे। बैठक में उप सिविल सर्जन डा. नीलम थापर ने प्रैजेंटेशन के माध्यम से बताया था कि जिला के लगभग 60 स्कूलों ने अभी तक  टीकाकरण के लिए स्वीकृति नही दी है। जब इन स्कूलों की सूची देखी गई तो जिला शिक्षा अधिकारी रविन्द्र कुमार तथा खंड शिक्षा अधिकारी कैप्टन इंदु बोकन ने कहा कि इनमें से कई स्कूलों के प्रमुखों के साथ उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है, जिस पर उन्होंने अपनी रजामंदी जताई है।
बैठक में डा. थापर ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत 9 महीने से 15 वर्ष तक के बच्चों को खसरा व रूबेला बीमारियों से बचाव का टीका लगाया जाएगा। यह अभियान 25 अप्रैल से शुरू होकर 5 सप्ताह तक चलेगा। उन्होंने बताया कि अभियान में जिला के 1,826 स्कूलों में टीकाकरण का कार्य किया जाएगा जिनमें से 530 राजकीय विद्यालय हैं। उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों में टीकाकरण के 2,616 सत्र होंगे। इनके अलावा, स्कूलों से बाहर जो बच्चे हैं उनके लिए टीकाकरण के 1,219 सत्र होंगे। इस प्रकार, टीकाकरण के कुल 4,046 सत्र होंगे। डा. थापर ने बताया कि जिला में एक दिन में टीकाकरण के लगभग 300 सत्र करवाए जाएंगे। टीकाकरण के लिए 4 व्यक्तियों की टीम बनाई गई  है जिसमें एक एएनएम, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर तथा एक वालंटियर शामिल हैं। एक एएनएम द्वारा स्कूलों में प्रतिदिन 200 टीके  लगाए जाएंगे तथा आऊटरीच यानि स्कूलों से बाहर के क्षेत्रों में एक एएनएम द्वारा 150 बच्चों को प्रतिदिन टीके लगाए जाएंगे। स्कूलों से बाहर के क्षेत्रों मे जिला के 1,033 आंगनवाड़ी केन्द्र भी शामिल हैं और उनके लिए टीकाकरण स्थल ज्यादातर मामलों में आंगनवाड़ी केन्द्र ही रहेगा।
उन्होंने बताया कि टीकाकरण के बाद बच्चे के बाएं हाथ के अंगूठे पर निशान लगाया जाएगा ताकि उसकी पहचान हो सके कि इस बच्चे को टीका लग चुका है। इसके अलावा, उस बच्चे को एक टीकाकरण का कार्ड भी बनाकर दिया जाएगा। डा. थापर ने बताया कि जिला में टीकाकरण के सभी प्रबंध पूरे  कर लिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में टीके तथा अन्य लॉजिस्टिक का सामान आ चुका है।
बैठक में उपस्थित इंडियन अकादमी ऑफ पिडियाट्रिक्स (आईएपी) के सचिव डा. अभिषेेक गोयल ने बताया कि यह वही टीका है जो प्राइवेट अस्पतालों में हम डॉक्टरों द्वारा लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है। साथ ही डॉक्टर गोयल ने कहा कि उनकी बेटियां सैक्टर-45 स्थित डीपीएस स्कूल में पढ़ती हैं और उन्हें भी यह टीका वहीं स्कूल में लगाया जाएगा। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को खसरा व रूबेला जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीका अवश्य लगवाएं ,चाहे यह टीका वे पहले भी लगवा चुके हों। डॉक्टर गोयल ने कहा कि इस टीके का कोई हानिकारक प्रभाव नही होगा बल्कि बच्चे की बीमारियों से लडऩे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। डा. गोयल ने यह भी कहा कि टीकाकरण के शुरू होने के दिन उनकी आईएपी संस्था के चिकित्सक भी इस अभियान में सहयोग देंगे और विभिन्न स्कूलों में भी जाकर अभिभावकों के संशयों को दूर करेंगे।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डा. बी के राजौरा, डब्ल्यूएचओ की सर्विलेंस मैडिकल ऑफिसर डा. बिंदु यादव, उप सिविल सर्जन डा. नीलम थापर, प्रतिरक्षण अधिकारी डा. एम पी सिंह, नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. असरूद्द्ीन, जिला शिक्षा अधिकारी रविन्द्र कुमार, गुरुग्राम की खंड शिक्षा अधिकारी कैप्टन इंदु बोकन, समेकित बाल विकास परियोजना की जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनैना सहित कई अधिकारीगण उपस्थित थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in

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