गुरुग्राम में आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में होने वाले अवैध निर्माण को सील करके तोड़ा जाएगा। सील करने व तोडऩे की जिम्मेदारी नगर निगम गुरुग्राम की रहेगी। ये आदेश उपायुक्त विनय प्रताप सिंह द्वारा आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में अवैध निर्माण रोकने तथा 300 मीटर दायरे में पहले से हुए निर्माण का सर्वे करके प्रभावितों के लिए  मुआवजा निर्धारण करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए गए। इस बैठक में वायु सेना केंद्र के अधिकारी स्क्वैंडर्न लीडर एस एन सिंह भी उपस्थित थे।
बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अभी इस पूरे 900 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में न्यायालय का स्टे है, इसलिए पूरे क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नगर निगम की एन्फोर्समेंट विंग यह सुनिश्चित करे कि 900 के प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण ना हो और यदि कहीं होता पाया जाए तो उसे तत्काल सील किया जाए। उपायुक्त ने कहा कि इस कार्य के लिए नगर निगम के अधिकारियों को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध करवाया जाएगा तथा ड्यूटी मैजिस्ट्रेट भी लगाए जाएंगे।
उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से आयुध डिपो के 300 मीटर दायरे में बने निर्माणों का विस्तृत डाटा मांगा है जिसमें निर्माण का क्षेत्रफल, बिल्डिंग की किस्म जैसे वह आवासीय, कॉमर्शियल या औद्योगिक है, स्ट्रक्चर की प्रकार अर्थात् बिल्डिंग किस प्रकार की बनी हुई है, उसका प्रयोग तथा मालिक का नाम इत्यादि होने चाहिए तभी मुआवजे का आंकलन किया जा सकता है। इसमें यदि आजीविका प्रभावित होती है, तो उस पहलु को भी मुआवजा निर्धारण में शामिल किया जाएगा।  इस डाटा को तैयार करने के लिए नगर निगम अपने प्रोपर्टी टैक्स के डाटा तथा सर्वे रिपोर्ट को आधार बना सकता है। इसके अलावा, जीआईएस लैब का प्रयोग  भी इस कार्य के लिए किया जा सकता है। उपायुक्त ने कहा कि पहले उच्च न्यायालय में आयुध डिपो के 300 मीटर दायरे में पडऩे वाले भवनों का डाटा तथा उनको खाली कराने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाली मुआवजा राशि का विवरण जिला प्रशासन की तरफ से प्रस्तुत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डिफेंस एक्ट की धारा-8 के तहत वे जिलाधीश के तौर पर नगर निगम से आयुध डिपो के 300 मीटर क्षेत्र में रहने वाले लोगों का पूरा विवरण मांगेगे। इसके बाद धारा-9 के तहत आम जनता के साथ वह डाटा सांझा करते हुए उनसे दावे व आपत्तियां मांगी जाएंगी ताकि किसी व्यक्ति का नाम उसमें छूटे नहीं। उपायुक्त ने बताया कि नियमानुसार जिन व्यक्तियों के भवन 300 मीटर के दायरे में आएंगे उन्हें ही मुआवजा मिलना चाहिए। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि अभी तक उच्च न्यायालय का स्टे ऑर्डर पूरे 900 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र पर लागू है इसलिए आगामी आदेशो तक पूरे क्षेत्र में निर्माणों पर प्रतिबंध रहेगा।
इस अवसर पर नगर निगम की संयुक्त आयुक्त अनु श्योकंद, एसीपी महेंद्र सिंह, जिला राजस्व अधिकारी हरिओम अत्री, नगर निगम के डीटीपी मोहन सिंह, तहसीलदार नोरंग सिंह सहित नगर निगम के इन्फोर्समेंट विंग के अधिकारीगण उपस्थित थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhincrnews.in

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