जिला में अप्रैल माह से मिजल्स-रूबेला (एम आर) कैंपेन शुरू होने जा रहा है, जिसके तहत 9 महीने से 15 साल तक के सभी बच्चो को एक वैक्सीन लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग हरियाणा और गुरूग्राम जिला प्रशासन ने इस कैंपेन को सफल बनाने के लिए इंडियन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के बाल रोग विशेषज्ञो तथा इंडियन मैडिकल एसोसिएशन(आईएमए) का सहयोग मांगा है।
उपायुक्त ने बाल रोग विशेषज्ञों व आईएमए के प्रतिनिधियों से अपने कार्यालय में बैठक की और उनसे इस कार्य में अपना सहयोग देने की अपील की। उपायुक्त ने कहा कि उनके क्लीनिक पर आने वाले बच्चों के अभिभावकों को एमआर कैंपेन के बारे में जरूर बताएं। उन्हें इस टीके के बारे में जागरूक करें और बताएं कि यह टीका बच्चों के लिए सुरक्षित है। इसके अलावा, वे स्कूलों में जाकर भी एमआर कैंपेन के बारे में जानकारी दें। इस टीके से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह टीका विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा सुरक्षित घोषित किया गया है। यह टीका बच्चों को जीवन में एक ही बार लगाया जाता है। उपायुक्त ने कहा कि इस कैंपेन के बाद मिजल्स-रूबेला का यह टीका रूटीन इमुनाइजेशन का ही हिस्सा बन जाएगा।
उपायुक्त ने फोर्टिस, आर्टिमिस, मेदांता तथा मैक्स जैसे बड़े अस्पतालों के चिकित्सकों से भी अपील करते हुए कहा कि वे एमआर कैंपेन को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। बैठक में उपस्थित आईएपी के बाल रोग विशेषज्ञों तथा आईएमए के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त को इस अभियान में अपना सहयोग देने का विश्वास दिलाया। बैठक में उपायुक्त ने मिजल्स व रूबेला कैंपेन से संबंधित पोस्टर भी आईएपी तथा आईएमए के प्रतिनिधियों को वितरित किए।
उपायुक्त ने कहा कि यह टीका लगवाना जरूरी है चाहे बच्चे को पहले लग चुका हो अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि यह टीका पहले ही देश के 13 राज्यों के सवा 6 करोड़ बच्चो को लगाया जा चुका है, यह टीका बिलकुल सुरक्षित है । उन्होंने कहा कि अभिभावक चाहें तो अपने निजी चिकित्सक से सलाह ले सकते है, कोई भी चिकित्सक इसके लिए मना नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार पोलियो की ड्रॉप्स पिलाने के समय बच्चे के बाये हाथ की छोटी उंगली पर मारकर से निशान लगाया जाता था, इस कैंपेन में बच्चे के बाये हाथ के अंगूठे पर निशान लगाया जायेगा ताकि पता चल सके कि उसे इंजेक्शन लग चुका है।
सिविल सर्जन डा. बी के राजौरा ने कहा कि वे अभिभावकों को मिजल्स और रूबेला बीमारियों के लक्षणों के बारे में जागरूक करें और इन बीमारियों की वजह से क्या विकृतियां बच्चे में हो सकती है, के बारे में बताएं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार सन 2020 तक देश से मिजल्स अर्थात खसरा को जड़ मूल से समाप्त तथा रुबेला को नियंत्रित करना चाहती है, इसी उदेश्य से यह कैंपैन 2019 तक पूरे देश के सभी राज्यों को कवर करने के लिए चलाया जा रहा है।
इस अवसरपर सिविल सर्जन डा. बी के राजौरा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. अजय अरोड़ा, डा. महेश्वरी, आईएपी से सैके्रटरी डा. अभिषेक, डा. प्रेमलता, आईएमए प्रैजीडेंट डा. नरेश शर्मा,डा. एम पी सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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