भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादीने भाजपा व आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा त्रिपुरा की जीत के बाद वामपंथी कार्यकर्ताओंउनके घरों,पार्टी कार्यालयोंजनसंगठनों के कार्यालयों पर जिस प्रकार से कातिलाना हमले आगजनी व तोड़ फोड़ शुरू की है उसके खिलाफ संयुक्त रूप से फौरी तौर पर विरोध प्रकट कर उपायुक्त के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।

सीपीआई के ज़िला सचिव कामरेड मुरली कुमार तथा सीपीआई(एमके ज़ोनल सचिव शंकर प्रजापति के अतिरिक्त कामरेड राजेन्द्र सरोहाप्रभाती लालसुरेश कुमारउषा सरोहा,अमर नाथशिव कुमार व अन्य साथी भी मौजूद रहे। दोनों पार्टियों के वक्ताओं ने बताया कि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा पूरे त्रिपुरा में वामपंथियों पर किए जा रहे रक्तरंजित हमलों से प्रदेश कि शांति को दुबारा से भंग करने कि आरएसएस व भाजपा की कोशिशें शुरू हो गई हैंजो भाजपा/आरएसएस की असली नीतियों की ध्योत्क हैं। लोकतन्त्र में राजनीतिक जीत हार चलती रहती है मगर भाजपा अपनी इस जीत का जश्न आम नागरिकों को जान व माल का नुकसान पहुंचा कर माना रही है। जीत का ऐसा तांडव पश्चिम एशिया के आईएसआईएस व अफ़ग़ानिस्तान के तालिबानी कुकृत्यों की याद एक बार फिर ताज़ा कर रहा है।

ज्ञापन में बयाया गया है कि इन हमलों में मार्च शाम बजे तक 514 व्यक्ति घायल हुए हैं, 1,539 घरों में तोड़फोड़ की गई है और 196 घरों को आग लगा दी है। 134 पार्टी दफ्तरों व जनमोर्चो के 38 दफ्तरों पर तोड़फोड़आगजनी और 208 पार्टी दफ्तरों पर कब्जे किए गए हैं। ये हमले अभी भी लगातार जारी हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सता के नशे में चूर होकर भाजपाई लोकतंत्रजनतांत्रिक अधिकारों व संवैधानिक मयार्दायों को खत्म करने पर तुले हुए हैं।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कल हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का यह बयान कि बीजेपी ने लाल झंडें वालों से कई राज्य मुक्त किए हैं। प्रदेश में लाल रंग की बदमाशी नहीं चलने देंगेभी इन अलोकतांत्रिक कृत्यों को सही ठहराने वाला व भाजपा कार्यकर्ताओं को उकसाने वाला है। भाजपा के कई अन्य नेताओं द्वारा भी इस हिंसा को जायज ठहराया जा रहा है। भारत जैसे लोकतात्रिंक देश में सबको अपनी बात कहने व राजनीतिक विचार रखने का अधिकार है। इस तरह का फासीवादी माहौल बनाने की कोशिश पूरे देश के लिए चिंता का विषय है और लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती है। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि त्रिपुरा की स्थिति ओर ज्यादा भयानक होने से पहले महामहिम तुरंत हस्तक्षेप करें व इस हिंसा को रोका जाए। राज्य में शांति बहाली व सामान्य स्थिति बनाने के लिए प्रयास किए जाएं।

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

 

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