सीटू एवं सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की उपायुक्त कार्यालय पर हड़ताल जारी रहीजिसकी अध्यक्षता कृष्ण यादव व छहों ब्लॉकों की प्रधानों ने तथा संचालन बबीताकमलेश खोड़ आदि ने किया। उपायुक्त कार्यालय पर हड़ताली वर्करो के समर्थन में सीटू के राज्य अध्यक्ष कामरेड सतवीर सिंहज़िला सचिव कामरेड राजेन्द्र सरोहा व कोषाध्यक्ष मेजर शंकर प्रजापति के अतिरिक्त अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य की उप प्रधान व ज़िला सचिव उषा सरोहासर्व कर्मचारी संघ के ज़िला सचिव संजय सैनीडाक्टर अंबेडकर स्टूडेंट्स फ्रंट ऑफ इंडिया राज्य प्रवक्ता सुमित चौधरीराष्ट्रीय मतदाता मोर्चा के अध्यक्ष व गांधीवादी श्री सतीश मराठागुड़गाँव के नगर पार्षद गाजे सिंह काबलानासर्व कर्मचारी संघ रेवाड़ी के ज़िला उपाध्यक्ष संजय कुमारआईएनटीयूसी फ़तेहाबाद के ज़िला महासचिव सुखविंदर सिधानी आदि ने भी आंगनवाड़ी कर्मियों की मांगों को जायज ठहराते हुये भाजपा सरकार की निंदा की तथा कहा कि सरकार केवल पूँजीपतियों के लिए काम कर रही है। भाजपा सरकार के अजेंडा से किसानमजदूरमहिलाविद्यार्थीबेरोजगार नौजवान तो बिलकुल ही गायब हो चुके हैं। 
जनवादी महिला समिति की नेता उषा सरोहा ने अपने सम्बोधन में कहा कि आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर को पक्के कर्मचारी का दर्जा दिया जायेतब तक न्यूनतम वेतन ₹18,000 घोषित किया जाएसामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाएक्रेच वर्करों को आंगनवाड़ी में समायोजित किया जाएआंगनवाड़ी केंद्रों में खाना मदर ग्रुप की महिलाओं से बनवाया जाएरुका हुआ मानदेय दिया जाए और मानदेय में बढ़ोतरी की जाए ,सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए। उन्होने कहा की सम्मान जनक समझोता होने तक हडताल जारी रहेगी।

राज्य सरकार ने आज आंदोलनकारी यूनियनो के नेतृत्व को बातचीत के लिए बुला रखा है। कार्यक्रम के अनुसार  आंगनवाड़ी कर्मियों ने ज़िला सचिवालय के चारों तरफ मानव शृंखला बना कर अपने गुस्से का प्रदर्शन बड़े ही शांति पूर्वक तरीके से किया। हजारों कि संख्या में उपस्थित महिलाओं ने आधा घंटा से अधिक समय तक सचिवालय के मुख्य द्वारों को घेरे रखा तथा सरकार के खिलाफ जबर्दस्त नारे बाज़ी करती रही।

यदि कोई फैसला नहीं लिया जाता है तो आंगनवाड़ी कर्मी हाथों में कटौरा लेकर सरकार के लिए नगरवासियों से भीख मांग कर मुख्य मंत्री की उदरपूर्ति के लिए भेजेंगी। महिलाओं ने कहा की अपनी तनख़ाह बढ़वाने के लिए तो मंत्रियों को पाँच मिनट का समय भी नहीं लगतामगर मजदूरों को सालों साल संघर्ष करना पड़ता है। 

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here