हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने जिला में सोहना के निकट स्थित के आर मंगलम युनिवर्सिटी के प्रथम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि वे अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर रहे हैं, फिर भी हिंदी में संबोधित करते हैं क्योंकि वे विद्यार्थियों को कोई विषय पढाने नहीं आए बल्कि आशीर्वाद देने आए हैं और आशीर्वाद दिल से दिल को दिया जाता है जो अपनी भाषा में ही होना चाहिए, पराई भाषा में नहीं।
इस दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने के आर मंगलम युनिवर्सिटी के 395 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की, जिनमें से 27 प्रतिशत छात्राएं थी। उन्होंने 13 विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड मैडल प्रदान किए।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि 1893 में जब उन्होंने अमेरिका में अपने संबोधन के शुरू में कहा कि ‘ब्रदर्स एण्ड सिस्टर्स ऑफ अमेरिका’ तो सारा हॉल तालियों से गूंज उठा और वहां उपस्थित लोग पूछने लगे कि यह कौन है और कहां से आएं हैं जो सभी को अपना भाई-बहन कहकर पुकार रहे हैं क्योंकि पहले के वक्ता लेडीज एण्ड जैनटलमैन ऑफ अमेरिका कहकर संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि जब तक आप अपनी भाषा में नहीं बोलेंगे तो दिल से दिल का संबंध होगा ही नहीं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आप अपने पिता को डैडी कहकर बुलाएं या फिर मां को मदर और बहन को सिस्टर कहकर पुकारें, आपको अंतर स्पष्ट नजर आएगा। उन्होंने कहा कि टैक्रोलॉजी की पढाई के लिए अंग्रेजी भाषा आवश्यक होती है क्योंकि अंगे्रजी एक विश्व स्तरीय भाषा हो गई है।
के आर मंगलम युनिवर्सिटी की पत्रिका में लिखे ‘द कंपलीट वल्र्ड ऑफ ऐजुकेशन’ की भी राज्यपाल ने व्याख्या करते हुए कहा कि इसके दो अर्थ हैं। एक अर्थ है कि शिक्षा के क्षेत्र में जो चाहिए, वह सब यहां उपलब्ध है और दूसरा अर्थ है कि शिक्षित होना तथा साक्षर होने में बहुत अंतर है। उन्होंने कहा कि अंगे्रजो के शासनकाल में लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति व्यक्ति को शिक्षित नहीं अपितु साक्षर बनाती थी। उस समय थ्री आर यानि रीडिंग, राईटिंग तथा अर्थमैटिक पर जोर दिया जाता था, जिसका आपके जीवन से संबंध नहीं होता। आपके जीवन, चरित्र, व्यवहार से जब संबंध होता है तो वह वास्तव में शिक्षा है। उन्होंने कहा कि हम लिटरेट अर्थात् साक्षर होने के साथ-साथ व्यक्ति बनाना चाहते हैं। आपको सच्चा इंसान बनना है, लिटरेट और ऐजुकेटिड दोनों गुण आएंगे तब हम कहेंगे कि कंपलीट वल्र्ड ऑफ ऐजुकेशन।
उन्होंने कहा कि युनिवर्सिटी का लाभ आस पास के गांवों को भी मिलना चाहिए। युनिवर्सिटी के स्तर तक जनसंख्या के केवल 11 प्रतिशत लोग ही पहुंच पाते हैं और उन पर ही समाज में चेतना तथा राष्ट्रीयता पैदा करने की जिम्मेदारी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी के बाद लॉर्ड मैकाले की थ्री आर शिक्षा पद्धति के स्थान पर थ्री एच अर्थात् हैड, हॉर्ट और हैंड कर दिया था। उनका मानना था कि हैड अर्थात् दिमाग में जो आप सोचते हैं वह हॉर्ट यानि दिल अथवा आत्मा में उतरे और हैंड अर्थात् हाथ से उसी प्रकार हम कार्य करें। इन तीनों में समन्वय होना आवश्यक है तभी सही मायने में व्यक्ति तैयार होगा, जिसकी आज समाज में जरूरत है। उन्होंने स्कूल व कॉलेजों में विद्यार्थी द्वारा अपने साथी की हत्या करने, अपने अध्यापक पर कातिलाना हमला करने जैसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें ‘व्यक्ति’ निर्माण पर ध्यान देना होगा, जो परिवार, समाज व देश के विकास के प्रति समर्पित हो।
इस मौके पर युनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रो. के के अग्रवाल ने राज्यपाल का स्वागत किया। कुलपति आर के मित्तल ने युनिवर्सिटी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि वर्तमान में वहां 1,700 से अधिक विद्यार्थी 32 डिग्री कार्यक्रमों में शिक्षार्थ हैं। इनमें 10 प्रतिशत स्नातकोत्तर व डॉक्टरेट कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में कुल सचिव संदीप सी सिंह ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार  तथा उपायुक्त विनय प्रताप सिंह भी थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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