संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने तथा इसके महत्व को आमजन तक पहुंचाने के लिए गुरुग्राम के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत सम्मेलनम् का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में गुरुग्राम के मंडलायुक्त डा. डी सुरेश ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। इस सम्मेलन में संस्कृत भाषा के वक्ताओं ने बढ़-चढक़र भाग लिया।
इस अवसर पर हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के उपाध्यक्ष श्रेयांश द्विवेदी ने गुरुग्राम के मंडलायुक्त डा. डी सुरेश को पुष्प माला पहनाकर उनका स्वागत किया। मंडलायुक्त के स्वागत में श्रृंगेरी विद्यापीठ तथा आर्य हाई स्कूल, बादशाहपुर के विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में स्वागत गीत प्रस्तुत किया। क्योंकि सम्मेलन का थीम ही संस्कृत भाषा पर आधारित था इसलिए मंच संचालन व वक्ताओं का संबोधन भी संस्कृत भाषा मे हुआ। यह सम्मेलन दो सत्रों मे आयोजित किया गया था ।
सम्मेलन में उपस्थित बच्चों को संबोधित करते हुए मंडलायुक्त डा. डी सुरेश ने कहा कि संस्कृत भाषा के महत्व के लिए जरूरी है कि इस प्रकार के सम्मेलन अत्यंत आवश्यक है। आज ज्यादातर लोगों का मानना है कि समय के साथ साथ संस्कृत भाषा का महत्व कम हो गया है, जबकि ऐसा नही है। संस्कृत भाषा हिन्दी या तेलगू जैसी कई भाषाओं का आधार है जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध भाषा है। उन्होंने कहा क्योंकि वे स्वयं आंध्र प्रदेश से संबंध रखते है जहां तेलगू भाषा बोली जाती है। तेलगू भाषा में भी बहुत से शब्द संस्कृत भाषा के है। इतना ही नही,  कन्नड़ भाषा की बात की जाए तो उसकी शब्दावली में भी बहुत सारे शब्द संस्कृत भाषा के हैं। आज भी बहुत से कार्यक्रम संस्कृत भाषा में आयोजित किए जाते हैं। हमारी बहुत सी प्राचीन विधाएं भी संस्कृत भाषा में हैं। संस्कृत भाषा आज भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से काफी प्रचलित भाषा है। उन्होंने कहा कि मेरे बहुत से ऐसे मित्र भी हैं जो संस्कृत भाषा का विषय चुनकर आईएएस या आईपीएस सर्विसिज में आए हैं। उन्होंने कहा कि आज भी संस्कृत भाषा का महत्व बरकार है। इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए हमे संस्कृत सम्मेलन जैसे प्रयास करने चाहिए। हमारी प्राचीन परंपरा, देश का इतिहास, संस्कृति इस भाषा से जुड़ी है। उन्होंने संस्कृत सम्मेलन के आयोजकों को बधाई देते हुए बच्चों को अपनी शुभकामनाएं दी।
हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के उपाध्यक्ष श्रेयांश द्विवेदी ने इस अवसर पर संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. मांंगेराम शर्मा, प्रो. हरेराम मिश्रा, प्रो. कमला भारद्वाज, सत्येन्द्र सत्यम, शिव कुमार शास्त्री, मुकेश कुमार, बह्मशास्त्री, प्रमोद शास्त्री, डा.सुनील कुमार सहित भारी संख्या में संस्कृत ज्ञाता उपस्थित थे। संस्कृत भारती  उत्तरक्षेत्र के संगठनमंत्री श्री जयप्रकाश मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित थे। इनके अलावा, सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रो हरेराम मिश्र, सेवानिवृृत आचार्य जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी उड़ीसा, भारतीय बाल बैडमिंटन संघ एवं नैतिक और सांस्कृतिक प्रशिक्षण संघ हरियाणा (आईएमसीटीएफ) आदि संस्थानों से आचार्य तथा हरियाणा के विभिन्न जिलों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रबुद्ध व्यक्ति यों ने भाग लिया।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here