सीटू के नेतृत्व में आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर्स यूनियन ने अपनी मांगों के लिए राज्यव्यापी आन्दोलन शुरू किया है। आन्दोलन की पहली कड़ी में 16 फरवरी को सभी जिला मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन करेंगी। इस का बात का फैसला कमला नेहरू पार्क में आयोजित ज़िला की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने चंचल की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया। बैठक का संचालन राज्य व ज़िला सचिव सरस्वती ने किया।

राज्य कमेटी द्वारा लिए गए फैसलों पर बात रखते हुए सरस्वती ने बताया की 17 फरवरी से 27 फरवरी तक तमाम ब्लाकों में सभाएं व प्रदर्शन आयोजित लिए जाएंगे तथा 6 मार्च को रोहतक में वर्कर्स व हैल्पर्स का राज्य स्तरीय महासम्मेलन करके आगामी बड़े आन्देालन का ऐलान होगा। आन्दोलन का यह एलान राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ व अपने हकों को पाने तक बड़े व निरंतर संघर्ष की शुरूआत होगी। आन्दोलन को पूरी तैयारी के साथ लड़ा जाएगा जो जीत के बाद ही वापस होगा। सरस्वती ने वर्कर्ज व हेल्पर्स कि मांगो का खुलासा करते हुए कहा कि सरकार आंगनवाड़ी वर्कर्स को तीसरे एवं हैल्पर्स को चैथे दर्जे का सरकारी कर्मचारी घोषित करे व तब तक न्यूनतम वेतन 18,000 रूपये दिया जाए। मानदेय का भुगतान नियमित हो। 14 जून 2017 को विभाग की निदेशिका द्वारा वर्कर्स एवं हैल्पर्स के धरने/प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर रोक लगाने के पत्र को तुरंत निरस्त किया जाए। शहरो में आंगनबाड़ी केन्द्र का किराया 6,000 व गांवो में 3,000 मासिक हो व नियिमत रूप से किया जाए। गर्मी सर्दीयों की छुट्टियां सरकारी स्कूलो के अनुसार की जाए। राशन की सप्लाई मीनू के हिसाब से व पूरे तौल के अनुसार दी जाए। आंगनबाड़ी केन्द्रों में खाना मदर ग्रुप द्वारा ही बनवाया जाए व मेहनताने में वृद्धि की जाए। आंगनबाड़ी केन्द्रों में सरकार द्वारा हाजिरी सुनिश्चित करवाई जाए। हैल्पर से वर्कर ववर्कर से सुपरवाईजर पदोन्नति की जाए। हैल्पर की वर्दी का रंग बदला जाए। निजीकरण पर रोक लगे व विभाग के लिए प्रयाप्त बजट का प्रावधान किया जाए। आई. सी. डी. एस. में डिब्बा बंद भोजन व प्रत्यक्ष-सशर्त कैश ट्रान्सफर को लागू करने के कदम पर तुरन्त रोक लगाई जाए। आई सी डी एस का किसी भी प्रकार से निजीकरण ना किया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार वर्कर्स को न्यूनतम वेतन व सामामजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष सतवीर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुये बताया कि आप जानते हैं कि आईसीडीएस को शुरू हुए 43 वर्ष से ज्यादा हो चुके हैंमगर इसमें कार्यरत वर्कर्स व हैल्पर्स को कर्मचारी का दर्जा तो दूर, अब तक इन्हें मजदूर तक नहीं माना गया है। हरियाणा भर में लगभग 51 हजार वर्कर्स व हैल्पर्स इसके अन्तर्गत काम कर रहीं हैं। जिस समय नियुक्ति की गई थी तो छह सेवाएं व पांच उद्देश्यों का कार्यभार सौंपा था, लेकिन आज वर्कर्स व हैल्पर्स से तरह-तरह की बेगार करवाई जा रही है। इतनी मेहनत व इतनी लंबी सेवा के बावजूद आज आंगनबाड़ी वर्कर को मात्र 8,140 रूपये मिल रहे हैं जबकि हैल्पर को 3,820 रूपये। 40-40 साल सेवा देने के बावजूद इतना कम मानदेय और रिटायरमैंट के समय एक रूपयें तक का कोई लाभ नहीं है। केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकारें महिलाओं कि मेहनत की भारी लूट कर रही है। क्या इसे स्वीकार किया जा सकता है? उन्होने कहा कि आंगनवाड़ी में कार्यरत महिलाओं को न्यूनतम वेतन दिया जाए जो किसी भी रूप में 18,000 रूपये से कम नहीं होना चाहिए।

सीआईटीयू के कोषाध्यक्ष शंकर प्रजापति ने कर्मियों कि मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार भी वर्कर्स व हैल्पर्स विरोधी फैसले ले रही है और साथ ही लोगों के विरोध जताने के अधिकार पर भी हमला कर रही है। लंबे समय सेमहिलाएं राज्य में अपनी मांगों को लेकर आन्दोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार आपकी मांगों का कोई समाधान नहीं कर रही है। आंगनबाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स के मानदेय में 640 रूपये हैल्पर के केवल 70 रूपये की मामूली बढ़ोतरी कर अखबारी वाहवाही लूटना चाहती है। यह योजना में कार्यरत महिलाओं के साथ सरासर धोखधाड़ी व मजाक है। उन्होने कहा कि सीआईटीयू कि अगुवाही में आपने जो ये आंदोलन लड़ने का फैसला लिया है कि आपको पूरा वेतन, पैंशन सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ व कर्मचारी का दर्जा मिलेइसके लिए सीआईटीयू आपके संघर्ष में कंधे से कंधा मिला कर आपका साथ देगा।

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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