राजकीय महाविद्यालय सैक्टर-9 में मोहन फाउंडेशन के द्वारा महाविद्यालय में ‘अंगदान-देहदान’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मोहन फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ. मुनीत कौर साही एवं कार्यक्रम अधिकारी मरीना थाॅमस ने महाविद्यालय के एन सी सी कैडेटस, एन एस एस स्वयंसेवक एवं अन्य छात्र-छात्राओं के सम्मुख अंगदान की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा उन्हें मरणोपरांत देहदान के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर डाॅ मुनीत कौर ने बताया कि शरीर के कौन-कौन से अंगों का दान मरणोपरांत किया जा सकता है। उन्होंने नेत्रदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नेत्र दान किसी भी मनुष्य की मृत्यु होने के बाद सिर्फ छह घंटों की अवधि तक ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि आपकी आंखें किसी दूसरे मनुष्य के काम आ जाएं तो आप मृत्यु के बाद भी इस संसार को देख सकेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को वो सभी महत्वपूर्ण दूरभाष नम्बर उपलब्ध करवाएं जिन पर कोई भी व्यक्ति अंगदान के लिए आवेदन कर सकता है। उन्होंने बताया कि अंगदान करने की सुविधा हर अस्पताल में नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों को गुरुग्राम के उन सभी अस्पतालों के बारे में बताया जहां यह सुविधा उपलब्ध है। उनके द्वारा विद्यार्थियों को अंगदान के पंजीकरण फार्म वितरित किए गए।
महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या डाॅ. कृष्णा मल्हान ने कहा कि अंगदान महादान है। इससे बड़ा पुनित कार्य और कोई नहीं हो सकता है। कार्यक्रम संयोजक कैप्टन राजकुमार ने अपनी भावनाएं स्वरचित पंक्तियों ‘कर जाता है जाते-जाते जो देह का दान/क्या हो सकता है उससे बेहतर कोई इंसान’ के माध्यम से अभिव्यक्त की। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वह स्वयं निर्मया फाउंडेशन के माध्यम से अपने नेत्रदान का पंजीकरण कर चुके हैं।
इस मौके पर विद्यार्थियों को एक फिल्म के माध्यम से अंगदान के लिए प्रोत्साहित किया गया। डाॅ. राजेश कुंडु, डाॅ. प्रवीण सिंह, डाॅ. अंजना शर्मा, डाॅ. ललिता गौड़, डाॅ. रवि, डाॅ. राजीव, डाॅ. सुरेंद्र सहित महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक मौजूद रहे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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