राष्ट्रीय सैनिक संस्था आगाह किया कि राजनीतिक पार्टियां अपने स्वार्थ के लिए कोई भी समझौता करने के लिए तैयार हो जाती है। इसका स्पष्ट उदाहरण है फौज के खिलाफ कश्मीर में FIR दर्ज होना। यह राजनीतिक पार्टियों की ही कृपा है कि पुलिस फौज के खिलाफ FIR दर्ज करने की हिम्मत कर सकती है। देश में केवल फौज एक ऐसी संस्था बची है जो सरहद पर दुश्मनों का मुकाबला भी कर सकती है और देश में आई प्राकृतिक अथवा कृत्रिम आपदा को भी नियंत्रित कर सकती है। कारण यह है कि फौज के प्रत्येक सिपाही में कर्तव्य निष्ठा, प्रशिक्षण, अनुशासन, इमानदारी है। कोई फौज को गुंडा कहता है तो कोई सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगता है, कोई फौज पर FIR करता है तो कोई सिपाहियों के खून की दलाली करता है। हम आगाह करना चाहते हैं कि फौज के प्रत्येक सिपाही के हाथ में एक मोबाइल फोन है और यह फोन स्मार्टफोन है। सिपाही को अपने नेताओं के आचरण और भाषण का पता लगता रहता है। कल्पना कीजिए कि यदि सिपाही के दिमाग में यह आ गया कि क्या वह ऐसे नेताओं के लिए सर्वोच्च बलिदान करें तो क्या होगा।

राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने अत्यंत कड़े शब्दों में मांग की कि कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया जाए और फौज के खिलाफ की गई FIR को न केवल रद्द किया जाए बल्कि संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। हमारी मांग नहीं मानी गई तो हम वह करेंगे जो हम करना नहीं चाहते।

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