17 जनवरी से आशाआँगनवाड़ी व मिड डे मील कर्मियों के संयुक्त प्रदर्शन के बाद,लघु सचिवालय पर आशा वर्करों का चल रहा धरना पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। आज के धरने में ज़िला की प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो की लगभग साढे पाँच सौ आशा वर्करों ने हिस्सा लिया। धरने की अध्यक्षता ज़िला प्रधान मीरा देवी ने तथा संचालनलक्ष्मी व सुदेश ने किया। 
धरने को झज्जर से विशेष तौर पर आई राज्य की सचिव अनिताके अतिरिक्त भवन निर्माण कामगार यूनियन के ब्लाक सचिव ललित कुमारआल इंडिया लायर्ज यूनियन के ज़िला सचिव एडवोकेट विनोद भारद्वाजआँगनवाड़ीवर्कर्ज व हेल्पर्ज यूनियन की जिला अध्यक्ष शारदा देवीजनवादी महिला समिति की ज़िला प्रधान भारती देवी,राज्य उपाध्यक्ष व ज़िला सचिव उषा सरोहाज्ञान विज्ञान समिति के ज़िला संयोजक ईश्वर नास्तिकसीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष कामरेड सतवीर सिंहज़िला सचिव कामरेड राजेन्द्र सरोहाकोषाध्यक्ष एस एल प्रजापति आदि ने संबोधित करते हुए केंद्र व राज्य सरकार की महिला विरोधी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है वही उसी बेटी के पढ़ लिख जाने के बाद सामाजिक व आर्थिक शोषण करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।

एक हज़ार रुपये के मानदेय के बदले चौबीस घंटे एडी पंजों पर रहना पड़ता हैजिस में सुरक्षा की कोई गारंटी भी नहीं है। आशा वर्करों को सांगठनिक एवं राजनीतिक रूप से तैयार होना पड़ेगा। चुनावी वादों को केंद्र व राज्य सरकार जुमला बताकर छोड़ रही है। आशाओं को अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए आंदोलन को और तेज करना पड़ेगा। जहां आशा वर्कर लड़ रही हैं वही जिन परिवारों को सेवाएं दी जा रही हैं, उनके बीच में जाकर तैयार करते हुए उन्हें भी आंदोलन का हिस्सा बनाना पड़ेगा और एक बड़ी लड़ाई प्रदेश में खड़ी की जाएगी। उन्होंने हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार आंदोलन को लंबा खींचना चाहती है जो राज्य सरकार की महिला विरोधी नीति को उजागर करती है। आशा वर्कर अकेले नहीं हैं। 

बातचीत के माध्यम से समाधान नहीं किया तो सीटू एवं सर्व कर्मचारी संघ इस आंदोलन में पूरी ताकत के साथ खड़ा होकर आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। उन्होंने 30 जनवरी को जेल भरो आंदोलन का आह्वान करते हुए कहा कि 30 जनवरी के सत्याग्रह से हरियाणा सरकार की पोल खुल जाएगी और उसे पता चलेगा कि प्रदेश के मजदूरों और कर्मचारियों में सरकार की नीतियों के प्रति कितना गुस्सा है। अगर फिर भी सरकार कोसद्बुद्धि नहीं आई तो आर पार के संघर्ष का ऐलान होगा। आशा वर्करों की मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। 

आशा वर्करों की मांग है कि सरकार उन्हें कर्मचारी का दर्जा दे, 45 वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाये सभी को सामाजिक सुरक्षा दी जाये।न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये लागू करें। परियोजनाओं का निजी करण बन्द किया जायेI तेलंगाना मे आशा वर्करों का फिक्स वेतन 6,000 दिल्ली व गुजरात में 4,500 केरल सरकार 7,500 दे रही हैं तो हरियाणा में फिक्स वेतन 1,000 क्यों? जबकि हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय भी देश में तीसरे नंबर पर है लेकिन वेतन देश में सबसे कम हरियाणा में है। आशाओं ने चेतावनी देते हुये कहा कि या तो सरकार 25 जनवरी तक हमारी मांगों का समाधान कर दे अन्यथा 27 से 29 जनवरी तक पूर्ण हडताल होगी व 30 जनवरी को जेल भरो आंदोलन करेंगे।

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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