गुरुग्राम जिला के ग्रामीण क्षेत्रों को गणतंत्र दिवस तक पॉलिथीन फ्री बनाने के उद्द्ेश्य से जिला में युद्धस्तर पर कार्यक्रम चलाए जा रहे है ताकि लोगों में पॉलिथीन का प्रयोग ना करने को लेकर जागरूकता आए और वे प्लास्टिक बैग की जगह जूट के थैलों का इस्तेमाल करें। गुरुग्राम जिला में अब तक 12 ग्राम पंचायतों को पॉलिथीन फ्री किया जा चुका है।
इसी कड़ी में गांव भौड़ाकलां में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जागरूकता रैली निकाली गई। बच्चों व महिलाओं ने हाथ में बैनर व पोस्टर लेकर लोगों को पॉलिथीन के दुष्प्रभावों से अवगत करवाया। इसके अलावा, स्कूलों व आंगनवाड़ी सैंटरों में भी बच्चों व महिलाओं को पॉलिथीन का प्रयोग ना करने को लेकर शपथ दिलवाई गई। ग्राम पंचायत इकबालपुर में भी स्कूली बच्चों को पॉलिथीन से वातावरण पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताया गया। इतना ही नही जिला के गांवो में आज सरपंचो द्वारा लोगों कपड़े व जूट के थैले भी वितरित किए गए।
गौरतलब है कि गुरुग्राम जिला के ग्रामीण क्षेत्रों को पॉलिथीन फ्री बनाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर वॉल पेंटिंग भी करवाई जा रही है। इसके अलावा, इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला में विभिन्न स्थानों पर बैनर व पोस्टर भी लगाए गए हैं। जिला गुरुग्राम में चारो खंडो में गांवो को क्लस्टर में बांटा गया है। इसके अलावा, स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान भी बच्चों को प्लास्टिक बैग के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जा रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि प्लास्टिक बैग वातावरण को प्रदूषित करते हैं और कई बार भयंकर बिमारियों का कारण भी बनते हैं। प्लास्टिक बैग का मनुष्यों, जीव-जंतु के स्वास्थ्य व पेड़-पौधों आदि पर बुरा प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक बैग नॉन बायोग्रेडेबल होता है अर्थात् ये प्राकृतिक तरीके से विघटित नही होते। ये खेत खलिहान में जहां भी होगा वहां की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इसके नीचे दबे बीज भी अंकुरित नही हो पाते हैं और भूमि बंजर हो जाती है। इतना ही नही, कई बार खाने पीने योग्य वस्तुओं को पॉली मे बंद करके फैंकने से कई बार पशु इनका सेवन कर लेते है जिसके कारण कई बार पशु भी मृत्यु का ग्रास बन जाते हैं।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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