‘ख्वाहिशों से नहीं गिरते फल-फूल झोली में, कर्म की साख को हिलाना पड़ता होगा, कुछ नहीं होता कोसने से अंधेरे को, अपने हिस्से का दीया खुद ही लाना होगा।’ किसी भी कार्य को करने के प्रति प्रेरित करने के लिए इन दो लाइनों से बहुत कुछ प्रेरणा ली जा सकती है। ऐसी ही पे्ररणा को अपने जीवन में आत्मसात करके चार युवाओं की टोली गुरु द्रोण की नगरी में निकली है सड़कों के गड्ढे भरने। सिर्फ गड्ढे ही नहीं बल्कि पहले भी वे समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।
हम शहर में जहां भी जाते हैं, जिन सड़कों पर चलते हैं, वहां बिना बाधा के शायद ही चला जाता हो। शहर की लगभग सभी सड़कों पर निकलते ही हमारा स्वागत गड्ढों से होता है। इन गड्ढों से कोई नहीं संभला तो गिर भी जाता है। कई बार तो संभलने वाले भी गिर जाते हैं।
इन गड्ढों को प्रशासन व सरकार की उदासीनता के चलते युवाआें की एक टोली ने भरने के लिए काम शुरू कर दिया है। वैसे तो इन सभी का अपना-अपना प्रोफेशन है। फिर भी वीकेंड पर शनिवार को ये एकत्रित होकर सुबह से ही सड़कों के गड्ढे भरने को घर से निकल पड़ते हैं। समाज के लिए कुछ सकारात्मक कर गुजरने की तमन्ना ने इन्हें इस कार्य के लिए प्रेरित किया। ये खुद तो समाजसेवा कर ही रहे हैं, साथ में अपने बच्चों को भी लेकर उन्हें प्रेरित करते हैं। एक आवाज नाम से सोशल पेज की शुरुआत करने वाले इस टीम के एक ‘सिपाही’ राजकुमार सैनी कहते हैं कि उन्होंने समाजसेवा काम अपने पिता बनवारी लाल सैनी को देखते हुए किया है। हुडा विभाग से वीआरएस लेकर समाजसेवा में उनके पिता आए और लगातार इस कार्य में जुटे हैं। अपने पिता के अनुभवों और उनके कार्यों को देखते हुए उनमें भी इस तरह का जज्बा पैदा हुआ। इस जज्बे को पिता ही नहीं, बल्कि हम उम्र वालों का साथ और उम्र से बड़ों का आशीर्वाद मिला। इसी के चलते वे परिवार के सदस्यों के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर पेड़ लगाने का कार्य करने लगे। अब उनकी टीम में तीन और सदस्य जुड़ गए हैं, जिनमें रोड सेफ्टी आॅफिसर धर्मबीर वर्मा एडवोकेट, बेटी बचाओ अभियान में बीबीपुर के सरंपच सुनील जागलान के साथ काम में लगे सुनील सैनी, शिवसेना में पदाधिकारी के साथ समाज सेवा में जुटे रितुराज शामिल हैं। अब तीन चारों की जोड़ी गुरुग्राम शहर की सड़कों के गड्ढों को भरने में लगी है। प्रशासनिक, राजनीतिक उपेक्षा के चलते उन्होंने खुद यह निर्णय लिया और कस्सी, तसला उठाकर जुट गए गड्ढे भरने में। शनिवार को उन्होंने शहर में सड़कों के बीच में बने गहरे गड्ढों को भरा। यहां से गुजरने वाले वाहनों का यहां गड्ढों के कारण अक्सर जाम लगा रहता था। गड्ढे भरने के बाद काफी बदलाव आया है। राजकुमार सैनी के मुताबिक उनकी टीम वीकेंड पर शनिवार को समाजसेवा का यह काम करती है। धर्मबीर का कहना है कि जब तक हम खुद नहीं बदलेंगें, तब तक देश नहीं बदलेगा। हर किसी को समाज सेवा की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि आधी समस्याएं हम खुद ही खत्म कर सकें।

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