मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती पर प्रदेशवासियों एवं विशेष रूप से नौजवानों को बधाई दी है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि एक युवा सन्यासी के रूप में भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की महक विदेशों तक बिखेरने वाले स्वामी जी साहित्य, दर्शन और इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान थे। उन्होंने कहा कि स्वामी जी की जयन्ती को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

एक बधाई संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 वर्ष की आयु में सन्यास ग्रहण करने वाले स्वामी विवेकानन्द का जन्म कोलकाता में 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। संत रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्य के रूप में उन्होंने भारत की आध्यात्मिकता से परिपूर्ण दर्शन को विश्व जगत के समक्ष पूरी तार्किकता एवं अकाट्य प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया। भारत में हिन्दू धर्म को पुष्पित एवं पल्लवित करने में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से स्वामी विवेकानन्द के भाषणों एवं लेखन को अधिक से अधिक पढ़ने तथा उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की अपील की है। उन्होंने विवेकानन्द के प्रसिद्ध सूत्रवाक्य ‘उठो, जागो और तब तक रुको नहीं, जब तक मंज़िल प्राप्त न हो जाए’, को दोहराते हुए नौजवानों से इसे अपनी जीवन यात्रा में अपनाने का आग्रह किया है।

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