गुरुग्राम में एटीएम मशीनो की लूट तथा बैंकिग फ्रॉड की घटनाओं पर अंकुश लगाने से उद्द्ेश्य से डीसीपी क्राइम सुमित कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सुरक्षा कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई बैंक अधिकारियों व सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में डीसीपी ने एटीएम लूट तथा बैंक फ्र ॉड के मामलों को रोकने को लेकर बैंक अधिकारियों व सुरक्षा एजेंसियों से सुझाव भी मांगे और कहा कि अच्छे सुझावों को भविष्य में अवश्य अमल किया जाएगा। आज आयोजित बैठक में तीन बिंदुओ पर विशेष तौर पर चर्चा की गई जिसमें से पहला एटीएम लूट संबंधी मामलों पर रोक लगाना, दूसरा लोगों के एटीएम कार्ड से फर्जीवाड़ा कर पैसे निकलवाने तथा तीसरा नेट बैंकिंग व ऑनलाइन फॉड पर रोक लगाना आदि शामिल हैं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीसीपी क्राइम सुमित कुमार ने कहा कि पिछले दिनों एटीएम लूट की वारदातों को अंजाम देने वाले गिरोह के माध्यम से इनकी सुरक्षा संबंधी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। कई बैंको के एटीएम में सुरक्षा के इंंतजाम पुख्ता ना होने के कारण एटीएम लूट की वारदातों की पुर्नावृति हुई है और ज्यादातर वारदातों को शनिवार व रविवार को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि केस स्टडी के  दौरान सभी तथ्यों की बारिकी से जांच की गई है जिन्हे आधार बनाकर एटीएम लूट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने आवश्यक है। जांच के दौरान सामने आया कि कई एटीएम मशीनें जमीन के ऊपर रखी होती हैं और कुछ एटीएम मशीनों को ग्राऊ टिड बनाया गया है। जमीन पर रखे एटीएम को लूटना अपेक्षाकृत अधिक आसान होता है। इसके अलावा, कई एटीएम पर सीसीटीवी कैमरे भी खराब मिले जोकि एटीएम की सुरक्षा में सेंध है।
उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वे एटीएम पर सुरक्षाकर्मी की नियुक्ति अवश्य करें जो ना केवल वैपन्ड हो बल्कि रात के समय वहां ड्यूटी पर अवश्य रहे। सुरक्षाकर्मी ना केवल अच्छी तरह टैं्रड होना चाहिए बल्कि एटीएम मशीन की सुरक्षा संबंधी तथ्यों का भी ज्ञाता होना आवश्यक है। सुरक्षाकर्मी को चाहिए कि वे संदिग्ध व्यक्ति की सूचना समय रहते शेयर करे ताकि वारदात को होने से पहले ही रोका जा सके। इसके साथ ही डीसीपी ने कहा कि कई मामलों में कस्टमर के बहुत ही कान्फीडेंशियल डाटा के साथ भी छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वे लोगों का डाटा सेव रखने के आवश्यक इंतजाम करें ताकि उनकी मेहनत का पैसा सुरक्षित रहे।
कुमार ने कहा कि कई मामलो में देखा गया है कि जिन लोगों को एटीएम मशीन चलाने में परेशानी आती है वे अपने आस पास लोगों की मदद ले लेते है और अपराधी इसी बात का फायदा उठाकर उनके अकाऊंट से पैसे निकाल लेते हैं। इस बारे में लोगों में जागरूकता होनी अत्यंत आवश्यक है। बैंक अधिकारी अपने यहां आने वाले लोगों को इस बारे में जरूर बताएं कि वे अपने बैंक अकाऊंट संबंधी जानकारी को किसी के साथ शेयर ना करें। इस बारे में बैंक अधिकारी अपने यहां बैनर व पोस्टर आदि लगवाएं जिस पर इस बारे में सारी जानकारी लिखी हुई हो। इसके साथ ही सभी बैंक अधिकारी अपने यहां संबंधी एरिया के एसएचओ, एसीपी व डीसीपी का मोबाइल नंबर अपने बैंक के डिस्पले बोर्ड पर जरूर चस्पा करें ताकि जरूरत पडऩे पर उनसे तुंरत संपर्क किया जा सके।
डीसीपी ने कहा कि कई एटीएम रूम में सीसीटीवी कैमरों के साथ ही डीवीआर भी लगे होते है। इन डीवीआर को भी अपराधी अपने साथ उठा ले जाते है जिससे उन अपराधियों को ढूंढना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। बैंक अधिकारी व सुरक्षा एजेंसी सुनिश्चित करें कि किसी भी एटीएम या बैंक में डीवीआर या तो वहां से दूर अलग स्थान पर रखा हो या फिर सारी रिकॉर्डिंग आई क्लाऊड पर हो।
उन्होंने कहा कि जिला में ज्यादातर लोकेशन ऐसी हैं जहां पर दो या तीन बैंको के एटीएम आस-पास बने है, ऐसी स्थिति में यदि सुरक्षा एजेंसी चाहे तो वे उन एटीएम के लिए एक सुरक्षाकर्मी नियुक्त कर सकती हैं। इसके साथ ही ये भी देखने में आया है कि कई बैंकों में सेंधमारी का एक कारण वहां से खाली लगते प्लॉट व पुरानी इमारतें भी हैं जहां से अपराधी सेंधमारी कर बैंक से पैसा लूट लेते है। ऐसी इमारतों व खाली प्लॉट से सेंधमारी कर बैंक में अंडरग्राऊंड प्रवेश किया जाता है और लूट को अंजाम दिया जाता है। बैंक अधिकारी ऐसे स्थानों की पहचान करें और बिल्डिंग ऑनर तथा प्लाटधारक से बात कर सुरक्षा को पुख्ता करें। बैठक में डीसीपी सुमित कुमार के साथ एसीपी शमशेर सिंह तथा जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक आर सी नायक भी उपस्थित थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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