हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि किसी को शिक्षा देना जीवन की सबसे बड़ी सेवा है। शिक्षा ज्ञान देने के साथ साथ युवाओं में अच्छे संस्कार पैदा करती है व उनका चरित्र निर्माण करती है। वे गुरुग्राम के जीडी गोयंका विश्वविद्यालय में तीसरे दीक्षांत समारोह दौरान बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दीक्षांत समारोह में 381 सफल विद्यार्थियों को डिग्री व डिप्लोमा दिए गए। इसके अलावा, 23 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को राज्यपाल ने अकादमिक उत्कृष्टता के लिए प्रशंसा पत्र व मैडल प्रदान किए गए।
दीक्षांत समारोह के विधिवत् शुभारंभ से पूर्व समारोह स्थल पर राष्ट्रीय गान किया गया व श्लोकोच्चारण के साथ भगवान को याद किया। सोलंकी ने इस अवसर पर कहा कि दीक्षांत समारोह का दिन विद्यार्थियों के साथ साथ विश्वविद्यालय के लिए भी महत्वपूर्ण दिन होता है, क्योंकि इस दिन विश्वविद्यालय को भी अपनी उन्नति का पता चलता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में ज्ञान व कौशल के साथ साथ उनमें संस्कारों को भी पैदा करता है। विद्यार्थियों को यह पता होना चाहिए कि उनका जीवन में संकल्प क्या है। उन्होनें कहा कि विश्वविद्यालय में ज्ञान व कौशल के साथ साथ पर्सनेल्टी डैव्लपमेंट व चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने समारोह में ‘सर्वे भवन्यु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणी पशयंति, मां कश्चिद् दुख:भाग भवेत’ का उच्चारण किया व कहा कि यह श£ोक हमारी भारतीय संस्कृति का उल्लेख करता है।
उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में केवल भारतीय संस्कृति ऐसी है जो केवल मनुष्य ही नही बल्कि जीव-जंतुओं व पेड़-पौधों की प्रगति की कामना ईश्वर से करती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता व विजय प्राप्त करने के लिए धर्म का रास्ता चुनना अत्यंत आवश्यक है। यदि व्यक्ति धर्म को आधार मानकर जीवन व्यतीत करता है तभी विश्व उन्नति कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥’ श्लोक के बारे मे विस्तार से बताया और कहा कि इसका भावार्थ है कि हमे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो तथा मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। इस श्लोक में छिपा संदेश ही यही हमारी संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि आज जो भी विद्यार्थी यहां से अपनी डिग्री लेकर जाएं वे एक बार मन में संकल्प लें कि वे अपने परिवारजनों व अध्यापकों की अपेक्षाओं को अवश्य पूरा करेंगे।
उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा ही सबसे बड़ी सेवा है जिसके माध्यम से संस्कार व ज्ञान से ऐसी क्षमता विकसित की जा सकती है कि वह व्यक्ति को सही अर्थों में मानव बनाती है। शिक्षा सबसे बड़ी सेवा की श्रेणी में आती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में बड़े-बड़े राजा महाराजा पढ़ाई जंगलों मे जाकर शिक्षा प्राप्त करते थे। यह विश्वविद्यालय उसी दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. डा. हरि ने भी अपने विचार रखे। दीक्षांत समारोह में गुरुग्राम के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह, पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार, सोहना के एसडीएम सतीश यादव सहित विश्वविद्यालय की चांसलर रेणु गोएनका और प्रबंध निदेशक, निपुण गोएनका व अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थी।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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