डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय प्रदेश का पहला राजकीय चिकित्सालय होगा जिसमें इन्फर्टिलिटी क्लीनिक प्रारभ्भ होगी। इसमें इन्फर्टिलिटी से संबंधित पुरूषों एवं महिलाओं की समस्त जाँचें, परामर्श एवं इन्ट्रायुट्राईन इन्सेमीनेशन (आई0यू0आई0) की सुविधा निःशुल्क प्राप्त होगी। ये विचार प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने डा. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में इन्फर्टिलिटी क्लीनिक तथा हृदय चिकित्सा इकाई के शुभारम्भ के अवसर पर व्यक्त किये।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हृदय रोग अब देश में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। इससे 80 प्रतिशत से अधिक रोगियों की मृत्यु हार्ट-अटैक एवं स्ट्रोक की वजह से होती है, जिसका कारण जीवनशैली में परिवर्तन, तनाव, खान-पान एवं व्यायाम न करने के कारण देश में रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में हृदय रोग से मरने वालों की संख्या 272 प्रति एक लाख जनसंख्या पर है, जोकि विश्व के आंकड़े 235 प्रति एक लाख जनसंख्या से ज्यादा है।

प्रदेश सरकार ने भी इसकी गम्भीरता को समझते हुए एन0सी0डी0 (नाॅन कम्युनिकेबल डिजीज) कार्यक्रम में शामिल किया है। इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए ही चिकित्सालय में 06 केबिन युक्त हृदय रोग इकाई का शुभारम्भ किया है, जिससे प्रदेश वासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ-साथ चिकित्सालय के द्वितीय तल में आज से ही हृदय चिकित्सा इकाई का भी शुभारम्भ किया जा रहा है।
डा0 राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के निदेशक डा. डीएस नेगी ने बताया कि इन्फर्टिलिटी, समुचित सेक्सुअल एक्सपोजर के बाद बिना गर्भनिरोधक तरीकों को इस्तेमाल करते हुए जीवित बच्चों को पैदा करने की असमर्थता, पुरूष एवं महिलाओं संबंधी कारणो से होती है। यह सिर्फ एक शारीरिक बीमारी न होकर मानसिक एवं सामाजिक समस्या भी है, जिससे गुस्सा, अकेलापन एवं दुख होता है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश दम्पतियों में यह प्राइमरी समस्या होती है, सेकेन्डरी इन्फर्टिलिटी महिला के जीवन में पहले प्रसव के बाद कभी भी हो सकती है। इन्फर्टिलिटी 30 प्रतिशत महिला, 30 प्रतिशत पुरूषों एवं बाकी पुरूष एवं महिला दोनों में कमियों की वजह से होती है। इन्फर्टिलिटी का मुख्य कारण बच्चेदानी की बनावट, हारमोन, इन्फैक्शन एवं आज के परिप्रेक्ष्य में पाॅलीसिस्टिक ओवरी सिनड्रोम (पी0सी0ओ0एस0) की वजह से होता है। पूरे विश्व में लगभग 50 से 80 करोड़ दम्पति एवं भारत में 13 से 19 करोड़ दम्पति इन्फर्टिलिटी की समस्या से ग्रसित है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा महानिदेशक, डा0 पदमाकर सिंह तथा अन्य वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित थे।

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