गुरुग्राम जिला को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए शुरू की गई ‘स्वच्छ मैप’ मोबाइल एप जिला प्रशासन की तीसरी आंख की तरह काम कर रहा है। जिला के नगर निगम, नगर परिषद् व नगरपालिका क्षेत्रों को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्वच्छ मैप से जोड़ दिया गया है। इस स्वच्छ मैप की मोबाइल एप को जिला में अब तक 2,350 लोगों ने अपने मोबाइल फोन में डाऊनलोड किया है और इस मोबाइल एप के माध्यम से गंदगी की 987 शिकायतों का निपटारा भी किया जा चुका है। इस मोबाइल एप पर शिकायत अपलोड करने के 48 घंटों के भीतर उसका समाधान करना अनिवार्य है।
गुरुग्राम के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बताया कि स्वच्छ मैप मोबाइल एप की शुरूआत जिला प्रशासन की ऐतिहासिक पहल है जिस पर कोई भी व्यक्ति कचरा दिखाई देने पर उसकी फोटो खींचकर अपलोड कर सकता है। वह फोटो स्वत: संबंधित अधिकारी के पास चली जाएगी और उसके बाद सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रो में लोगों के एक क्लिक से नगर निगम, नगर परिषद् व नगरपालिका के अधिकारियों को उनके अधिकार क्षेत्र में लगे कचरे के ढेरों के बारे में आसानी से सूचना मिल पाएगी। यह एप ऐंड्रॉड मोबाइल फ़ोन के गूगल प्ले स्टोर या ऐपल में ऐपस्टोर पर ‘स्वच्छ मैप’ के नाम से उपलब्ध है। यह ऐप प्रदेश के 34 शहरों में शुरू हो चुकी है।
स्वच्छ मैप मोबाइल एप की खास बात यह है कि इस मोबाइल एप पर शिकायतकर्ता अपना फीडबैक भी दे सकता है। इस मोबाइल एप में शिकायकर्ता को शिकायत का समाधान होने के बाद दो विकल्प मिलेंगे जिसमें से एक ‘संतुष्ट’ तथा दूसरा ‘संतुष्ट नही’ का है। इस प्रकार, शिकायतकर्ता के  फीडबैक को स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 में महत्व दिया जाएगा और अन्य बिंदुओं के अलावा सर्वेक्षण में फीडबैक  के भी स्कोर होंगे। इस लिहाज से अपने शहर को स्वच्छ बनाने में आम जनता की बहुत बड़ी भूमिका है और उनके फीडबैक से भी शहर को अंक प्राप्त होंगे।
सिंह ने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय मंत्रालय (एमओयूडी) द्वारा ‘स्वच्छता’ नाम से मोबाइल एप भी बनाई गई है और यदि देश की कोई भी नगरपालिका चाहे तो स्वच्छता बनाए रखने के लिए इस मोबाइल एप का भी इस्तेमाल कर सकती है। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम जिला में स्वच्छ मैप मोबाइल एप तथा स्वच्छता मोबाइल एप को इंटीग्रेट कर दिया गया है और स्वच्छ मैप मोबाइल एप पर अपलोड होने वाला सारा डाटा स्वच्छता के पोर्टल पर अपलोड हो रहा है। बाद में इस डाटा का प्रयोग स्वच्छता सर्वेक्षण में किया जाएगा और स्वच्छता के आधार पर शहरों की रैंकिंग की जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि स्वच्छ मैप मोबाइल एप पर फोटो डालना बहुत ही सरल प्रक्रिया है जिसका कोई भी व्यक्ति आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। फोटो अपलोड होने के बाद कचरे की लोकेशन अपने आप ही दिखाई देगी। यह फोटो सम्बंधित वार्ड के सुपरवाईज़र तक पहुँच जाएगी । इसके बाद सुपरवाइज़र की जिम्मेदारी तय की जाएगी कि वो उस जगह की सफ़ाई तय समय में करवाना सुनिश्चित करे। अगर निर्धारित समय सीमा के अंदर सफ़ाई नहीं हुई तो सैनिटेरी इन्स्पेक्टर और नगर निगम के कमीश्नर के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय तक इसकी रिपोर्ट जाएगी।
उपायुक्त ने आम जन से अपील करते हुए कहा कि वे इस मोबाइल एप का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें और अपने घरों के आस-पास कूड़े-क चरे की सूचना इस पर अपलोड करें ताकि शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिला को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी जितनी जिला प्रशासन की है उतनी ही शहर के हर व्यक्ति की भी है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि लोगों के घर के आस-पास साफ-सफाई रहेगी और इस कचरे से होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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