मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास की प्रक्रिया को गति देने में अच्छी सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि सड़क के विकास में असीम सम्भावनाएं हैं। राज्य की तरक्की के लिए आवश्यक है कि नई तकनीक को अपनाया जाए, जो देशकाल व भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल हो। तकनीक का अपनाकर ही संतुलन बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई प्रेक्षागृह, बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में ‘सड़क निर्माण में नवीन तकनीक’ पर आयोजित लखनऊ काॅन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने देश व विदेश से आए वैज्ञानिकों, इंजीनियरों व शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सड़क निर्माण में गुणवत्ता व निर्माण के टिकाऊ होने की दिशा में कार्य करें। साथ ही, उसमें आने वाली लागत में कमी कैसे हो, इस पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि तारकोल के साथ प्लास्टिक का उपयोग कर अच्छी गुणवत्ता की सड़क कम लागत में बनायी जा सकती हैं। उन्होंने साॅलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट पर ध्यान देने की जरूरत भी बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कम लागत में मजबूत और टिकाऊ सड़कों को बनाने के लिए संकल्पित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस काॅन्फ्रेंस के माध्यम से लोक निर्माण विभाग को नयी तकनीक की जानकारी के बारे में जानने का अवसर प्राप्त होगा। इसके अलावा, सड़क निर्माण सम्बन्धी विचार-विमर्श से उच्च कोटि एवं कम लागत की सड़क निर्माण तकनीक के बारे में जानकारी सामने आएगी। उन्होंने कहा कि कम लागत व कम सामग्री से उच्च गुणवत्ता की सड़कों से प्राकृतिक संसाधनों जैसे पत्थर, बालू के साथ बिटुमिन, डीजल आदि के उपयोग में भी कमी आएगी, जिससे राज्य को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ वित्तीय संसाधनों का लाभ भी मिलेगा।

केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने कहा कि वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने लगी है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के विकास के लिए सड़कों का सबसे अधिक योगदान होता है। सड़क निर्माण कर गरीबी मिटायी जा सकती है, क्योंकि भारत गांवों और किसानों का देश है। सड़क के माध्यम से किसानों को अपनी उपज को आसानी से मण्डियों तक पहुंचाने में मदद मिलती है, जिससे उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों के निर्माण के लिए 2 लाख करोड़ रुपये व आरओबी बनाने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की धनराशि राज्य सरकार को दी जाएगी।

गडकरी ने कहा कि देश में लगभग साढे छः लाख गांव हैं, अगर इन ग्रामीण इलाकों को सड़कों से जोड़ दिया जाए तो भारत का जीडीपी 1 लाख 10 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। अब तक 1 लाख 70 हजार गांवों को सड़कों से जोड़ा जा चुका है। कोई देश गरीब या अमीर नहीं होता, बल्कि जिसका विजन जैसा होता है, वह देश वैसा होता है। विकास के लिए जल, ऊर्जा, तकनीक और संचार की जरूरत होती है। जहां भी ये चारों चीज होती है वहां निवेश आता है और गरीबी अपने आप विलुप्त होने लगती है। अमेरिका का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि वहां के लोग अमीर नहीं है बल्कि सड़क अच्छी होने के कारण वे अमीर हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सड़कों में अनुसंधान की आवश्यकता है। अनुसंधान में काफी ताकत होती है। इस काॅन्फ्रेंस के माध्मय से इस लक्ष्य को पाया जा सकता है। जिस प्रकार से पिछले कुछ समय से आॅटो मोबाइल सेक्टर बढ़ रहा है, ऐसे में देश में सड़क निर्माण में भी वृद्धि की आवश्यकता है। इसलिए सड़कें सीमेन्ट और कंक्रीट से बनायी जाए जो काफी लम्बे समय तक खराब नहीं होती हैं। उन्होंने कहा कि सड़क के साथ ही परिवहन के अन्य संसाधनों पर भी काम करने की आवश्यकता है। जल परिवहन आवागमन का सबसे सस्ता साधन है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

कार्यक्रम को सम्बोधित को करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने मात्र 100 दिन में ही 85 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की मदद से राज्य की सड़कों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे आम जनता को आवागमन की अच्छी सुविधा प्राप्त होगी।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी एवं केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा देश-विदेश से आये विशेषज्ञों को सम्मानित करने के साथ ही लोक निर्माण विभाग की स्मारिका का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्रिगण व विभिन्न राज्यों से आये मंत्रिगण सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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