मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य सरकार दिव्यांगजन के सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इस हेतु हर सम्भव प्रयास कर रही है, जिससे दिव्यांगजन जीवन की चुनौती को स्वीकार कर अपनी प्रतिभा से देश और प्रदेश के विकास में सकारात्मक योगदान कर सकें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के सशक्तीकरण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ ही, समाज के लोगों तथा संस्थाओं सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री यहां ‘विश्व दिव्यांग दिवस’ के अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा आयोजित ‘राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह’ में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांगजन सशक्तीकरण के लिए उल्लेखनीय योगदान करने वाले 15 व्यक्तियों और 5 संस्थाओं को पुरस्कृत किया। मुकेश सिंह, भगत सिंह यादव,  दीपक कुमार त्रिपाठी को सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग कर्मचारी का पुरस्कार तथा कुलदीप एवं कोमल जायसवाल को सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी का पुरस्कार दिया गया।
मुख्यमंत्री ने मृदु आर. गोयल, राम सिंह, राजेश कुमार उपाध्याय, राकेश यादव रौशन, धर्मेन्द्र को दिव्यांगजन के लिए प्रेरणास्रोत पुरस्कार, वीरेन्द्र पाल सिंह चैहान को सर्वश्रेष्ठ सृजनशील दिव्यांग वयस्क व्यक्ति, प्रतीक्षा सारकी को सर्वश्रेष्ठ सृजनशील दिव्यांग बालिका, ऋतु सुहास को दिव्यांगजन के जीवन सुधारने के निमित्त सर्वश्रेष्ठ नवीन अनुसंधान, रिशा वर्मा तथा प्रो. योगेश चन्द्र दुबे को दिव्यांगजन के निमित्त कार्यरत सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का पुरस्कार प्रदान किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति, गोरखपुर को दिव्यांगजन हेतु बाधामुक्त वातावरण के सृजन हेतु सर्वश्रेष्ठ कार्य, जनपद लखनऊ को दिव्यांगजन को पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ जिला, राजकीय ब्रेल प्रेस को सर्वश्रेष्ठ बे्रल प्रेस, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, लखनऊ तथा समर्पण, गाजीपुर को दिव्यांगजन के निमित्त कार्यरत सर्वश्रेष्ठ संस्था का पुरस्कार दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन के पुनर्वास हेतु प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी एवं पुनर्वासन योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्तमान सरकार ने अपने 08 माह की अल्प अवधि के कार्यकाल में ही कई महत्वपूर्ण निर्णय लेकर दिव्यांगजन के पुनर्वासन एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्प अवधि में ही राज्य सरकार ने दिव्यांगजन के पुनर्वासन के दृष्टिगत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दिव्यांगजन के पेंशन की धनराशि को 300 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 500 रुपए प्रतिमाह करने, कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण योजना के तहत अनुदान धनराशि की सीमा प्रति दिव्यांग 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 08 हजार रुपए करने, शल्य चिकित्सा की धनराशि 08 हजार रुपए से बढ़ाकर 10 हजार करने, पुरुष एवं महिला, दोनों के दिव्यांग होने की स्थिति में विवाह पर दी जाने वाली धनराशि को 20 हजार रुपए से बढ़ाकर 35 हजार रुपए करने, दिव्यांग छात्र के भोजन के लिए धनराशि को 1,200 रुपए से बढ़ाकर 2,000 रुपए करने तथा परिवहन निगम की बसों में प्रदेश की सीमा के अंतर्गत ही दिव्यांगजन को निःशुल्क यात्रा की उपलब्ध सुविधा को निगम की बसों के अंतिम गंतव्य स्थल तक, चाहे वह राज्य की सीमा के बाहर ही क्यों न हो, बढ़ाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा जीवन का चरम लक्ष्य है। इसलिए सभी धर्म, मत, सम्प्रदाय सेवा को परम धर्म मानते हुए सर्वोच्च स्थान देते हैं। सेवा का कोई विकल्प नहीं है। निष्काम भाव से सेवा को पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने वाले पुण्य के भागी होते हैं। इसे ही परमार्थ कहते हैं। सेवा की सौदेबाजी अथवा व्यापार ही स्वार्थ है और यह प्रायः पतन का कारण होता है। भारतीय परम्परा मनुष्य को प्रतिभा से भरपूर प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति मानती है। मनुष्य के निर्माण में यदि कहीं प्रकृति कोई कमी करती है तो उसकी भरपाई अन्य प्रकार से कर देती है। इसलिए समाज को दिव्यांगजन के प्रति अपना व्यवहार संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के अलावा ऐसे अनेक मानवीय कारण होते हैं, जिनसे दिव्यांगता पैदा होती है। समय पर टीकाकरण कराकर पोलियो से उत्पन्न होने वाली दिव्यांगता से बचा जा सकता है। इसी प्रकार अनेक विषाणुजनित बीमारियों के प्रति समुचित जागरूकता और बचाव के उपायों को अपनाकर भी दिव्यांगता से बचा जा सकता है। इससे हमारी प्रतिभाएं दिव्यांगता की चपेट में आने से बच सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी मनुष्य अयोग्य नहीं होता है, बल्कि प्रत्येक मनुष्य को एक योग्य योजक की आवश्यकता होती है। दिव्यांगजन के मामले में यदि सरकार और अन्य स्वयंसेवी संगठन योजक की भूमिका में काम करें तो अनेक दिव्यांग प्रतिभाएं भी देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिनाइयों को चुनौती के रूप में लेकर प्रयास करने पर सफलता मिलती है और इन्हीं कठिनाइयों को नियति मान लेने पर यह अभिशाप बन जाती हैं। उत्तर प्रदेश की अरुणिमा सिन्हा ने अपनी विकलांगता के बावजूद एवरेस्ट पर फतह प्राप्त की। इसी प्रकार प्रदेश के आईएएस अधिकारी श्री सुहास एल0वाई0 ने एशियन पैरा बैडमिन्टन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इन लोगों ने दिव्यांगता को चुनौती मानकर उसका सामना किया और उन्हें सफलता मिली।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने 05 दिव्यांगजन को कान की मशीन 05 को स्मार्ट केन, 05 को व्हील चेयर तथा 05 को ट्राइसाइकिल एवं बैशाखी, कुल 20 दिव्यांगजन को सहायक उपकरण प्रदान किए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नगरीय विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि दिव्यांगजन के प्रति सहानुभूति आवश्यक है। दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाना समाज का दायित्व है, क्योंकि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस मौके पर अपने सम्बोधन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजन के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

दिव्यांगजन हेतु सामाजिक, शैक्षणिक के साथ, खेलकूद एवं मनोरंजन सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम से सम्मानिम संस्थाओं के कार्य की प्रशंसा करते हुए दिव्यांगजन कल्याण हेतु कार्य कर रही संस्थाओं से आह्वान किया कि वह सभी सरकार के साथ मिलकर दिव्यांगजन के चुनौतीपूर्ण जीवन को सरल बनाने का कार्य करें। कार्यक्रम को समाज कल्याण आयुक्त, चन्द्र प्रकाश तथा प्रमुख सचिव दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग महेश कुमार गुप्ता ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधिगण, शासन-प्रशासन के अधिकारी, बड़ी संख्या में दिव्यांगजन तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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