कला और आस्था के संगम तीन दिवसीय गीता महोत्सव का गुरुग्राम मेें धूमधाम से समापन किया गया जिसमें सोहना के विधायक तेजपाल तंवर मुख्य अतिथि थे। समापन अवसर पर श्रीमद्भगवदगीता के 18 श्लोकों के उच्चारण से गूंज उठा स्वतंत्रता सेनानी जिला परिषद् भवन और पूरा वातावरण गीतामयी हो गया।
इस वैश्विक अष्टादश श्लोकों भगवद् गीता के उच्चारण में महाभारत काल के गुरु द्रोण की नगरी गुरुग्राम भी शामिल हुआ। स्वतंत्रता सेनानी जिला परिषद् भवन में सैंकड़ो लोगों ने एक साथ गीता के 18 श्लोकों का उच्चारण किया। इससे सभी लोगों ने कत्र्तव्यनिष्ठा, शान्ति एवं सद्भाव की प्रेरणा ली। मंच संचालिका डीएसडी राजकीय महाविद्यालय की प्राध्यापक डा. मीनाषी पाठक ने ठीक दोपहर 12 बजे एक के बाद श्रीमदभगवद गीता के श्लोकों का उच्चारण किया और उनके पीछे पीछे भवन मे उपस्थित सभी लोग उच्चारण करते रहे।
इसके पश्चात् समापन समारोह के मुख्य अतिथि विधायक तेजपाल तंवर ने स्वतंत्रता सेनानी जिला परिषद् भवन के सामने से हरी झंडी दिखाकर गीता पर आधारित शोभा यात्रा को रवाना किया। शोभा यात्रा में मंदिरों, स्कूलों, धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं द्वारा तैयार की गई झांकियां प्रदर्शित की गई। यह शोभा यात्रा स्वतंत्रता सेनानी जिला परिषद् भवन से शुरू होकर मोर चौंक-अग्रवाल धर्मशाला-गुरुद्वारा रोड़-जेल रोड़-भूतेश्वर मंदिर-पटौदी चौंक-न्यू कॉलोनी तिकोना पार्क-सांई मंदिर होते हुए गीता भवन पर संपन्न हुई जहां पर यात्रा में शामिल सभी लोगों के लिए प्रसाद व जलपान की व्यवस्था गीता भवन मंदिर द्वारा की गई थी। शहर के विभिन्न हिस्सो से गुजरते समय शोभा यात्रा को देखने के लिए काफी संख्या में लोग सडक़ों पर उमड़ पड़े। विधायक तेजपाल तंवर ने जीओ गीता द्वारा तैयार की गई गीता जी की पालकी में चढक़र श्रीमद् भगवद् गीता का माल्यार्पण किया और उपस्थित लोगों को प्रसाद बांटा। इस्कॉन, गीता भवन तथा कृपाल सेवा समिति की झांकी भी लोगों में आकर्षण का केन्द्र रही।
इस अवसर पर सोहना के विधायक तेजपाल तंवर ने कहा कि गीता का ज्ञान घर-घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से गीता महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि लोग गीता के सार के महत्व को समझते हुए इसके संदेश को अपने जीवन में धारण करे। आज हमारी युवा पीढ़ी वेदो-शास्त्रों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ रही है जोकि गलत है। गीता का ज्ञान किसी धर्म विशेष का ही नही है बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए भगवान का दिव्य संदेश है। उन्होंने कहा कि गीता पर बहुत से शोध हुए हैं। महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला जिसके 18 अध्याय लिखे गए है। जब महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने युद्ध करने से मना कर दिया तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें गीता का उपदेश दिया कि यह युद्ध अधर्म के खिलाफ धर्म की लड़ाई है जिसके बाद अर्जुन ने अपना गांडिव उठाया और धर्म की रक्षा के लिए युद्ध लड़ा।
उन्होंने कहा कि भारत अनेकता में एकता का देश है। यहां संतो व महापुरूषों ने जन्म लिया लेकिन अब लोग हमारी उसी संस्कृति को भूलते जा रहे है जिसकी वजह से भारत की पहचान थी। वेद-शास्त्र हमें अपने से बड़ों का सम्मान करने के साथ साथ गुरु व शिष्य के पावन रिश्ते को निभाना सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि गीता महोत्सव के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कारो से जोडऩे का प्रयास किया गया है। उन्होनें कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने घरों में भी बच्चों को सांस्कृतिक विरासत के बारे में बताएं ताकि वे भविष्य में एक अच्छे व जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि गीता में जीवन जीने की कला संबंधी महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया गया जिसकी जानकारी बच्चों को होनी बहुत जरूरी है तभी हमारा राष्ट्र प्रगति कर सकता है।
इस अवसर पर उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने विधायक की बात का समर्थन करते हुए कहा कि आज हम कही ना कहीं अपनी सांस्कृतिक विरासत को भूलते जा रहे हैं,ऐसे में गीता महोत्सव के इस भव्य आयोजन ने रिवर्स गियर लगाते हुए हमेें अपनी संस्कृति से रूबरू करवाया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश किसी संत महात्मा को नही अपितु एक योद्धा को दिया था। उन्होंने कहा कि यदि हम गीता को पढ़े तो ये हमें हर समस्या का समाधान करना सिखाती है। उन्होंने अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी यादों को ताजा करते हुए कहा कि एक बार जब उन्हें मुस्लिम बाहुल्य वाले इंडोनेशिया की राजधानी जकारता जाने का मौका मिला तो उन्होंने वहां भगवान श्रीकृष्ण व अर्जुन की गीता का उपदेश देते हुए चित्र देखकर हैरानी हुई। इतना ही नहीं, अन्य देवी-देवता जैसे राम-सीता, हनुमान के नाम पर बनाए गए शॉपिंग कॉम्पलैक्स भी देखने को मिले जिससे ये स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। आज उस संस्कृति से दूसरे देश जुड़ रहे हैं जबकि इस संस्कृति का जन्म स्थान हमारा भारतवर्ष इससे दूर होता जा रहा है। हमें अपनी संस्कृति को अपनाने में झिझक महसूस करने की बजाय इसे खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए और अपने बच्चों में भी ये संस्कार पैदा करने चाहिए।
इस अवसर पर विधायक तथा उपायुक्त ने गीता महोत्सव में अपना सहयोग देने वाली संस्थाओं को प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व विधायक ने महोत्सव में लगाई गई प्रदर्शनी की स्टॉलो का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर नगराधीश मनीषा शर्मा, श्री माता शीतला देवी पूजा स्थल बोर्ड की सदस्य अन्नु यादव, भाजपा प्रदेश सह-प्रवक्ता सतप्रकाश जरावता सहित कई अधिकारीगण उपस्थित थे।
Sandeep Siddhartha, Senior Reporter

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