प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, सिद्धार्थ सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों को कम समय में सुविधाजनक तरीके से चिकित्सा सेवाएं मुहैया करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए पायलेट प्रोजेक्ट के तहत 51 चिकित्सालयों को अपग्रेड किये जाने के साथ ही इन चिकित्सालयों में 109 प्रकार की गतिविधियों को नया रूप दिया जा रहा है। इस सुविधा से जल्द ही मरीज साफ-सुथरे और सुरक्षित वातावरण में अपने मन चाहे चिकित्सक से इलाज भी करा सकेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री उप्र हेल्थ सिस्टम्स स्ट्रेन्थनिंग परियोजना के सभागार में 51 चिकित्सालयों के उच्चीकरण संबंधी कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चिकित्सालयों के अपग्रेड का कार्य तय समय सीमा में पूर्ण होना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही एवं शिथिलता नहीं बरती जानी चाहिए।

सिंह ने कहा कि जिन चिकित्सालयों को इस योजना में शामिल किया गया है, वहां ओपीडी एंव आपातकालीन सेवाओं में मूलभूत सुधार के साथ ही अस्पताल के पूरे स्ट्रक्चर में बदलाव किया जा रहा है। अस्पताल में होने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों पर बारीकी से अध्ययन किया गया है और मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर इसको नया स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। इन अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों के बैठने, शुद्धपेयजल, वातानुकूलित सुविधा के साथ ही साफ-सफाई पर विशेष बल दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि अस्पताल परिसर में वृक्षारोपरण, लान्ड्री मैनेजमेंट तथा वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य बेहतर तरीके से होना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वृक्षारोपण के लिए वन विभाग का भी सहयोग लिया जाय।
प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, श्री प्रशांत त्रिवेदी ने स्वास्थ्य मंत्री को आवश्वस्त किया कि सभी 51 चिकित्सालयों के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है। इनमें से कई चिकित्सालयों में लांड्री मैनेजमेंट का कार्य शुरू हो चुका है। इसके अतिरिक्त नर्सिंग स्टेशन भी तैयार कराया जा रहा है। सभी कार्य तय समय सीमा में पूर्ण कराने के लिए कैलेन्डर भी बनाया गया है।

बैठक में सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वी0हेकाली झिमोमी ने स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया कि जिला चिकित्सालयों में ई-हास्पिटल का क्रियान्वयन, मानव-संसाधन तथा जैव चिकित्सीय उपकरणों की आपूर्ति, फेसलिफ्टिंग तथा फेसिलिटी, ब्रान्डिग आदि सुधार सम्मलित है। इसके लिए विश्व बैंक की मदद ली जा रही है। उन्होंने बताया कि नवीनतम् तकनीकी का प्रयोग कर ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।

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