विश्व विख्यात इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मिरोस्लाव फेरेंस, जो कि यूरोप के जर्मनी के जाने माने ह्रदय रोग विशेषज्ञ हैं, उन्होंने प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया, साथ में यशोदा हॉस्पिटल के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ अलोक सहगल, डॉ रजत अरोरा एवं गाजियाबाद शहर के जाने माने फिजिशियन डॉ. आशुतोष मोहन भी मौजूद थे

डॉ. मिरोस्लाव फेरेंस जो कि यूनिवर्सिटी हार्ट सेण्टर बड करोजिंगें, जर्मनी, यूरोप के हेड ऑफ़ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट हैं उन्होंने कहा कि हम बहुत ही जल्द यशोदा हॉस्पिटल को ह्रदय के वाल्व को बिना चीर फाड़ के पैर में बहुत ही छोटे से चीरे से बदलने की सर्जरी के लिए तैयार कर रहे हैं तथा इस विधि को टावी (TAVI) कहा जाता है, इसी क्रम में वो यशोदा हॉस्पिटल पधारें हैं तथा यहाँ के डॉक्टर्स को इसके लिए प्रशिक्षित भी किया हैI
डॉ फेरेंस ने कहा कि टावी विधि उन मरीजों के लिए बहुत कारगर है जो ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा अपने ह्रदय का वाल्व नहीं चेंज करा सकते I
साथ ही उन्होंने कहा भारत में ह्रदय रोगों का विस्फोट हो चुका है तथा भारत के लोगो में पाया जाने वाला ह्रदय रोग जर्मनी की तुलना में बहुत घातक है. उन्होंने बताया कि जर्मनी के लोगो में ह्रदय की नसों में मामूली या एक ही नली में छोटी रुकावट पायी जाती है जब कि भारतीयों में यह रूकावट अमूमन जब पकड़ी जाती है तो २-३ नलियों में होते है तथा यह रुकावट लम्बी होती है तथा कई जगह होती है, इस प्रकार की रुकावटों को एंजियोप्लास्टी के माध्यम से खोलने के लिए उन्नत तकनीकों जैसे कि IVUS आइवस, जिसमें अल्ट्रासाउंड के माध्यम से ब्लॉकेज के प्रकार की जांच की जाती है तथा OCT ओ.सी.टी., जिसमें कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी के माध्यम से ब्लॉकेज के प्रकार की जांच की जाती है, यह दोनों ही उपकरण यशोदा हॉस्पिटल में लगा दिए गए है तथा उनकी इस विजिट के दौरान उन्होंने इसे चेक भी कर लिया है तथा यशोदा हॉस्पिटल के डॉक्टरों एवं स्टाफ को इसका प्रशिक्षण भी दे दिया गया है

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