मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि नाबार्ड सहायतित परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए, जिससे परियोजनाएं लम्बित न हांे और उनकी अनावश्यक लागत भी न बढ़े। नाबार्ड सहायतित परियोजनाओं के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने में तेजी लाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि परियोजना की स्वीकृति से सम्बन्धित कार्यवाही में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। किसी भी परियोजना के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी।

नाबार्ड के चेयरमैन डाॅ. हर्ष कुमार भानवाला के साथ एक बैठक में मुख्यमंत्री ने यह निर्देश प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए। डाॅ. भानवाला का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास में रूचि लेने के लिए उनका आभार प्रकट किया। नाबार्ड और प्रदेश सरकार के बीच में बेहतर संवाद की आवश्यकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नाबार्ड अध्यक्ष का यहां आना प्रदेश के विकास के लिए सकारात्मक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास की अपार सम्भावनाएं हैं। इन सम्भावनाओं को साकार करने के लिए धन की आवश्यकता है। प्रदेश की प्रगति में ग्रामीण क्षेत्र मंे बुनियादी ढ़ांचे के विकास और सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने नाबार्ड से 10 हजार करोड़ रुपए की मांग करते हुए धनराशि को वापस करने का भरोसा भी दिलाया।

बैठक में सिंचाई, लघु सिंचाई, कृषि, पशुपालन, सहकारिता, ग्राम्य विकास आदि विभागों की नाबार्ड सहायतित नवीन और लम्बित परियोजनाओं पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नाबार्ड के साथ बेहतर तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विभागीय मंत्री द्वारा नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की जाए। इस मौके पर नाबार्ड चेयरमैन ने कहा कि उचित प्रक्रिया के पालन के साथ प्राप्त होने वाली परियोजनाएं नाबार्ड के स्तर पर एक सप्ताह से अधिक समय तक लम्बित नहीं रहेंगी।

नाबार्ड अध्यक्ष द्वारा पूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन के प्रसार और भण्डारण क्षमता बढ़ाने से सम्बन्धित नाबार्ड की निधियों के बारे में जानकारी देने पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि माइक्रो इरिगेशन विधियां यथा ड्रिप सिंचाई पद्धति तथा स्प्रिंक्लर पद्धति प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र और डार्क ज़ोन्स के लिए बहुत उपयोगी हंै। प्रदेश में भण्डारण क्षमता को 40 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 60 लाख मीट्रिक टन किए जाने की आवश्यकता है। अधिक भण्डारण क्षमता किसानों के हित में है। प्रत्येक जनपद में कम से कम 50 हजार मीट्रिक टन की भण्डारण क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को माइक्रो इरिगेशन तथा भण्डारण क्षमता बढ़ाने के सम्बन्ध में योजना बनाने के निर्देश दिए।

प्रदेश में सहकारिता की संरचना एवं भूमि विकास बैंक के सम्बन्ध में नाबार्ड अध्यक्ष के सुझावों पर मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को भूमि विकास बैंक के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके रिकवरी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में किसानों की पूंजी लगी होती है। इन संस्थाओं में धोखाधड़ी एवं गबन आदि की घटनाओं को रोके जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सहकारी संस्थाओं में हुए घोटालों एवं गबन के मामलों की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

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