मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जीवन जीवन्तता का नाम है, इसमें निराशा, नकारात्मक सोच के लिए स्थान नहीं होना चाहिए। संस्कृति वही है जो जीवन्त बनी रहती है। साधु, संन्यासियों ने सदैव समाज को जोड़ने व जागरूक करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री जनपद कानपुर देहात के मूसानगर स्थित अखण्ड परमधाम मंदिर में स्वामी अच्युतानन्द शास्त्री जी महाराज के 25वें निर्वाण दिवस पर आयोजित 7 दिवसीय धार्मिक कथा एवं भक्ति योग सन्त सम्मेलन के समापन अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने स्वामी जी के चित्र व मंदिर में स्थापित उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी अच्युतानन्द जी के जीवन दर्शन एवं सिद्धांतों को अपनाकर गरीबों के उत्थान के लिए प्रभावी ढंग से कार्य किया जा सकता है। समाज को जोड़ने व उसको आगे बढ़ाने का कार्य स्वामी अच्युतानन्द जी ने बखूबी किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में मानवीय मूल्यांे की सुरक्षा एवं संवर्धन के लिए सन्तांे, बुजुर्गों, महापुरुषों आदि के विचारों व क्रियाकलापों को आत्मसात किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म की परिभाषा व्यापक है। सामान्यजन के लिए भी इसे समझना आवश्यक है। धर्म कर्तव्य, सदाचार, नैतिक मूल्य को बढ़ाने व उसका पालन करने हेतु प्रेरित करता है। धर्म जीवन को जीवन्त बनाता है व भाईचारे को बढ़ाने का संदेश देता है। धर्म एक ही है, जो कि मानव धर्म है। उन्होंने कहा कि धर्म हमें स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा करने की सीख भी देता है।

इस मौके पर केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि अज्ञानता के कारण मनुष्य अचिन्त्य चिन्तन करके मानवता से दूर होता जा रहा हैै। मनुष्य में प्रज्ञा, विवेकशीलता, संवेदनशीलता के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ने व उसकी समस्याओं के निराकरण का भाव होना चाहिए।

इस अवसर पर कृषि राज्यमंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह (धुन्नी सिंह) व कारागार राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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