‘निर्मल हिंडन नदी’ योजना के नोडल अधिकारी एवं मण्डलायुक्त डा. प्रभात कुमार व मण्डलायुक्त सहारनपुर दीपक अग्रवाल ने संयुक्त रूप में कहा कि हिडंन के जल को निर्मल करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बिना आम सहभागिता के इस कार्य को पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंडन की सहायक काली नदी का जल भी अत्यंत प्रदूषित हो गया है जिसे निर्मल बनाया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अब हिंडन व उसकी सहायक नदियों में गंदा पानी नहीं डालने दिया जायेंगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे हिंडन व उसकी सहायक काली नदी पर किये गये अतिक्रमण को चिन्हित कर तत्काल प्रभावी कार्यवाही करते हुए उन्हें हटवाया जाना सुनिशिचत करें। डा. प्रभात कुमार व दीपक अग्रवाल ने देवबंद तहसील के भनेड़ा खास से 300 मीटर दूर काली पश्चिम नदी में 100 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के अवसर पर यह बात कही।
उन्होंने सिंचाई विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिये कि वे सहारनपुर जनपद में हिंडन व उसकी सहायक नदियों में हुए अतिक्रमण के को हटवायें तथा गंदा पानी डाले जाने वाले स्थलों का चिन्हित कर, ऐसे उपायें करें कि नदी में गंदा पानी ना डाला जा सकें।
उन्होंने पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि औद्योगि अपशिष्ट डालने वाली इकाईयों को चिन्हित कर उनकों सुसंगत धाराओं में नोटिस जारी किये जाये। गौरतलब है कि काली नदी पश्चिम सहारनुपर जिले में शिवालिक से 25 किमी दक्षिण से निकलकर दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिण की ओर सहारनपुर तथा मुजफ्फरनगर जिलों में बहती है। मेरठ जिले की उत्तरी सीमा पर यह हिंडन नदी में समा जाती हैं।
हिंडन नदी उत्तरी भारत में यमुना नदी की एक सहायक नदी के रूप में जानी जाती है। यह निचले हिमालय क्षेत्र के ऊपरी शिवालिक पर्वतमाला में स्थित है। हिडंन नदी के उदगम स्थल से लेकर उसके टेल क्षेत्र तक पड़ने वाले सभी स्थानों पर अवैध अतिक्रमण ओर नदी में पड़ने वाले गंदे नालों को पानी तथा औद्योगिक अपशिष्ट को नदी में गिराये जाने से रोकने की कार्ययोजना बनाये जाने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की जा रही है।
नोडल अधिकारी डा. प्रभात कुमार ने कहा कि वर्षा ऋतु में हिंडन नदी लगभग जलविहीन रहती है। जो सभी के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नदी में लगातार नदी में औद्योगिक अपशिष्ट व पूजन सामग्री आदि डाले जाने से उसमें घुलित ऑक्सीजन की मात्रा दो से तीन मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई है। इसका पानी पीने लायक नहीं है। इससे प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि जलीय प्राणियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।
उन्होंने कहा कि काली पश्चिम नदी का जल अत्यंत ही प्रदूषित होने के कारण मानव जीवन के लिए खतरा हो सकता है। इसमें ऑक्सीजन की मात्रा लगातार घटती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्मल हिंडन नदी योजना की शुरूआत की गयी है। इसके लिए इस क्षेत्र में गंदगी व अतिक्रमण वाले स्थानों को चिन्हित कर आवश्यक कदम उठाये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज जन सहभागिता से ही हिंडन को निर्मल किया जा सकता है।
हिंडन नदी और इसका बेसिन क्षेत्र 7,083 वर्ग कि॰ मी॰ है। यह गंगा और यमुना नदियों के बीच लगभग 400 कि॰ मी॰ की लम्बाई में जनपद सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबु़नगर नोएडा, ग्रेटर नोएडा से निकलते हुए दिल्ली से कुछ दूरी पर यमुना मिल जाती है। हिंडन नदी महानगर की पहचान मानी जाने वाली नदी का अस्तित्व खतरे में है। ऐसे में हिंडन नदी व उसकी सहायक काली पश्चिम नदी अब केवल शोध करने तक ही सीमित रह गई है।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी देवबंद राम विलास यादव, सिंचाई विभाग के ड्रेनेज मण्डल गाजियाबाद के अधीक्षण अभियंता एच.एन.सिंह, पूर्वी यमुना अपर खण्ड के अधिशासी अभियंता ए.पी.सिंह, समान्नातर देवबंद शाखा खण्ड रूड़की रजनीश कुमार गौतम सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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