मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सचिवालय में ई-आॅफिस प्रणाली की शुरुआत होने से शासकीय कार्यों एवं निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता आने के साथ ही कार्मिकों की जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की इस व्यवस्था से जहां डाटा सुरक्षा एवं इसके एकत्रीकरण में सुविधा होगी, वहीं सरकारी कार्य संस्कृति में सुधार होने से इसका सीधा लाभ प्रदेश की जनता को मिलेगा।
मुख्यमंत्री विधान भवन के तिलक हाॅल में उत्तर प्रदेश सचिवालय में ई-आॅफिस प्रणाली के शुभारम्भ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सचिवालय में 94 विभागों में से प्रथम चरण में 20 विभागों के साथ-साथ मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव कार्यालय में भी यह व्यवस्था आज से कार्य करना शुरू कर देगी। उन्होंने निर्देशित किया कि 31 दिसम्बर, 2017 तक सचिवालय के शेष विभागों को भी इस व्यवस्था से जोड़ना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने 01 जनवरी, 2018 से सभी विभागाध्यक्ष कार्यालयों को भी इस प्रणाली के तहत कार्य शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि 01 अप्रैल, 2018 से जिला मुख्यालयों को भी ई-आॅफिस प्रणाली के तहत कार्य संचालन के लिए गम्भीरता से प्रयास किया जाए।
ई-आॅफिस प्रणाली को राज्य सरकार का बड़ा कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश की 22 करोड़ जनता लाभान्वित होगी। पत्रावलियों पर तेजी से निर्णय लिया जा सकेगा। अधीनस्थ अनुभागों एवं प्रकोष्ठों में कार्य करने का बेहतर वातावरण मिलेगा। राज्य सरकार के इस कदम से पर्यावरण को भी लाभ होगा, क्योंकि प्रत्येक 2 वर्ष में पत्रावलियों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही, प्रत्येक कार्यालय में कागजों के उपयोग में प्रतिवर्ष वृद्धि होने के साथ ही, लगभग साढ़े तीन वर्ष में इसकी आवश्यकता दोगुनी हो जाती है, जबकि लगभग 12,500 पेपर शीट तैयार करने के लिए एक बड़े वृक्ष को काटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ई-आॅफिस प्रणाली से पेपर शीट की उपयोगिता काफी हद तक नियंत्रित हो जाएगी।
शीघ्र ही, पूरे प्रदेश में सिटीजन चार्टर लागू करने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के लिए पत्रावलियों का त्वरित निस्तारण, जनता के प्रति जवाबदेही एवं फाइलों पर तेजी से निर्णय लेने के लिए ई-आॅफिस से बेहतर और कोई व्यवस्था नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी शासन एवं प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने एवं प्रत्येक स्तर पर निर्णयकर्ता की जवाबदेही तय करने के लिए प्रयासरत हैं। ई-आॅफिस साॅफ्टवेयर केन्द्र सरकार द्वारा नेशनल ई-गवर्नेन्स प्लान के अंतर्गत एनआईसी द्वारा विकसित किया गया है। यह साॅफ्टवेयर केन्द्र सरकार व अन्य कुछ राज्यों में सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार, एनआईसी द्वारा विकसित इस व्यवस्था को तत्परता के साथ सचिवालय, विभागाध्यक्ष के साथ-साथ जिला मुख्यालयों तक लागू करने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन 20 विभागों एवं 2 कार्यालयों में ई-आॅफिस प्रणाली लागू की जा रही है, वहां के कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रारम्भ में कर्मचारियों एवं अधिकारियों को इस व्यवस्था को अपनाने में असहजता का अनुभव होगा, लेकिन धीरे-धीरे पूरा तंत्र ई-आॅफिस प्रणाली के तहत कार्य करने में अभ्यस्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले नौकरशाही पर विभिन्न निर्णयों को पत्रावलियों के मकड़जाल में उलझाने का आरोप लगता रहा है। नई व्यवस्था से उनकी छवि में सुधार होगा, क्योंकि ई-आॅफिस प्रणाली से निर्णय टालने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। इस व्यवस्था से अधीनस्थ कर्मचारियों को पत्रावलियों के रख-रखाव से निजात मिलने के साथ-साथ उनको ढूंढने के लिए लगने वाले श्रम एवं समय से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि पुरानी पत्रावलियों का शीघ्रता से डिजिटलाइजेशन कराया जाए, जिससे पुराने निर्णयों को भी आॅनलाइन देखने एवं समझने की सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक तकनीक के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शासन एवं प्रशासन की दक्षता में वृद्धि एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा भ्रष्टाचार को समाप्त कर पारदर्शी निर्णय लेने के लिए कई कदम उठाए हैं। सभी विभागों में ई-टेण्डरिंग की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा विकसित ‘जेम’ पोर्टल के तहत राज्य सरकार द्वारा थोड़े समय में ही जो कार्य किया गया है, उससे अन्य प्रदेश सरकारें भी अवगत होना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि सचिवालय को ई-आॅफिस प्रणाली से जोड़ने के लिए लगभग 57 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा ई-आॅफिस प्रणाली अपनाने से जनता के लिए संचालित विकास कार्यों एवं कल्याणकारी योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा कराने एवं सही व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार योजनाओं के सफल संचालन एवं भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए अद्यतन तकनीक अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। इस मौके मुख्यमंत्री जी ने ई-आॅफिस प्रणाली के माध्यम से पहला पत्र मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों को प्रेषित करते हुए प्रणाली का शुभारम्भ किया।

प्रथम चरण में जिन विभागों में ई-आॅफिस प्रणाली लागू की गई है, उनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग, नागरिक उड्डयन, पर्यावरण, आबकारी, सूचना, भूतत्व एवं खनिजकर्म, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, ग्रामीण अभियन्त्रण, होमगार्ड, आईटी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स, संस्कृति, निर्वाचन, मत्स्य, कार्यक्रम क्रियान्वयन, खेलकूद, सार्वजनिक उद्यम, युवा कल्याण, दुग्ध विकास, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा लघु सिंचाई विभाग शामिल हैं। इनके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय एवं मुख्य सचिव कार्यालय में भी यह व्यवस्था आज से प्रभावी हो जाएगी।
मुख्य सचिव राजीव कुमार ने कहा कि शासन-प्रशासन में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से उत्तर प्रदेश के प्रति देश एवं दुनिया में लोगों की धारणा में तेजी से परिवर्तन हो रहा है।
प्रमुख सचिव, सचिवालय प्रशासन महेश कुमार गुप्ता ने योजना के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं डाॅ0 दिनेश शर्मा सहित अन्य मंत्रिगण एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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