राजभर ने सीतापुर रोड, लखनऊ स्थित केन्द्रीय नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान के निरीक्षण के दौरान निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण संस्थान लगभग 37 एकड़ भूमि पर स्थित है जिसका प्रशिक्षण एवं अन्य कार्यों हेतु सदुपयोग किया जा सकता है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सन् 1962 में स्थापित होने के बाद से यह प्रशिक्षण संस्थान उपेक्षा का शिकार रहा है।
निरीक्षण के दौरान नीलगायों का झुण्ड परिसर में घुमते हुए पाया गया। अधिकारियों ने राजभर को बताया कि यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि यहां विषैले साँप एवं अन्य जहरीले जन्तु घूमते हुए पाए जाते हैं जो कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरनाक है। परिसर के चारो ओर सीसीटीवी कैमरा, पैरामीटर बाउण्ड्रीवाल, रोड एवं संस्थान परिसर के मुख्य द्वार पर गार्ड कक्ष बनवाये जाने की आवश्यकता है जिससे सुरक्षा में लगे गार्ड परिसर का निरीक्षण कर सके एवं अराजक तत्वों पर रोक लग सके।
अनिल राजभर ने कहा कि इस संस्थान में सन 1998 तक राष्ट्रीय स्तर का विभिन्न आयोजन हुआ करता था लेकिन वर्तमान में सुविधाओं की कमी के कारण इस प्रकार के आयोजन अब नहीं होते। उन्होंने कहा कि संस्थान पर स्थित गेस्ट हाउस क्लासरूम एवं मेस में फर्नीचर एवं अन्य साज-सज्जा की उपलब्धता न होने के कारण इनका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों हेतु आवासीय सुविधा उपलब्ध है परन्तु वह भी दयनीय अवस्था में है। इसके अलावा प्रशिक्षणार्थियों हेतु 20 कक्षीय छात्रावास की आवश्यकता है। वर्तमान छात्रावास जर्जर एवं दीमकग्रस्त है तथा मनोरंजन कक्ष आदि भी उपलब्ध नहीं है।
राजभर ने कहा कि संस्थान पर व्याख्यान कक्ष को आधुनिक बनाए जाने, नष्ट हो चुके बैडमिण्टन एवं बालीबाॅल कोर्ट के नवनिर्माण एवं प्रशिक्षण हेतु नए उपकरणों को खरीदे जाने की आवश्यकता है। विशेष प्रशिक्षण हेतु पी.ए.सी. होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा के सदस्यों का चयन करते हुए एन.सी.डी.ए. नागपुर के पाठ्यक्रम के अनुरूप 21 दिवसीय प्रशिक्षण चलाए जाने की आवश्यकता है जिससे प्राकृतिक आपदाओं के समय जनमानस को बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि संस्थान में बेहतर साफ-सफाई की आवश्यकता है।
निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक नागरिक सुरक्षा, सत्येन्द्र कुमार कौल, प्रभारी कमाण्डेण्ट, जयराम तोमर, सहायक उपनियन्त्रक, राकेश मिश्रा, सुमित मौर्या एवं योगेश कुमार उपस्थित रहे।

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