पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्राम प्रधानों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ-साथ गांव के सम्पूर्ण विकास में भी उनका महत्वूपर्ण योगदान है। ग्राम प्रधान एकजुट होकर अपने गांव को शौच से मुक्त कराने के लिए इस कार्यक्रम को जन आन्दोलन के रूप में संचालित करें। यह उद्बोधन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब द्वारा नगर के डीएम रोड स्थित स्नेहा गार्डन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पंचायत प्रतिनिधियों की एक दिवसीय स्वच्छता उन्मुखीकरण कार्यशाला में उपस्थित जनपद की 951 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि भयंकर बीमारियों एवं बहू-मातायें, बहन एवं बेटियों की इज्जत के लिए प्रत्येक गांव में शौचालय का निर्माण कराकर गांव को शौच से मुक्त करायें। उन्होंने संबोधन में कहा कि देश के आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था के अन्तर्गत पंचायतीराज विभाग की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और विकास का केन्द्र गांव है। गांव की जनता एवं सरकार ग्राम प्रधानों से बहुत अपेक्षायें रखती है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की जितनी भी योजनायें है उन्हें गांव तक पहुंचाने एवं पात्रों को लाभान्वित करने की पूर्ण जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों के कंधों पर है और इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त धनराशि ग्राम प्रधानों को उपलब्ध करायी जाती है। उन्होंने कहा कि गांव में प्रत्येक घर में शौचालय बनाना ही स्वच्छता की इतिश्री नहीं कहा जा सकता इसके लिए पूरे गांव में प्रत्येक प्रकार की गंदगी को दूर करने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान सहित गांव के वासियों की भी है।
उन्होंने कहा कि गांव में गोबर एवं नालियों में सिल्ट का इकट्ठा होना भी गंदगी को जन्म देता है, अतः सभी ग्राम प्रधान अपने गांव के प्रत्येक घर में शौचालयों का निर्माण कराकर अपने गांव को ओडीएफ की श्रेणी में लाये। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से गरीब एवं असहायों को शौचालय बनवाने के लिए धनराशि दी जाती है और यह लाभ पात्रों को आवश्यक रूप से मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह जानती है कि यदि इस जनपद के ग्राम प्रधान यह संकल्प लें कि प्रत्येक गांव के प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण कराया जाना है तो प्रत्येक दशा में ग्राम प्रधान जिस रूप में ग्राम प्रधान का चुनाव जितते है उसी ताकत से गांव की खुशहाली के लिए शौचालयों का निर्माण जन आन्दोलन के रूप में अपनाकर करायें।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जनपद में अभी तक 164 गांव ओडीएफ हुए है और मार्च 2018 तक सम्पूर्ण जनपद को ओडीएफ ग्राम प्रधानों के सहयोग से किया जाना है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान उनकी अपील पर विशेष ध्यान देते हुए इस कार्य को पूरी शक्ति के साथ पूरा करेंगे। उन्होंने अपने गृह प्रदेश केरल का उदारहण देते हुए कहा कि पूरा राज्य एवं सम्पूर्ण गांव शौच से मुक्त है।

इससे पूर्व जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुनिराज जी. एवं मुख्य विकास अधिकारी जसजीत कौर ने द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर तीनों अधिकारियों द्वारा 107 ग्राम के महिला एवं पुरूष प्रधानों को जिनके द्वारा अपने गांव को ओडीएफ कराया गया है, को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए सम्मानित किया। जिलाधिकारी द्वारा ओडीएफ कराने वाले खण्ड विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, सफाईकर्मी एवं स्वच्छाग्राहियों को भी स्मृति चिन्ह देते हुए पुरूस्कृत किया।
इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुनिराज जी. ने अपने संबोधन में कहा कि अपने घर की महिलाओं एवं बेटियों के साथ जघन्य एवं छेड़छाड़ की घटनाओं पर रोक लगाने तथा कानून व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए अपने घरों में शौचालयों का निर्माण करायें।
मुख्य विकास अधिकारी, जसजीत कौर द्वारा अपने संबोधन में कहा कि ग्राम प्रधान जागरूक रहकर इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए अपने गांव एवं जनपद को 31 मार्च 2018 से पूर्व ओडीएफ करायें। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण कराये जाने की छोटी-छोटी तकनीकियों एवं अन्य जानकारियों के लिए छोटे स्तर पर भी कार्यशालायें आयोजित कर कार्य को प्रगति पर लाया जायेगा।
जिला पंचायत राज अधिकारी, अमरजीत सिंह ने ओडीएफ गांव की जानकारी देते हुए कहा कि सभी ग्राम प्रधान अपने गांव को ओडीएफ करायें और जनपद का नाम प्रदेश में रोशन करें। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम प्रधानों द्वारा अपने गांव को ओडीएफ कराया गया है उन्हें सम्मान के रूप में इस कार्यशाला में जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया है एवं भविष्य में ओडीएफ कराने वाले प्रधानों को विभिन्न पटलों पर सम्मानित किया जायेगा।

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