गुरुग्राम के वन मजदूरों ने वन एवं पर्यावरण को बचाने के लिए तथा अपनी लंबित मांगों व मुद्दों को लेकर लघु सचिवालय पर धरना व प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मजदूर यूनियन के ज़िला प्रधान सरपंच दया राम ने तथा संचालन राज्य के उपाध्यक्ष आज़ाद सिंह किया। प्रदेश में वन क्षेत्र अनेक कारणों से लगातार घट रहा है। वनीकरण पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रमुख घटक हैं। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण जलवायु परिवर्तन सहित अनेको प्राकृतिक आपदायें प्राणी जगत के लिए चुनौती बनकर उभर रही है। प्रदेश में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन विभाग का गठन किया गया था, परन्तु विभाग के दो पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिवों सर्व आर.आर. जोवल, भा.प्र.से. व एस.के. गुलाटी, भा.प्र.से. द्वारा अपने कार्यकाल में जो निर्णय विभाग के बारे में लिये गये, उन निर्णयों से विभाग में अव्यवस्था का वातावरण उत्पन्न हो गया व विभाग के गठन के लिए निर्धारित लक्ष्यों व उद्देश्यों की पूर्ति करने में विभाग असहाय व असमर्थ हो रहा हैं।

वर्ष 2017-18 के लिए निर्धारित पौधारोपण का लक्ष्य भी 31 अगस्त 2017 तक 30 प्रतिशत ही प्राप्त किया गया है। सामुदायिक वानिकी परियोजना, हर घर हरियाली व हर गांव पेड़ों की छांव योजनाओं के तहत 10 प्रतिशत का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है, जबकि पूर्व वर्षो में जुलाई व अगस्त मास में लगभग 75 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किये जाते रहे हैं। पूर्व वर्षो में करवाये गये पौधारोपण की देखभाल का कार्य भी पूर्ण नहीं करवाया जा सका। अतः चालू वित्त वर्ष में भी शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण नहीं करवाये जा सकेगें और बजट सरेन्डर करना पडेगा। जिससे पर्यावरणीय हानि हो रही है। पौधे खरीदने पर रोक लगाने से पौधों की उपलब्धता के अभाव में पौधारोपण का लक्ष्य प्राप्त करना संभव नही है। यह कार्य हरियाणा वन विकास निगम को अलाट किया गया है, जो गैर तकनीकी तौर पर निजी नर्सरियों में उगाए गए पौधे खरीद कर विभाग को सप्लाई करेगें। जिनकी सफलता की संभावना शून्य के समान है।

पहले वन विभाग व वन्य प्राणी शाखा का वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए आपसी तालमेल से सामूहिक कार्य प्रणाली चल रही थी, अब उस को समाप्त किया गया। जिससे वन्य प्राणियों की सुरक्षा संबंधी मामलो में बाधाएं आ रही हैं। बहुत से ऐसे आदेश जारी किए गए हैं जिनसे कर्मचारियों व अधिकारियों के 194 पद समाप्त होगें, सरकार को राजस्व की हानि, बेरोजगारी का बढ़ना, कर्मचारियों व मजदूरों का शोषण भी बढ़ेगा। निगमीकरण को बढ़ावा देने के लिए बिना ढ़ांचागत सुविधाओं के कांटेदार तार, ट्री- गार्ड, फैंस पोस्ट, पौलीथीन बैग्ज, पैस्टीसाईड का अनुमोदित स्त्रोत घोषित करवा कर निगम द्वारा उत्पादित सामान को मुख्यतया वन विभाग को सप्लाई किया गया। कई केसों में तो विभाग द्वारा अधीनस्थ अमले की बिना मांग के सामान खरीदा गया, जिससे सरकार को राजस्व की हानि हुई। नियमों को नजर अंदाज करके भौंडसी व मसानी वन भूमि को वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए देना, पौधारोपण के लिए एक करोड़ अट्ठासी लाख रूपये अलाट करना, सरकारी सम्पतियों व भवनों को बिना किराये निगम को प्रयोग करने की अनुमति देने से भ्रष्टाचार बढ़ा है व सरकार को वित्तीय हानि हुई है।

वन मजदूर यूनियन ने अपने ज्ञापन के माध्यम से मुख्य मंत्री से अनुरोध किया कि विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिवो द्वारा उनके कार्यकाल में लिए गए गैर कानूनी, अवैज्ञानिक व अव्यावहारिक निर्णयों को रद्द करने अन्य मुद्दों पर विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों की जो कमेटी गठित की हुई उससे विश्लेषण करवाकर कमेटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट की समीक्षा करने व वन विभाग व पर्यावरण को बचाने के लिए जन हितैषी निर्णय लेने की अनुकम्पा करे।

ज्ञापन के माध्यम से वन मजदूरों ने लंबे अरसे से चली आ रही अपनी मांगों को पुनः एक बार सरकार के द्वार पहुँचने कि कोशिश कि है। मजदूरों ने मुख्य रूप से अव्यावहारिक बायोमैट्रिक व टैण्डर प्रणाली को बंद करने, विभाग की उत्पादन शाखा का हरियाणा वन विकास निगम में समायोजन का आदेश रद्द करने, श्रम नियमों की पालना करते हुए मस्टर रोल प्रणाली लागू करवाने, ई.एस.आई., ई.पी.एफ. वर्कमैन कम्पनसेशन, पैमेंट ऑफ वेजिज एक्ट, श्रम कल्याण बोर्ड से पंजीकरण, हाजिरी कार्ड, औजार, मातृत्व अवकाश, बकाया वेतन व एरियर भुगतान, कुशलता के आधार पर वेतन का भुगतान हर माह की 7 तारीख तक किया जाए व पिछले 2 वर्षों से रोकी गई मजदूरों की मजदूरी की मांग रखी है।

वर्क स्टडी के आधार पर एस.ओ.आर. बनाकर कोस्ट नार्मल निर्धारित करवाने, सरकार द्वारा समय-समय पर जारी सेवाएं नियमितीकरण की नीतियों की शर्तें पूरी करने वाले श्रमिकों/कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करवाने, वन भूमि से अवैध कब्जे हटवाने, कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए सफेदा,पापुलर व अन्य प्रजातियों के वृक्षों के समर्थन मूल्य घोषित कर खरीद सुनिश्चित करवाने, वन्य प्राणियों के आवासों व आवारा पशुओं का प्रबंध करवाने, जांच एवं मूल्यांकन की रिपोर्टों की वसूली बंद करवाने, विभाग में खाली पड़े पदों पर भर्ती, जब तक भर्ती नहीं होती सीधी भर्ती के पदों को पदोन्नति से भरा जाने व श्रमिक पद के सेवा नियम अधिसूचित किया करवाने तथा पदोन्नति का प्रावधान करवाने कि मांग लंबे अरसे से अनसुनी ही पड़ी है।

सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष कामरेड सतवीर सिंह, ज़िला कोषाध्यक्ष एस एल प्रजापति, प्रवीर भट्टाचार्य, सर्व कर्मचारी संघ के ज़िला प्रधान कंवर लाल यादव, ज़िला सचिव संजय सैनी, पूर्व प्रधान व परिवहन विभाग के नेता ओमवीर शर्मा, जनवादी नौजवान सभा के बलजीत पूनीया ने श्रमिकों को संबोधित कर अपना समर्थन दिया। ज्ञापन देने के समय वन मंत्री श्री नरवीर सिंह से कल अर्थात 11 अक्तूबर को एक शिष्टमंडल के मिलने का समय भी निश्चित हुआ है, जो मजदूरों कि समस्याओं से वन मंत्री को पुनः अवगत करवाएगा।

Sandeep Siddhartha, Senior Reporter, delhiNCRnews.in bureau

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